बेमेतरा

कलेक्टर -एसपी की बैठक, दुर्घटना नियंत्रण के लिए रणनीति तैयार
19-Feb-2026 3:17 PM
कलेक्टर -एसपी  की बैठक, दुर्घटना नियंत्रण के लिए रणनीति तैयार

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बेमेतरा, 19 फरवरी। बेमेतरा जिले में बढ़ती सडक़ दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित व सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं एवं पुलिस अधीक्षक रामकृष्ण साहू ने जिला स्तरीय सडक़ सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ समन्वित कार्ययोजना तैयार की गई।

बैठक का मुख्य फोकस सडक़ दुर्घटनाओं में कमी लाना, नियमों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और अनुशासित बनाना रहा। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सडक़ सुरक्षा को अभियान के रूप में संचालित किया जाए, जिसमें प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों की सहभागिता भी सुनिश्चित हो।

जन जागरूकता, सख्त प्रवर्तन  और आधारभूत सुधार पर जोर

‘ब्लैक स्पॉट’ सुधार, विशेष चेकिंग अभियान और संस्थागत भागीदारी के निर्देश 7 बैठक में दोपहिया वाहन चालकों द्वारा अनिवार्य रूप से हेलमेट उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सभी विभागों को अपने कार्यालयों में यातायात नियमों से संबंधित संदेश प्रदर्शित करने तथा कर्मचारियों को नियमों के पालन के लिए प्रेरित करने कहा गया। अधिकारियों से अपेक्षा की गई कि वे स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करें और समाज में सडक़ सुरक्षा के प्रति सकारात्मक संदेश दें।

 

दुर्घटना संभावित स्थलों का चिन्हांकन

जिले में चिन्हित दुर्घटना संभावित स्थानों (ब्लैक स्पॉट्स) का पुनर्मूल्यांकन कर वहां आवश्यक सुधार कार्य जैसे चेतावनी संकेतक, स्पीड ब्रेकर, रंबल स्ट्रिप्स और रिफ्लेक्टर लगाने के निर्देश दिए गए। अंधेरे मोड़ों एवं व्यस्त मार्गों पर प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त करने पर भी बल दिया गया 7 हेलमेट व सीट बेल्ट जांच अभियान को और प्रभावी बनाने, ओवरस्पीडिंग पर कड़ी कार्रवाई करने तथा जुर्माने की प्रक्रिया को नियमित रखने के निर्देश दिए गए। ‘ड्रंक एंड ड्राइव’ के विरुद्ध रात्रिकालीन विशेष अभियान चलाने तथा स्कूलों-कॉलेजों के आसपास सघन निगरानी रखने को कहा गया, जिससे नाबालिगों द्वारा वाहन संचालन पर रोक लगाई जा सके।

सडक़ किनारे अवैध अतिक्रमण हटाने, क्षतिग्रस्त स्ट्रीट लाइट्स को दुरुस्त करने तथा मार्गों की चौड़ाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

 साथ ही, आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु नगर निकायों को सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया।स्कूलों, कॉलेजों तथा परिवहन क्षेत्र से जुड़े चालकों के लिए सडक़ सुरक्षा कार्यशालाएं आयोजित करने की रूपरेखा भी तैयार की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि जनभागीदारी के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि सडक़ सुरक्षा को सामाजिक आंदोलन का रूप दिया जा सके। बैठक में स्पष्ट किया गया कि सडक़ सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जिला प्रशासन ने इस दिशा में निरंतर निगरानी एवं नियमित समीक्षा की प्रतिबद्धता दोहराई।


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