बेमेतरा

दिन में वाहन चलाना हो रहा है अधिक जोखिम भरा, दोपहर 3 से रात 9 बजे तक सडक़ दुर्घटनाएं सबसे ज्यादा
30-Nov-2025 3:45 PM
दिन में वाहन चलाना हो रहा है अधिक जोखिम भरा, दोपहर 3 से रात 9 बजे तक सडक़ दुर्घटनाएं सबसे ज्यादा

 बेमेतरा, बेरला व नवागढ़ में सबसे ज्यादा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बेमेतरा, 30 नवंबर। जिले में सडक़ हादसों का आंकड़ा हर दिन बढ़ता जा रहा है और यह खतरा दिन के समय ज्यादा दिखाई दे रहा है। आंकड़े बताते हैं कि दोपहर 3 से लेकर रात 9 बजे तक का समय सडक़ दुर्घटनाओं के लिए सबसे खतरनाक साबित हो रहा है। खासकर ग्रामीण सडक़ों पर ये हादसे ज्यादा हो रहे हैं, जबकि नेशनल और स्टेट हाईवे पर भी स्थिति बेहतर नहीं है।

पिछले चार महीनों में बेमेतरा जिले में 336 सडक़ दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 184 लोगों की मौत और 347 लोग घायल हुए। आंकड़ों पर गौर करें तो यह संख्या पिछले सत्र की तुलना में ज्यादा है। यही नहीं, जिले के कुछ प्रमुख थाना क्षेत्रों में भी हादसों की संख्या बढ़ी है।

थानावार हादसों की संख्या बनी चिंताजनक

जिले में सडक़ दुर्घटनाओं के मामले में बेमेतरा सिटी कोतवाली क्षेत्र सबसे आगे है। यहां 150 सडक़ दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 58 व्यक्तियों की मौत हुई और 164 लोग घायल हुए। इसके बाद, बेरला क्षेत्र में 61 सडक़ दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 50 व्यक्तियों की मौत हुई और 40 लोग घायल हुए। नवागढ़ क्षेत्र में 37 सडक़ दुर्घटनाओं में 20 की मौत हुई और 32 घायल हुए। साजा क्षेत्र में 32 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 17 की मौत और 32 लोग घायल हुए। थानखम्हरिया क्षेत्र में 16 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 18 की मौत हुई और 5 घायल हुए।

8 घंटे में 173 एक्सीडेंट हुए

जिले में सबसे अधिक सडक़ हादसे दोपहर 2 बजे से लेकर रात 10 बजे के बीच हुए हैं। इस 8 घंटे की अवधि में कुल 173 दुर्घटनाएं घटीं, जिनमें 87 लोगों की मौत और 167 लोग घायल हुए। हालांकि, पिछले सत्र में इसी अवधि में 183 हादसों के मुकाबले इस बार कुछ कमी आई है, लेकिन फिर भी यह वक्त वाहन चलाने के लिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।

सडक़ के प्रकार के अनुसार दुर्घटना विवरण

नेशनल हाईवे: 103 दुर्घटनाएं, जिनमें 48 की मौत स्टेट हाईवे: 49 दुर्घटनाएं, जिनमें 25 व्यक्तियों की मौत हुई। अन्य मार्ग (ग्रामीण/जिला स्तरीय सडक़ें): 184 दुर्घटनाएं, जिनमें 111 की मौत कुल सडक़ दुर्घटनाएं: 336, जिनमें कुल 184 की मौत

 

ग्रामीण सडक़ों पर बढ़ते हादसे

सडक़ दुर्घटनाओं के आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्रामीण सडक़ों पर हादसों की संख्या कहीं ज्यादा है। जिले में 55 प्रतिशत दुर्घटनाएं ग्रामीण सडक़ों पर हुई हैं, जो नेशनल और स्टेट हाईवे की तुलना में ज्यादा खतरनाक साबित हो रही हैं। इन सडक़ों का चौड़ाई कम होना, दिशा-निर्देशों का अभाव और निर्माण में सुरक्षा मापदंडों की अनदेखी इन हादसों के प्रमुख कारण हैं।

अनुविभागीय अधिकारी पुलिस  राजेश कुमार झा ने बताया कि जागरूकता अभियान कम स्पीड व हेलमेट पहनकर व बिना नशा करके वाहन चलाने की समझाइए दी जाती है। चालकों को सावधानी बरतना जरूरी है। सुरक्षा नियमों का पालन कर हादसों से आप भी सुरक्षित रहें और दूसरे भी सुरक्षित रहे।


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