दुर्ग

दो किस्तों में यूरिया वितरण व्यवस्था समाप्त करने मांग
29-May-2026 6:56 PM
दो किस्तों में यूरिया वितरण व्यवस्था समाप्त करने मांग

केन्द्रीय रसायन व उर्वरक मंत्री को लिखा गया पत्र
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 29 मई।
दो किस्तों में यूरिया वितरण व्यवस्था समाप्त की जाय साथ ही किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तायुक्त खाद व प्रमाणित बीज उपलब्ध हो किसानों के बीच यह मांग अब जोर पकडऩे लगी है किसान नेता ढालेश साहू एवं केन्द्रीय रसायन व उर्वरक मंत्री को पत्र लिखकर यह उक्त मांग की है

श्री साहू का कहना है कि है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश के जिला दुर्ग अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान खरीफ एवं धान सीजन के दौरान खाद-बीज की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। सहकारी समितियों एवं सेवा केंद्रों में किसानों की लंबी कतारें लग रही हैं, वहीं कई स्थानों पर खाद एवं बीज की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने के कारण किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों को यूरिया दो किस्तों में दिए जाने की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे किसानों को बार-बार समितियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे समय, मजदूरी एवं परिवहन व्यय बढ़ रहा है। धान की खेती समय पर निर्भर रहती है और यदि रोपाई एवं बियासी के दौरान किसानों को आवश्यक उर्वरक समय पर उपलब्ध नहीं हुआ तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा।
उनका कहना है कि पूर्व वर्षों में किसानों को प्रति एकड़ लगभग 2 बोरी यूरिया, 1 बोरी डीएपी . एवं 2 बोरी पोटाश उपलब्ध कराया जाता था, जिससे पौधे बढ़ते हैं एवं उत्पादन बेहतर होता था। वर्तमान में रासायनिक उर्वरकों की अनुशंसित मात्रा में बदलाव एवं सीमित वितरण व्यवस्था के कारण किसानों में असंतोष बढ़ रहा है। इसके अतिरिक्त जिला दुर्ग अंतर्गत कई समितियों में धान बीज की सप्लाई भी प्रभावित एवं लगभग ठप स्थिति में है। किसान समय पर प्रमाणित बीज नहीं मिलने से परेशान हैं और मजबूरी में निजी दुकानों का सहारा लेने को विवश हो रहे हैं। वहीं सीमित आपूर्ति व्यवस्था के कारण निजी बाजारों में भी खाद आसानी से उपलब्ध नहीं  हो पा रही है

उन्होंने मांग किया कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तायुक्त खाद उपलब्ध कराई जाए।दो किस्तों में यूरिया वितरण की व्यवस्था समाप्त कर एकमुश्त वितरण किया जाए। जिला दुर्ग अंतर्गत सभी सहकारी समितियों में पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया जाए। धान बीज की सप्लाई तत्काल सुचारू की जाए।. नकली एवं घटिया खाद-बीज पर कड़ी कार्यवाही की जाए। निजी बाजार में खाद की उपलब्धता एवं मूल्य नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए।. किसानों की सुविधा हेतु वितरण व्यवस्था को सरल एवं पारदर्शी बनाई जाए।


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