धमतरी

अटल स्टेडियम में दस करोड़ खर्च, पर खिलाड़ी अपने पैसे से बनवा रहे मैदान
03-Jan-2026 8:55 PM
अटल स्टेडियम में दस करोड़ खर्च, पर खिलाड़ी अपने पैसे से बनवा रहे मैदान

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कुरुद, 3 जनवरी। नगर एवं क्षेत्र में खेल को बढ़ावा देने को हमेशा लालायित रहे विधायक एवं पूर्व मंत्री अजय चन्द्राकर के बदौलत इस मद में सरकारी खजाने से करोड़ों ख़र्च किए गए, जिससे यहाँ सीमेंट मेटल्स से तैयार कई खुबसूरत ढांचे बनकर तैयार हो गये हैं। लेकिन खेल क्षमता निखारने इन संसाधनों का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। इसका दोष संबंधित एजेंसी या खुद खिलाडिय़ों का है, कहना मुश्किल है। पर खेल के शौकीन लोग अब भी अपने खर्च पर सुविधा जुटा मैदान को आबाद रखने का जतन कर रहे हैं।

गौरतलब है कि पूर्व में यहां के कब्बड्डी, वालीबॉल, शतरंज, बैडमिंटन, मैराथन एवं क्रिकेट के मैदान से निकल कई अच्छे खिलाडिय़ों ने प्रदेश के बाहर भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कहने और दिखाने योग्य यहां के मैदानों में करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। लेकिन अभी भी खिलाड़ी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। जबकि कुरुद खेल मैदान ने कई लोगों को सार्वजनिक जीवन एवं शासकीय नौकरी तक पहुंचाने में अहम रोल निभाया है। फिर भी यहाँ के क्रिकेट खिलाड़ी एक टर्फ विकेट के लिए तरस रहे हैं। जबकि नगर पंचायत की फाईलें एक से अधिक बार टर्फ विकेट बनाने में खर्च हुई राशि का हिसाब अपने सीने में दबाये पडीं है।  मैदान में होने वाले समाजिक, राजनीतिक और धार्मिक आयोजन को बंद करने को लेकर भी खिलाड़ी अवाज उठा चुके हैं। कुछ बरस पहले वालीबॉल और कब्बडी के लिए इंडोर स्टेडियम में खेल सुविधाओं का समुचित विस्तार किया गया था।

जिसे अब 100 बिस्तर अस्पताल के लिए स्वास्थ्य विभाग के हवाले कर दिया गया है। मंत्री रहते अजय चन्द्राकर ने अटल बिहारी वाजपेयी स्टेडियम में करीब दस करोड़ की लागत से खेल सुविधा जुटाने का काम किया था। थोड़े समय बाद ही यह संसाधन भी बेकाम सिद्ध होने लगे, क्रिकेट खेलने खिलाडिय़ों को अपने खर्च पर मैदान तैयार करना पड़ा, बैडमिंटन के शौकीन आज भी मरम्मत और बिजली बिल का खर्च उठा रहे हैं।

सरकारी धन से तैयार वालीबॉल का पक्का मैदान खेलने वालों का घुटने तोड़ रहा है। इसलिए प्रमोद शर्मा, संजू चन्द्राकर, सुरेश, पंकज वर्धयानी, दिनेश अग्रवाल,कमलेश रेड्डी, प्रभात बैस,भारत साहू,कन्हैया पटेल,नूतन साहू, राहुल सिन्हा,सागर चंद्राकर,नरेन्द्र गुप्ता, राजा सिन्हा, राज निषाद, लक्ष चन्द्राकर, सुन्नी नेताम, लोकू साहू आदि मिट्टी का मैदान तैयार कर फिर से यहाँ की रौनक बढ़ाने अपनी जेब हल्की कर रहे हैं।

रोज़ सुबह मैदान में वालीबॉल का प्रेक्टिस करने वाले खिलाडिय़ों को प्रोत्साहित करने राइस मिल एसोसिएशन अध्यक्ष हितेंद्र केला ने दस हज़ार की किट्स उपलब्ध कराया, लेखराज चंद्राकर ने अपने ट्रेक्टर और मजदूर लगा कर मैदान की जोताई और सफाई कराईं, संजय पटवारी, मुकेश पवार खिलाडिय़ों को खेल की बारीकियाँ सीखा रहे हैं, अन्य साथी भी नेट, बॉल, चाय पानी का खर्च उठा रहे हैं। इस तरह जनभागीदारी से शुरू इस अभियान का अच्छा प्रतिशाद मिलने लगा है। यहाँ खेलने वाली खिलाड़ी क्षेत्रीय स्पर्धा में भाग लेकर ईनाम जीत रहे हैं।

बताया गया है कि खेल मैदान का रखरखाव का जिम्मा अब निकाय के बदले खेल एवं युवा कल्याण विभाग को दे दिया गया है। जिसके चलते मैदान के रख रखाव की स्थिति और भी खराब होने लगी है। मैदान अब खिलाडिय़ों के लिए कम और मवेशी और नशा पान के लिए ज्यादा उपयोगी सिद्ध हो रहा है। परन्तु नेताओं के भाषण और अधिकारियों की फाईलों पे यकीन करें तो नगर खेल सुविधाओं के मामले में कब का आत्मनिर्भर हो चुका है। लेकिन खिलाडिय़ों की नजऱ से देखें तो मैदान आज भी कई बुनियादी जरूरतों के मोहताज हैं।


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