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निराला जी का जीवन दुखों से भरा रहा, फिर भी उनकी लेखनी में निराशा हावी नहीं हुई-शकील
25-Jan-2026 6:41 PM
निराला जी का जीवन दुखों से भरा रहा, फिर भी उनकी लेखनी में निराशा हावी नहीं हुई-शकील

कलिंगा विश्वविद्यालय में स्मरण गोष्ठी आयोजित

रायपुर, 25 जनवरी। कलिंगा विश्वविद्यालय ने बताया कि हिन्दी विभाग के द्वारा  महाकवि निराला जयंती के अवसर पर स्मरण गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कला एवं मानविकी संकाय की अधिष्ठाता डॉ. शिल्पी भट्टाचार्य ने मॉ सरस्वती और महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित करके आयोजन का शुभारंभ किया।

विश्वविद्यालय ने बताया कि स्मरण गोष्ठी के अंतर्गत समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद शकील ने निराला जी के जीवन वृत्त पर प्रकाश डालते हुए बताया कि निराला जी का जीवन दुखों से भरा था—पत्नी और पुत्री की असमय मृत्यु, आर्थिक तंगी, सामाजिक उपेक्षा—फिर भी उनकी लेखनी में कभी निराशा हावी नहीं हुई। वे विद्रोही थे, संवेदनशील थे, और सबसे बढक़र मानवीय थे। उनकी कविताएँ हमें सिखाती हैं कि संघर्ष में भी सृजन संभव है, पीड़ा में भी सौंदर्य है, और अन्याय के सामने कभी सिर नहीं झुकाना चाहिए।

विश्वविद्यालय ने बताया कि इसी क्रम में हिन्दी  विभाग के अध्यक्ष डॉ.अजय शुक्ल ने कहा कि हिन्दी साहित्य को समृद्ध करने में निराला जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वह मुक्त छंद के प्रवर्तक थे। उन्होंने हिन्दी कविता को छंद के बंधन से मुक्त करके एक नयी राह दिखाया। उनकी कविता में प्रकृति का सुंदर चित्रण है, तो वहीं सामाजिक अन्याय, शोषण, दलित-स्त्री विमर्श और स्वतंत्रता संग्राम की पुकार भी है। स्मरण गोष्ठी के उपरांत निराला जी की प्रसिद्ध कविता  वर दे वीणा वादिनी वर दे कविता की सुमधुर प्रस्तुति हुयी। इस अवसर पर डॉ. अनिता सामल, डॉ. लुभावनी त्रिपाठी एवं अन्य उपस्थित थे।


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