मांगें पूरी नहीं होने पर करेंगे आंदोलन, विधानसभा चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
हाशिम खान
लखनपुर, 3 मार्च (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। सरगुजा जिले का एक ऐसा गांव जो 3 ग्राम पंचायत के सीमाओं पर बसा हुआ है, यहां के कोरवा-पंडो जनजाति के ग्रामीण आजादी के बाद भी शिक्षा, स्वास्थ्य बिजली, सडक़, पानी सहित शासकीय योजनाओं से वंचित हैं।
मामला लखनपुर विकासखंड के ग्राम खिऱहिर का है। ग्राम लब्ज़ी, रेमहला, बड़ा दमाली तीनों गांवों की सीमाओं पर बसा ग्राम खिऱहिर में कोरवा पंडो जनजाति सहित अन्य समुदाय के लगभग 100 परिवार निवासरत हैं। इस गांव के लोग आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी शिक्षा स्वास्थ्य, सडक़, बिजली, पानी जैसे मूलभूत समस्याओं से जूझने को मजबूर हंै। ग्रामीणों की समस्याओं से शासन-प्रशासन को कोई सरोकार नहीं है।
इस आधुनिक युग में आज भी वहां के ग्रामीण ढोढ़ी का पानी पीने मजबूर हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य से कोसों दूर, बदहाल सडक़ंे, लालटेन युग में जीवन जीने को मजबूर हैं, तो वहीं इस गांव के बच्चों ने स्कूल तक नहीं देखा है।
इस संबंध में लुंड्रा विधायक डॉ. प्रीतम राम से ‘छत्तीसगढ़’ द्वारा फोन से संपर्क करने पर उनके द्वारा कहा गया कि वह यूपी दौरे पर हैं।
ग्रामीणों ने मीडिया को बताया कि वर्षों के बाद गांव में खाद्य मंत्री अमरजीत भगत पहुंचे और ग्रामीणों की मांग पूरा करने का आश्वासन दिया, जिसमें 7 हैंडपंप खनन कार्य पूर्ण हो चुका है तथा प्राथमिक शाला भवन का निर्माण कार्य जारी है, लेकिन 1 वर्ष बीत जाने के बाद भी अन्य मांगें पूरी नहीं हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि सत्ता बदलने के बाद भी हमारी मांगों को पूरा नहीं किया गया। अगर हमारी मांगें जल्द पूरी नहीं हुई तो आंदोलन करेंगे, साथ आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा।
लालटेन युग में जीने मजबूर
आधुनिक युग में भी ग्राम खिऱहिर के ग्रामीण लालटेन युग में जीवन व्यतीत करने को मजबूर हंै। ग्रामीणों का कहना है कि विगत कई वर्षों पूर्व गांव में छोटे-छोटे सोलर पैनल लगाया गया था, परंतु मेंटेनेंस नहीं होने के कारण वह भी खराब हो गया है। कई बार ग्रामीणों के द्वारा गांव में बिजली व्यवस्था को लेकर जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, विधायक मंत्री सहित विद्युत विभाग से मांग की, परन्तु आज तक इनकी मांगें पूरी नहीं हुई। जिस कारण आज भी ग्रामीण लालटेन युग में जीवन जीने को मजबूर हैं।
ढोढ़ी के पानी से बुझा रहे प्यास
कई वर्षों से ग्रामीण ढोढ़ी का पानी से अपनी प्यास बुझा रहे हैं तथा गर्मी का मौसम आते ही पानी के लिए ग्रामीणों को 5 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। सात हैंडपंपों की सौगात मिली, जिसमें 5 हैंडपम्प में लाल फ्लोराइड युक्त पानी निकलने से पीने योग्य नहीं है तो वहीं एक हैंडपंप धंस जाने तथा एक हैंडपंप में मशीन नहीं लगने से उपयोग में नहीं आ रहा है । जिस कारण आज भी ग्रामीण गांव के मसान झरिया गोबरिया ढोढ़ी, पंडरीपानी ढोढ़ी का पानी पीने विवश है।
बारिश में ब्लॉक मुख्यालय से कट जाता है गांव
बरसात के मौसम में बदहाल सडक़ व नदी पर पुल नहीं होने से ब्लॉक मुख्यालय से कट जाता है यह गांव। बीमार होने या प्रसव कराने पर चारपाई के माध्यम से 5 किलोमीटर का सफर पैदल तय कर ग्राम रेमहला आना पड़ता है। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस व महतारी एक्सप्रेस की सुविधा मिलती है। यही नहीं खाद्यान्न योजना का लाभ लेने ग्रामीणों को पैदल ही सफर करना पड़ता है।
मंत्री सहित अन्य जनप्रतिनिधियों से सडक़ और पुल बनाने की मांग की थी, परंतु अब तक मांगें पूरी नहीं हुई है तो वहीं वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर मंत्री जी ने गांव में ही खाद्यान्न सामग्री उपलब्ध कराए जाने का आश्वासन दिया था। परंतु 1 वर्ष बीत जाने के बाद भी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बन पाई और न ही सडक़ व पुल बन सका, जिस कारण ग्रामीणों को 5 किमी का पैदल सफर तय कर ग्राम रेमहला खाद्यान्न सामग्री लेने आना पड़ता है। इससे ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
कोरवा-पंडो जनजाति के बच्चों ने स्कूल नहीं देखा
बड़ा दमालि क्षेत्र के खिऱहिर में प्राथमिक पाठशाला किराए के मकान में संचालित होता है। अत्यधिक दूरी होने के कारण गांव के बच्चे स्कूल तक नहीं पहुंच पाते। ग्राम खिऱहिर बस्ती में स्कूल नहीं होने के कारण कोरवा पंडो जनजाति के लगभग 30 परिवार के बच्चे आज तक स्कूल नहीं देखे हैं, जिस कारण व शिक्षा से वंचित है। कोरवा पंडो जनजाति के लोगों का कहना है कि हमें भी शिक्षा पाने का अधिकार है हमें भी बेहतर शिक्षा और स्कूल चाहिए।
मीडिया कर्मियों के हस्तक्षेप के बाद गांव में आंगनबाड़ी केंद्र की वैकल्पिक व्यवस्था
लखनपुर के स्थानीय मीडिया कर्मियों के हस्तक्षेप के बाद जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी बसंत मिंज तत्काल दल बल के साथ ग्राम खिऱहिर पहुंच ग्रामीणों से चर्चा कर आंगनबाड़ी केंद्र का वैकल्पिक व्यवस्था तथा सुपरवाइजर व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को योजनाओं का लाभ शिशुवती माताओं, गर्भवती महिलाओं तथा बच्चों को दिलाए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
गांव में चाहिए विकास नहीं तो होगा आंदोलन
ग्रामीणों का कहना है शासन सत्ता बदलने के बाद भी गांव में किसी तरह का कोई विकास कार्य अब तक नहीं हुआ है। चुनाव जीतने के बाद विधायक आज तक इस गांव में नहीं आए हैं। हम सभी ग्रामीणों को स्वास्थ्य शिक्षा सडक़ बिजली पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से जूझना पड़ रहा है। साथ ही ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम खिऱहिर को अलग पंचायत बनाया जाए, जिससे गांव का विकास हो सके। अगर हमारी मांगें पूरी नहीं हुई और गांव का विकास नहीं हुआ तो आने वाले समय में गांव के सभी लोग आंदोलन करेंगे या तो फिर आने वाले विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे।