दुर्ग

जिपं में अवैध रेत उत्खनन व धान खरीदी का मुद्दा गर्माया
20-Jan-2026 6:28 PM
जिपं में अवैध रेत उत्खनन व धान खरीदी का मुद्दा गर्माया

सामान्य सभा की बैठक
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 20 जनवरी।
जिला पंचायत दुर्ग की सभाकक्ष में  सामान्य सभा बैठक हुई। इसमें हाईटेक तरीके से अवैध रेत उत्खनन व धान खरीदी का मुद्दा गर्माया रहा है।

इसी बीच कांग्रेसी सदस्य ने जिले भर में चल रहे अवैध खनिज उत्खनन को किसका संरक्षण होने का सवाल उठाया। इस पर दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर ने इसमें राजनीतिक संरक्षण होने की बात कही तो जिला पंचायत सभापति जितेन्द्र यादव ने इसे विभागीय संरक्षण का आरोप लगाया। जानकारी के अनुसार विधायक के जवाब का खंडन करते हुए जितेन्द्र ने कहा दूसरे क्षेत्र में भले ऐसा (राजनीतिक संरक्षण) होता होगा मगर उनके क्षेत्र में चल रहे अवैध खनिज उत्खनन को विभागीय संरक्षण है तभी यह हो रहा है। बैठक में सगनी घाट के पास हाईटेक रेत उत्खनन, पाटन क्षेत्र में चल अवैध रेत उत्खनन के मामले में मौजूद विभागीय अधिकारी कार्रवाई की बात करते रहे मगर सदस्यों के सवाल पर अनुत्तरित नजर आए।

पाटन विधायक प्रतिनिधि अशोक साहू एवं कांग्रेसी सदस्यों ने धान खरीदी की लिमिट नहीं बढ़ाए जाने से किसानों हो रही दिक्कतों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इससे किसान पहले से परेशान है और अब अधिकारी उनके घर भौतिक सत्यापन करने जा रहे हैं जबकि उनकी एग्री स्टेक में पंजीयन है। किसान की अपनी खुद की जमीन है जिसका उपज वे बेचना चाह रहे हैं। अन्नदाता किसान चोर नहीं है। ऐसे में सत्यापन का कोई औचित्य नहीं है।

इस पर खाद्य नियंत्रक व डीएमओ ने कहा कि शासन का जैसा आदेश वैसा कर रहे हैं। अशोक साहू ने बटरेल उपार्जन केन्द्र में उपयोग किए जा रहे इलेक्ट्रनिक तराजू में त्रुटि का मुद्दा उठाते कहा कि इसमें जो 40 किलो 600 ग्राम धान तौला जाता है वह दूसरे तराजू से तौलने पर 41 किलो 500 ग्राम तक आ रहा है। उन्होंने कौही, असोगा एवं सोनपुर उचित मूल्य दुकान में  महीने के 25 तारीख के बाद खाद्यान्न वितरण किए जाने का मुद्दा उठाते कहा कि इससे वहां के ग्रामीण परेशान हैं।
बैठक में जरवाय कलामंच में स्कूल संचालित होने तथा रानीतराई स्थित लक्ष्मी बाई स्कूल में 66 की दर्ज संख्या होने के बावजूद शिक्षक नहीं होने का मुद्दा भी उठा। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष, सीईओ विभिन्न विभागों के अधिकारी व सदस्य गण मौजूद थे।


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