गरियाबंद

​गायत्री मंदिर में बसंत पंचमी पर 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ
24-Jan-2026 3:11 PM
​गायत्री मंदिर में बसंत पंचमी पर 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ

नवापारा राजिम, 24 जनवरी। हिंदू धर्म में माघ मास के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि का विशेष रूप से धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना गया है क्योंकि इसी दिन विद्या की देवी मानी जाने वाली मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। पंचांग के अनुसार यह महापर्व 23 जनवरी शुक्रवार को मनाया गया।

बसंत पंचमी के 1 दिन पहले मिशन के कार्यकर्ताओं द्वारा सुबह 6 से शाम 6 बजे तक अखंड जाप का क्रम चलाया गया। जिसमें सभी ऊर्जावान कार्यकर्ताओं ने गायत्री मंत्र की साधना किए। दूसरे दिन गायत्री शक्तिपीठ नवापारा में 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां सरस्वती पूजन,विद्यारंभ संस्कार और गायत्री महामंत्र जप के साथ विश्व कल्याण,ज्ञान वृद्धि और सुख-समृद्धि की कामना के साथ विशेष महामृत्युंजय मंत्र आहुतियां दी गई हैं।

एवं 2 बच्चों का विद्यारंभ संस्कार और 1 जन्मदिन संस्कार किया गया। इस पावन दिन पर गायत्री साधक विशेष अनुष्ठान और साधना की शुरुआत करते हैं। सनतान परंपरा के अनुसार यह बसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक माना गया है। बसंत पंचमी के महापर्व पर गायत्री साधकों की विद्या,बुद्धिऔर कला बढ़ती है।

उसकी साधना सफल होती है और प्रत्येक क्षेत्र में वह उन्नति प्राप्त करता है। मां सरस्वती के आशीर्वाद से व्यक्ति को वाणी की मधुरता,कला-साधना में सफलताऔर मानसिक शुद्धता प्राप्त होती है।


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