कारोबार
राष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा दिवस पर रामकृष्ण केयर द्वारा जागरूकता
रायपुर, 11 जनवरी। रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल ने बताया कि राष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा दिवस के अवसर पर रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों ने सडक़ यातायात दुर्घटनाओं के बढ़ते बोझ पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी कि ये दुर्घटनाएं भारत में रोकी जा सकने वाली मौतों और दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में अब भी शामिल हैं।
हॉस्पिटल ने बताया कि डॉक्टरों के अनुसार, सडक़ दुर्घटनाएं रोज़ाना होने वाली आपातकालीन भर्तियों का एक बड़ा हिस्सा हैं, जिनमें अधिकांश पीडि़त 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवा होते हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि जिम्मेदार ड्राइविंग व्यवहार और ट्रैफिक नियमों के सख्त पालन से इनमें से कई चोटों को रोका जा सकता है।
हॉस्पिटल ने बताया कि डॉक्टरों ने इस बात पर जोर दिया कि दुर्घटना के बाद पहले 60 मिनट — जिसे गोल्डन आवर कहा जाता है — के भीतर ट्रॉमा-सुसज्जित अस्पताल तक पहुंचना जीवन और मृत्यु के बीच अंतर तय कर सकता है, क्योंकि समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप से जीवित रहने और बेहतर रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है।
डॉ. संतोष सिंह, एमईएम, एचओडी-इमरजेंसी एवं ट्रॉमा केयर, ने बताया कि सडक़ दुर्घटनाएं समय-संवेदनशील आपात स्थितियां होती हैं। हम अक्सर गंभीर सिर की चोटों, आंतरिक रक्तस्राव और मल्टीपल ट्रॉमा के मरीजों का इलाज करते हैं। बचाव में देरी, गलत तरीके से संभालना और गोल्डन आवर के भीतर अस्पताल न पहुंच पाना परिणामों को और खराब कर देता है। हेलमेट और सीटबेल्ट पहनना, ओवरस्पीडिंग से बचना और नशे की हालत में वाहन न चलाना जैसे सरल उपाय अनगिनत जानें बचा सकते हैं।
डॉ. पंकज धाबलिया, एचओडी ऑर्थोपेडिक, ट्रॉमा, जॉइंट रिप्लेसमेंट एवं स्पोर्ट्स इंजरीज़, ने बताया कि कई दुर्घटना पीडि़तों को अनेक सर्जरी और लंबे समय तक पुनर्वास की आवश्यकता होती है। कई मामलों में चोटें जीवनभर की गतिशीलता संबंधी समस्याओं का कारण बन जाती हैं। ट्रैफिक नियमों का पालन और सुरक्षा उपकरणों का उपयोग चोट की गंभीरता और दीर्घकालिक जटिलताओं को काफी हद तक कम कर सकता है। दुर्घटना पीडि़तों के सही प्राथमिक उपचार और सुरक्षित स्थानांतरण के महत्व पर भी प्रकाश डाला।


