दन्तेवाड़ा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बचेली/किरंदुल, 15 फरवरी। एनएमडीसी की पहाडिय़ों और किरंदुल परियोजना की खदानों के मध्य स्थित कैलाश नगर का प्राचीन शिव मंदिर अब एक भव्य आध्यात्मिक धाम के रूप में नई पहचान पा चुका है। महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लग गईं और पूरे क्षेत्र में हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे।
समुद्र तल से लगभग एक हजार मीटर की ऊँचाई पर बसे इस मंदिर में शिवलिंग की विशेष पूजा-अर्चना की गई। किरंदुल के साथ-साथ बचेली से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। एनएमडीसी किरंदुल के प्रमुख रविन्द्र नारायण, उपमहाप्रबंधक के.एल. नागवेणी, सुब्रमण्यम सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी तथा पालिकाध्यक्ष रूबी शैलेन्द्र सिंह भी पूजा में शामिल हुए।
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एनएमडीसी प्रबंधन द्वारा किरंदुल नगर से कैलाश नगर तक दिनभर बसों की व्यवस्था की गई। निजी चारपहिया वाहनों को आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद प्रवेश दिया गया, जबकि सुरक्षा कारणों से दुपहिया वाहनों को अनुमति नहीं दी गई। इस व्यवस्था से दूर-दराज से आए भक्तों को विशेष सहूलियत मिली।
श्रमिकों की मेहनत से जुड़ी उनकी आस्था
एनएमडीसी किरंदुल परियोजना के सौजन्य से इसका जीर्णोद्धार कार्य पूरा हुआ, जिसने वर्षों पुरानी आस्था को आधुनिक भव्यता के साथ जोड़ दिया है। दरअसल, किरंदुल परियोजना के शुरुआती दौर में परियोजना के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए कैलाश नगर टाउनशिप प्रमुख आवासीय क्षेत्र हुआ करता था। उसी समय कर्मचारियों और अधिकारियों ने आपसी सहयोग से कैलाश नगर में एक शिव मंदिर का निर्माण किया था। यह मंदिर केवल पूजा-स्थल नहीं बल्कि परियोजना परिवार की सामूहिक श्रद्धा का प्रतीक रहा। यह क्षेत्र किंरदुल परियेाजना के निक्षेप क्रं. 14 के अंतर्गत आता है। एनएमडीसी की जब स्थापना हुई थी 1968 में लौह अयस्क का उत्पादन इसी निक्षेप से हुआ था।
समय बीतता गया, संस्थापक पीढ़ी सेवानिवृत्त होती चली गई, लेकिन आस्था की परंपरा आगे बढ़ती रही। नई पीढ़ी के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने एनएमडीसी प्रबंधन के सहयोग से मंदिर को भव्य स्वरूप देने का संकल्प लिया। लगभग दो वर्ष पूर्व मंदिर के व्यापक जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया गया।
अब मंदिर का स्वरूप किसी प्राचीन तीर्थ से कम नहीं प्रतीत होता। दिसंबर 2025 को एनएमडीसी के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक के किरंदुल प्रवास के दौरान मंदिर का विधिवत उद्घाटन किया गया था तथा उन्होंने पूजा-अर्चना कर इसे श्रद्धालुओं के लिए समर्पित किया।
समुद्र तल से लगभग एक हजार मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। आज खदानों के बीच स्थित यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि एनएमडीसी परिवार की परंपरा, आस्था और सामूहिक भावना का जीवंत प्रतीक बन चुका है, जहां हर महाशिवरात्रि को आस्था पर्व में बदल देती है और पहाड़ों के बीच गूंज उठता है हर-हर महादेव का जयघोष।


