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आईएसएफआर अनुसार वन-वृक्ष में 684 वर्ग किमी की वृद्धि
05-Jun-2026 2:39 PM
आईएसएफआर अनुसार वन-वृक्ष में 684 वर्ग किमी की वृद्धि

पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा राज्य-डॉ. शर्मा

रायपुर, 5 जून। रायपुर के डॉ. सुरेन्द्र शर्मा ने बताया कि हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1972 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा शुरू किया गया यह वैश्विक अभियान पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण मंच है। यह हमें याद दिलाता है कि स्वस्थ पर्यावरण मानव कल्याण, आर्थिक प्रगति और सतत विकास की आधारशिला है।

डॉ. शर्मा ने बताया कि आज दुनिया बढ़ते वैश्विक तापमान, अनियमित मौसम, जैव विविधता में कमी, वायु एवं जल प्रदूषण तथा जल संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। जलवायु परिवर्तन 21वीं सदी की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, जिसका समाधान सरकारों, उद्योगों, समुदायों और नागरिकों के साझा प्रयासों से ही संभव है।

जलवायु कार्रवाई में भारत की भूमिका

विश्व की लगभग एक-छठी आबादी वाले भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कई महत्वाकांक्षी पहलें शुरू की हैं। भारत और फ्रांस द्वारा स्थापित अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने का प्रभावी वैश्विक मंच बन चुका है। वहीं मिशन लाइफ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) नागरिकों को संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

डॉ. शर्मा ने बताया कि वर्ष 2024 में शुरू किया गया एक पेड़ माँ के नाम अभियान पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप दे रहा है। यह पहल नागरिकों को अपनी माँ के सम्मान में पौधारोपण के लिए प्रेरित करते हुए हरित आवरण बढ़ाने में योगदान दे रही है।

छत्तीसगढ़-प्राकृतिक धरोहर और सामूहिक जिम्मेदारी

विश्व पर्यावरण दिवस छत्तीसगढ़ के लिए विशेष महत्व रखता है। राज्य का लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छादित है, जो इसे देश के प्रमुख वन-संपन्न राज्यों में शामिल करता है। घने जंगल, समृद्ध जैव विविधता और प्रकृति से जुड़े जनजातीय समुदाय इसकी विशिष्ट पहचान हैं।

डॉ. शर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। भारत वन स्थिति प्रतिवेदन (आईएसएफआर) 2023 के अनुसार राज्य में वन एवं वृक्ष आवरण में 684 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई, जो देश में सर्वाधिक है। यह उपलब्धि सामुदायिक सहभागिता और संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है।

डॉ. शर्मा ने बताया कि  शहरीकरण, औद्योगीकरण, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियाँ राज्य के सामने भी हैं। इसलिए वनों का संरक्षण, जल स्रोतों का संवर्धन, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। आइए, हम केवल जागरूकता तक सीमित न रहें, बल्कि ठोस कार्रवाई का संकल्प लें। इस मानसून एक पौधा ही नहीं, भविष्य भी लगाएँ। वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को सहेजें, बीजारोपण अभियानों में भाग लें और हरित आवरण बढ़ाने में योगदान दें। पानी बचाएँ, प्लास्टिक का उपयोग कम करें और स्वच्छ ऊर्जा को अपनाएँ।

स्रोत-भारत वन स्थिति प्रतिवेदन (आईएसएफआर) 2023; भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार।


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