दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
छुरा, 28 जनवरी। आईएसबीएम विश्वविद्यालय, नवापारा-कोसमी, छुरा में 77वाँ गणतंत्र दिवस गरिमामय वातावरण में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ध्वजारोहण, सांस्कृतिक प्रस्तुति एवं गणतंत्र के मूल्यों पर आधारित संक्षिप्त संबोधन आयोजित किए गए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आनंद महलवार कुलसचिव डॉ बीपी भोल के साथ छुरा तहसील के तहसीलदार गैंदलाल साहू एवं नायब तहसीलदार दोनेंद्र साहू विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर छुरा तहसील के तहसीलदार गैंदलाल साहू ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि हमारे लोकतांत्रिक संकल्पों का उत्सव है। यह दिन हमें यह स्मरण कराता है कि भारत की शक्ति उसकी लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान में निहित है। गणतंत्र हमें कानून के प्रति सम्मान, कर्तव्यबोध और नागरिक जिम्मेदारी का संदेश देता है। युवा पीढ़ी से अपेक्षा है कि वह संविधान के मूल्यों को आत्मसात कर एक सशक्त और समावेशी भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाए।
नायब तहसीलदार दोनेंद्र साहू ने कहा कि 26 जनवरी के दिन हमें सिखाता है कि गणतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिक चेतना का नाम है। जब प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों को समझता है, तभी लोकतंत्र मजबूत होता है।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आनंद महलवार ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियाँ, विशेषकर इसरो की अंतरिक्ष यात्राएँ, देश की बौद्धिक क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं। उन्होंने देश की सुदृढ़ होती अर्थव्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका निरंतर मजबूत हो रही है। साथ ही उन्होंने भारत की सांस्कृतिक, भाषाई और सामाजिक विविधता को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए विद्यार्थियों से एकता और समावेशन के मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया।
कुलसचिव डॉ. बीपी भोल ने अपने संबोधन में देश के आर्थिक विकास के साथ-साथ समग्र विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सशक्त अर्थव्यवस्था तभी सार्थक होती है जब उसका लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचे और विकास शिक्षा, प्रशासन एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ संतुलित रूप से आगे बढ़े।
परीक्षा नियंत्रक डॉ. मनीष उपाध्याय ने अपने संबोधन में भारतीय लोकतंत्र की मजबूती में नागरिकों की सक्रिय भूमिका और जिम्मेदार सहभागिता के महत्व को रेखांकित किया।
इस दौरान विधि संकाय की प्राध्यापिका सुकृति पाठक ने अपने वक्तव्य में भारतीय संविधान के निर्माण की ऐतिहासिक प्रक्रिया पर प्रकाश डाला और संविधान सभा की भूमिका को रेखांकित किया।
विज्ञान संकाय के सहायक प्राध्यापक लक्ष्मीकांत सिन्हा ने भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों, उसकी संरचना एवं नागरिक अधिकारों–कर्तव्यों की महत्ता पर अपने विचार व्यक्त किए।
इस क्रम में फार्मेसी संकाय के छात्र कुशाल और सागर सांगीतिक प्रस्तुति दी। हिन्दी विभाग के सहायक प्राध्यापिका डॉ. मुमताज परवीन ने सम्पूर्ण वंदे मातरम का गायन किया। इस कार्यक्रम का संचालन हिन्दी विभाग के सहायक आचार्य एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दिवाकर तिवारी ने किया तथा कार्यक्रम का संयोजन ट्विंकल दीपक और विकास साहू ने किया।
धन्यवाद ज्ञापन छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. शुभाशीष बिस्वास द्वारा दिया गया। इस अवसर पर विभिन्न संकायों के प्राध्यापक एवं कर्मचारी गण उपस्थित रहे।


