दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
भिलाई नगर, 10 फरवरी। भाजपा पार्षद संतोष मौर्य ने पत्रकार वार्ता में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि नगर पालिक निगम मिलाई की परियोजना शाखा में 12.66 करोड़ रुपये के पेवर ब्लॉक कार्यों में संगठित भ्रष्टाचार का खुलासा जांच से बचने के लिए फाइने छुपाई जा रहीं ।
नगर पालिका निगम भिलाई की परियोजना शाखा की कार्यशैली लंबे समय से सवालों के घेरे में रही है। अब उपलब्ध तथ्यौ, दस्तावेजों एवं शपथ पत्रों के आधार पर यह स्पष्ट होता आ रहा है कि परियोजना शाखा के अंतर्गत कराए गए पेवर ब्लॉक कार्यों में करोड़ों रुपये का सुनियोजित भ्रष्टाचार किया गया है। पिछले 23 महीनों की अवधि में परियोजना शाखा के माध्यम से लगभग 12 करोड़ 66 लाख रुपये के पेवर ब्लॉक कार्य स्वीकृत एवं भुगतान किए गए, जिनमें भारी वित्तीय अनियमितताएं, नियमों की खुली अवहेलना और भ्रष्ट आचरण सामने आए हैं।
भाजपा पार्षद संतोष मौर्य द्वारा 17 अक्टूबर 2025 को आयोजित नगर निगम की सामान्य सभा में विधिवत शपथ पत्र प्रस्तुत कर परियोजना शाखा के कार्यों पर सीधा और स्पष्ट आरोप लगाया गया। श्री मौर्य ने अपने शपथ पत्र में यह स्पष्ट कहा कि परियोजना शाखा अंतर्गत कराए गए अधिकांश पेवर ब्लॉक कार्य स्वीकृत प्राक्कलनों के अनुरूप नहीं हैं। कार्यों में गुणवत्ता, मात्रा, स्थल एवं भुगतान सभी स्तरों पर गंभीर अनियमितता की गई है।
इन कार्यों की जांच कलेक्टर की प्रत्यक्ष निगरानी में, नगर निगम से इतर अन्य विभार्गा के अधिकारियों की संयुक्त समिति से कराई जाए। उनका आरोप है कि परियोजना शाखा अंतर्गत कम से कम 33 ऐसे कार्यदेश हैं, जिनमें गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और जिनकी जांच की मांग लगातार की जा रही है, किंतु विभाग द्वारा जानबूझकर जानकारी छुपाई जा रही है। जिन स्थानों के लिए कार्य स्वीकृत हुए थे, उन स्थानों पर कार्य किया ही नहीं गया।
राज्य शासन से जिन शर्तों एवं प्राक्कलनों के आधार पर स्वीकृति ली गई, उनके अनुरूप कार्य नहीं करवाए गए। जिन स्थानों पर कार्य हुआ, वहाँ कार्य को मात्रा, गुणवत्ता और भुगतान में भारी अंतर पाया गया। संबंधित फाइलों एवं दस्तावेजों को दबाने और गायब करने का प्रयास किया जा रहा है। यह सब इस बात की ओर इशारा करता है कि घोटाले को उजागर होने से बचाने के लिए सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं।
सूचना का अधिकार अधिनियम का खुला उल्लंघन
भाजपा पार्षद ने आरोप लगाया कि नगर निगम के पार्षद महेश वर्मा द्वारा 9 जून 2025 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी गई। किंतु आज दिनांक तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके विपरीत अभी भी 20 फाइलें जानबूझकर छुपाई जा रही हैं, जिनकी अनुमानित कार्यदेश लागत लगभग 6 करोड़ 40 लाख रुपये है।
भाजपा पार्षदों का स्पष्ट आरोप है कि आयुक्त निष्पक्ष रूप से कार्य नहीं कर रहे हैं। यदि शीघ्र न्यायसंगत कार्रवाई नहीं की गई, तो भाजपा पार्षद आंदोलन, न्यायालय एवं अन्य संवैधानिक विकल्प अपनाने को विवश होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी।


