दन्तेवाड़ा

फाग गीतों से सजेगी नकुलनार की होली
02-Mar-2026 9:15 PM
फाग गीतों से सजेगी नकुलनार की होली

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
 दंतेवाड़ा , 2 मार्च।
आपने मथुरा और वृंदावन की होली होली अवश्य सुनी होगी। इसी तर्ज पर दंतेवाड़ा जिला अंतर्गत नकुलनार गांव में होली का पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है।
इस पर्व को मनाने ग्रामीणों द्वारा ग्रामवासियों द्वारा एक पखवाड़े पूर्व तैयारी आरंभ कर दी जाती है। स्थानीय आस्था के केंद्र शिव मंदिर परिसर में फाग के गीतों का अभ्यास किया जाता है। इसमें वाद्य यंत्रों का प्रमुखता से उपयोग किया जाता है। इनमें ढोलक, मंजीरा और  झांझ प्रमुख रूपसे शामिल है।

इस दौरान रामायण और महाभारत कालीन लोकगीतों का लय और ताल के साथ गायन किया जाता है। गांव के प्रत्येक ग्रामीण के घर फाग की टोली पहुंचती है। जहां बिना किसी भेदभाव के फाग के गीतों का गायन किया जाता है। इस दौरान सामाजिक समरसता की नायाब बानगी नजर आती है। जिसमें जाति और  वर्ग का भेद समाप्त हो जता है।

शुभ मुहूर्त में होलिका दहन
ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा होलिका दहन हेतु लकडिय़ों का इंतजाम किया जाता है। पूर्णिमा के दिवस मंत्रोच्चार के मध्य स्तंभ स्थापित किया जाता है। इसके उपरांत रात्रि कल में होलिका दहन हेतु लकडिय़ों को व्यवस्थित किया जाता है।माघ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा की रात्रि को शुभ मुहूर्त में सामूहिक रूपसे होलिका दहन किया जाता है। जिसकी अग्नि से ग्राम के प्रत्येक घर में होलिका दहन किया जाता है। इसके उपरांत आसमान होली के रंगों से रंगीन हो जाता है।


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