दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 11 अक्टूबर। राज्य शासन के रजत जंयती समारोह के उपलक्ष्य में हेमचंद यादव विश्वविद्यालय द्वारा 10 अक्टूबर समय 11 बजे शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के राधाकृष्णन हॉल में आयोजित किया गया।
यह जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव, दिग्विजय कुमार ने बताया कि छत्तीसगढ़ /50 एवं विकसित छत्तीसगढ/2047 पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यअतिथि के रूप में डॉ. टोपलाल वर्मा, छत्तीसगढ़ प्रान्त संघसंचालक एवं सक्रिय कार्यकर्ता, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ शामिल हुए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुप्रयोग के संबंध में सारगर्भित व्याख्यान दिया। संगोष्ठी में मुख्यवक्ता के रूप में शशांक शर्मा, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी, रायपुर उपस्थित थे।
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा विश्व की सबसे बड़ी प्राचीनतम ज्ञान परंपरा है। भारतीय ज्ञान परंपरा न केवल विद्यार्थियों के ज्ञान स्तर में वृद्धि कर रही है बल्कि इसके व्यवहारिक अनुप्रयोग समाज के सभी वर्गों के लिए समान रूप से लाभदायी है। विशिष्ट अतिथि के रूप में ललित चन्द्राकर, विधायक ग्रामीण एवं अल्का बाघमार महापौर, दुर्ग नगर निगम उपस्थित रहें।
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति, एन.पी. दीक्षित ने अपने संबोधन में कहा कि हवाई जहाज का आविष्कार ऑरविल और विल्बर राइट ने किया था किन्तु यह भारतीय ज्ञान परंपरा की ही विशेषता रही है कि मुम्बई निवासी शिवकर तलपड़े ने राइट ब्रदर्स से पूर्व ही मानवरहित हवाई जहाज का आविष्कार कर लिया था। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति पश्चात् कुलपति, प्रो. (डॉ.) संजय कुमार तिवारी ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ एकीकृत करने का प्रस्ताव है ताकि शिक्षा समग्र, समावेशी और बहुविषयक बने। विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेन्द्र कुलदीप ने धन्यवाद ज्ञापन प्रेषित किया।
कार्यक्रम का संचालन, डॉ. ज्योति धारकर, प्राध्यापक, शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्वशासी महाविद्यालय ने किया। इस अवसर पर हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के उपकुलसचिव, डॉ. राजमणि पटेल, राजेन्द्र चैहान, खेल संचालक, डॉ. दिनेश नामदेव, डिजिटल सलाहकार, डॉ. बी. गोपाल कृष्ण एवं समस्त सम्बद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्य भौतिक रूप से उपस्थित थे।


