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साइबर विधि एवं डिजिटल साक्ष्य तथा न्यायालयों में डिजिटल साक्ष्य की ग्राह्यता पर कलिंगा विवि संगोष्ठी
25-Feb-2026 3:17 PM
साइबर विधि एवं डिजिटल साक्ष्य तथा न्यायालयों में डिजिटल साक्ष्य की ग्राह्यता पर कलिंगा विवि संगोष्ठी

रायपुर, 25 फरवरी। कलिंगा विश्वविद्यालय ने बताया कि अम्बागढ़ चौकी सत्र न्यायालय में ‘साइबर विधि एवं डिजिटल साक्ष्य तथा न्यायालयों में डिजिटल साक्ष्य की ग्राह्यता’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन कलिंगा विश्वविद्यालय द्वारा 23 फरवरी 2026 को अम्बागढ़ चौकी सत्र न्यायालय परिसर में ‘साइबर विधि एवं डिजिटल साक्ष्य तथा न्यायालयों में डिजिटल साक्ष्य की ग्राह्यता’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

विश्वविद्यालय ने बताया कि यह कार्यक्रम अधिवक्ता संघ, अम्बागढ़ चौकी के सौजन्यपूर्ण सहयोग से न्यायालय परिसर में सम्पन्न हुआ। संगोष्ठी में अनेक अधिवक्ताओं की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम में अधिवक्ता एम. बी. मिलिंद (अध्यक्ष), अधिवक्ता मनोज यादव (उपाध्यक्ष), अधिवक्ता निखिल कुमार झा (सचिव), अधिवक्ता धनंजय पांडे तथा अधिवक्ता रफीक खान की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे विधि समुदाय का सशक्त समर्थन परिलक्षित हुआ।

कलिंगा विश्वविद्यालय के विधि संकाय की सहायक प्राध्यापिका सुश्री कृतिका साहू ने साइबर विधि के प्रमुख आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने डिजिटल अपराधों, नियामक व्यवस्थाओं तथा इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों के साक्ष्यात्मक महत्व को स्पष्ट किया। साथ ही साइबर अपराधों से संबंधित वैधानिक प्रावधानों एवं न्यायालयों में डिजिटल साक्ष्य की ग्राह्यता को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों का विश्लेषण प्रस्तुत किया। तकनीक पर बढ़ती निर्भरता तथा साइबर संबंधी वादों में निरंतर वृद्धि को दृष्टिगत रखते हुए, चर्चा में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि आधुनिक विधि-व्यवहार में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से संबंधित वैधानिक प्रावधानों, प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं तथा न्यायिक मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है।

विश्वविद्यालय ने बताया कि कार्यक्रम में वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों की उपस्थिति भी रही, जिनमें परिवार न्यायालय के न्यायाधीश, विशेष न्यायाधीश, अपर सत्र न्यायाधीश तथा सिविल न्यायाधीश सम्मिलित रहे। यह उपस्थिति न्यायपालिका की निरंतर अध्ययन एवं क्षमता संवर्धन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।


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