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एचएनएलयू 5वां स्वामी विवेकानंद स्मृति व्याख्यान
रायपुर, 10 जनवरी। हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचएनएलयू), रायपुर ने बताया कि अपने परिसर में 5वें स्वामी विवेकानंद स्मृति वार्षिक व्याख्यान का आयोजन किया। यह आयोजन स्वामी विवेकानंद के जीवन, दर्शन और उनकी सतत प्रासंगिकता को स्मरण और सम्मान देने की विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को पुन: रेखांकित करता है।
एचएनएलयू ने बताया कि यह वार्षिक व्याख्यान विश्वविद्यालय द्वारा स्वामी विवेकानंद की स्मृति में आयोजित किया जाता है, जिनका रायपुर से गहरा ऐतिहासिक संबंध रहा है तथा जिनकी जयंती देशभर में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है।
कुलपति प्रो. (डॉ.) वी.सी. विवेकानंदन ने मुख्य अतिथि की सराहना करते हुए कहा— ऐसे समय में जब सफलता को अक्सर फॉलोअर्स की संख्या से आँका जाता है, मंत्री चौधरी हमें यह स्मरण कराते हैं कि वास्तविक नेतृत्व सेवा से मापा जाता है। स्वामी विवेकानंद के देहावसान के 123 वर्षों बाद भी उनके विचार और शिक्षाएँ जेन-ज़ी के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत बनी हुई हैं।
मंत्री श्री चौधरी ने विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों से भरे सभागार को संबोधित करते हुए जेन-ज़ी के लिए स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएँ और संदेश विषय पर प्रभावशाली व्याख्यान दिया। स्वामी विवेकानंद का अल्प किंतु अत्यंत अर्थपूर्ण जीवन आज भी युवाओं की अनेक पीढिय़ों को प्रेरित करता है। उन्होंने 18 सितंबर 1893 को शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी विचार को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने से पहले लोगों से भावनात्मक रूप से जुडऩा आवश्यक है। स्वामीजी के भाषण की सशक्त शुरुआत ने तत्काल वैश्विक ध्यान आकर्षित किया—जो आज के युवाओं के लिए संप्रेषण, नेतृत्व और प्रेरणा का कालातीत पाठ है।
मंत्री ने स्वामी विवेकानंद को भारतीय संस्कृति और मूल्यों का सच्चा राजदूत बताते हुए कहा कि उन्होंने अत्यंत कम आयु में भारत की आध्यात्मिक और दार्शनिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित किया। सादा जीवन, उच्च विचार के आदर्शों पर बल देते हुए उन्होंने जेन-ज़ी के विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलें, साहस को आलस्य पर प्राथमिकता दें और अनुशासन, समर्पण तथा ईमानदारी के साथ अपने वास्तविक जुनून का अनुसरण करें। उन्होंने स्वस्थ और अनुशासित जीवन के महत्व को रेखांकित किया।
श्री चौधरी ने सरकारी संस्थानों में अध्ययन से लेकर देश के सबसे युवा आईएएस अधिकारियों में से एक बनने, छत्तीसगढ़ के पहले आईएएस अधिकारी होने और तत्पश्चात सिविल सेवा से सार्वजनिक जीवन में आने के साहसिक निर्णय तक विद्यार्थियों को परंपरागत मार्गों से इतर चुनौतीपूर्ण रास्तों को आत्मविश्वास और साहस के साथ अपनाने के लिए प्रेरित किया।


