दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
भिलाई नगर, 2 सितंबर। दुर्ग जिले में चिटफंड कंपनियों में डूबी रकम की वापसी के लिए निवेशकों से आवेदन मंगवाएं गए थे। जिले में करीब 1 लाख 65 हजार आवेदन मिले। लेकिन आवेदनों की एंट्री का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है। अधिकारियों ने बताया कि आवेदनों की संख्या अधिक होने की वजह से डाटा एंट्री वर्क पूरा करने में समय लग रहा है, अब तक लगभग 25 हजार आवेदनों की ही एंट्री हो सकी है, कितना समय लगेगा इसकी जानकारी नहीं है।
मिली जानकारी के मुताबिक अलग-अलग चिटफंड कंपनियों में लोगों ने करोड़ों रुपए जमा किए हैं। कंपनियां निवेशकों को रकम वापस करने के बजाए भाग गईं। चिटफंड कंपनियों में डूबी रकम की वापसी के लिए सरकार के निर्देश पर प्रशासन द्वारा निवेशकों से आवेदन मंगाया गया था। जिला प्रशासन द्वारा जिला मुख्यालय सहित दुर्ग, पाटन, धमधा के ब्लॉक मुख्यालयों और बोरी व अहिवारा स्थित मुख्यालय में भी निवेशकों का आवेदन जमा करने की व्यवस्था बनाई गई थी। आवेदन 4 अगस्त से 19 अगस्त तक लिए गए थे। जिला प्रशासन को प्राप्त आवेदनों की 10 दिन में एंट्री कर रिपोर्ट राज्य शासन को भेजनी थी, लेकिन आवेदनों की एंट्री का काम दस दिन बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो पाया है।
जिला प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार शिविर के दौरान मिले 1 लाख 65 हजार आवेदनों में से दुर्ग ब्लॉक में सबसे अधिक 86 हजार आवेदन जमा हुए हैं, बाकि आवेदन अन्य तहसीलों से मिले हैं। इसके अलावा करीब 8 हजार आवेदन जिला मुख्यालय में शिविर लगने से पहले ही लिया जा चुका था। एंट्री पूरी होने के बाद ही पता लगेगा कि किस चिटफंड कंपनी ने कितने निवेशकों ने कितनी राशि जमा करवाई थी। कंपनी वार जमा राशि व निवेशकों की संख्या की सूची बनाई जाएगी।
विदित हो कि आवेदनों की एंट्री में निवेशकों का नाम-पता, मोबाइल नंबर,जमा की गई राशि, किस कंपनी में जमा की है, जमा करने की तारीख व मैच्योरिटी की तारीख, पूर्ण पता, कम्पनी एजेंट का नाम, मोबाइल नंबर और पता समेत अन्य जानकारियां शामिल हैं। एंट्री में किसी तरह की गलती न हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। प्रशासन ने निवेशकों से मिले आवेदनों की एंट्री के लिए जिला मुख्यालय में 20 कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है। गति धीमी है और वर्क लोड ज्यादा, इसलिए राज्य शासन को निश्चित समय अवधि में रिपोर्ट नहीं दी जा सकी है।
गौरतलब हो कि भाजपा सरकार के शासनकाल में छत्तीसगढ़ की तमाम चिटफंड कम्पनियां को प्रतिबंधित करते हुए बंद कर दिया गया था। इसके डायरेक्टर्स के खिलाफ अपराध दर्ज कर कम्पनी की उस समय प्रदेश में स्थित सम्पत्ति भी सीज कर ली गई थी। चार से पांच वर्ष बीतने के बाद भी निदेशकों की रकम फँसी ही रही। चूंकि कांग्रेस ने चुनावी घोषणा पत्र में चिट फंड कंपनियों में फँसी रकम निवेशकों को लौटाने की बात शामिल की थी, अत: भूपेश बघेल सरकार ने चिटफंड कंपनियों में फंसे रूपये निवेशकों को दिलाने की प्रक्रिया के तहत निदेशकों से आवेदन मंगवाए हैं। राज्य शासन कार्य में तेजी लाते हुए इस मुद्दे को गंभीरता से निपटाने के प्रयास में है क्योंकि कांग्रेस का प्रदेश में शासनकाल लगभग ढाई वर्ष बीत चुका है।


