दुर्ग

पत्नी को जिंदा जलाने वाले पति को उम्रकैद
29-Jan-2026 3:57 PM
पत्नी को जिंदा जलाने वाले पति को उम्रकैद

12 साल फरार रहा आरोपी
 'छत्तीसगढ़' संवाददाता
भिलाई नगर, 29 जनवरी ।
घरेलू विवाद के चलते वर्ष 2012 में अपनी पत्नी को जिंदा जलाने वाले पति को 14 साल बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। दुर्ग जिले के भिलाई नेवई थाना अंतर्गत इस घटना में अग्निदग्धा महिला ने सातवें दिन अस्पताल में दम तोड़ दिया था। जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इसे च्विरल से विरलतमज् अपराध की श्रेणी में नहीं मानते हुए मृत्युदंड से इंकार कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना 15 जनवरी 2012 की रात की है। नेवई स्थित मिनीमाता पारा निवासी ममता (25) अपने पति घांसू उर्फ झांसूराम के साथ घर पर थी। घांसूराम अपनी पूर्व पत्नी सुमन का पक्ष लेता था जिस कारण पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता था।

घटना वाली रात करीब 9.30 बजे आरोपी घांसूराम शराब के नशे में घर पहुंचा। उसने पत्नी ममता से गाली-गलौज की और मारपीट करने लगा। जान से मारने की धमकी देते हुए उसने एक प्लास्टिक बोतल में रखा मिट्टी का तेल ममता पर उड़ेल दिया। गुस्से और भय की स्थिति में ममता ने खुद को आग लगा ली। इसके बाद आरोपी ने जलती हुई पत्नी पर दोबारा मिट्टी का तेल डाल दिया, जिससे आग और भड़क उठी और ममता गंभीर रूप से झुलस गई। ममता की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी थी।

नेवई पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और ममता को गंभीर हालत में शासकीय अस्पताल दुर्ग के बर्न यूनिट में भर्ती कराया। अगले दिन कार्यपालिक मजिस्ट्रेट डीआर मरकाम ने ममता का मरणासन्न कथन दर्ज किया। बयान में ममता ने स्पष्ट रूप से बताया कि उसके पति ने जान से मारने की नीयत से उस पर मिट्टी का तेल डाला और आग लगने के बाद भी उस पर केरोसिन डालता रहा।

घटना के बाद आरोपी फरार हो गया। वर्ष 2014 में कोर्ट ने उसे फरार घोषित कर स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया। करीब 12 साल बाद 17 नवंबर 2024 को आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 307 (हत्या का प्रयास) में केस दर्ज किया, लेकिन 22 जनवरी को इलाज के दौरान ममता की मौत होने पर मामला धारा 302 (हत्या) में तब्दील कर दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल से जली साड़ी, जले कपड़े और मिट्टी तेल की बोतल जब्त की थी।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश के विनोद कुजूर ने सभी साक्ष्य, गवाहों और मरणासन्न बयान के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया।
कोर्ट ने कहा कि अपराध गंभीर है, लेकिन यह 'विरल से विरलतमÓ श्रेणी में नहीं आता। अदालत ने आरोपी घांसू उर्फ झांसूराम को आजीवन कारावास 1000 अर्थदंड और अर्थदंड न चुकाने पर 6 माह अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
 


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