दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 4 मई। जैन समाज एवं गौसेवा जगत के लिए अत्यंत भावुक एवं श्रद्धामयी स्मृतियों के बीच आज श्री कृष्णा जीव रक्षा केंद्र गौशाला, मोहलाई-छतागढ़ (दुर्ग) में नवीन कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन किया गया। यह वही पावन गौशाला है, जिसकी स्थापना वर्ष 1996 में दुर्ग में हुए पूज्य जैन साध्वी श्री प्रीति सुधा जी महाराज के प्रेरणादायी चातुर्मास के दौरान उनकी दिव्य प्रेरणा एवं गौसेवा भावना से हुई थी।
ज्ञात हो कि 1 मई 2026 को पूज्य साध्वी प्रीति सुधा जी महाराज का स्वर्गवास एवं देवलोक गमन हो गया। उनके देवलोक गमन का समाचार सुनते ही समूचे क्षेत्र में शोक एवं श्रद्धा का वातावरण निर्मित हो गया। साध्वी श्री का सम्पूर्ण जीवन धर्म, साधना, त्याग, तपस्या एवं जीव दया के लिए समर्पित रहा। उनके ओजस्वी प्रवचनों ने हजारों लोगों के जीवन को धर्ममय दिशा प्रदान की।
सन 1996 में दुर्ग में आयोजित उनके ऐतिहासिक चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में सभी समाज एवं वर्गों के लोग उनके प्रवचन सुनने पहुंचते थे। साध्वी श्री ने अपने प्रेरणामयी उद्बोधनों में विशेष रूप से गौसेवा, जीव रक्षा, करुणा एवं मानवता का संदेश दिया। उनकी पावन प्रेरणा से ही मोहलाई-छतागढ़ क्षेत्र में श्री कृष्णा जीव रक्षा केंद्र गौशाला की स्थापना का पुण्य कार्य प्रारंभ हुआ, जो आज भी निरंतर गौसेवा एवं जीवदया के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य कर रहा है।
बैठक में गौशाला के संचालन एवं सेवा कार्यों को और अधिक सशक्त एवं व्यवस्थित बनाने हेतु नवीन कार्यकारिणी का गठन सर्वसम्मति से किया गया। बैठक में उपस्थित सदस्यों ने सर्वानुमति से कांतिलाल पारख को अध्यक्ष, राकेश संचेती को महामंत्री तथा संजय लोढ़ा को कोषाध्यक्ष मनोनीत किया।
नवनियुक्त पदाधिकारियों ने पूज्य साध्वी प्रीति सुधा महाराज के आदर्शों एवं प्रेरणाओं को आत्मसात करते हुए गौशाला के माध्यम से गौसेवा, जीवदया एवं धार्मिक गतिविधियों को और अधिक व्यापक स्वरूप प्रदान करने का संकल्प व्यक्त किया।
बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि पूज्य साध्वी प्रीति सुधा महाराज केवल एक साध्वी नहीं, बल्कि करुणा, सेवा एवं आध्यात्मिक चेतना की जीवंत प्रतिमूर्ति थीं। उन्होंने अपने जीवनकाल में समाज को धर्म के साथ-साथ जीवों के प्रति संवेदनशील बनने की प्रेरणा दी। आज भी उनके प्रवचन, उनकी वाणी एवं उनके द्वारा स्थापित सेवा संस्कार समाज को प्रेरित कर रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में पूज्य साध्वी श्री के चित्र के समक्ष श्रद्धांजलि अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा गया तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया।


