बस्तर
20 साल में 63 बार रक्तदान कर बचाई अनगिनत जिंदगियां, बस्तर का बढ़ाया मान
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर/रायपुर, 15 जून। रक्तदान महादान—इस मानवीय संदेश को धरातल पर उतारकर बस्तर का नाम पूरे प्रदेश में रोशन करने वाले मारकेल निवासी महेंद्र सेठिया को राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया है।
विश्व रक्तदाता दिवस पर 14 जून को राजधानी रायपुर के लोक भवन (छत्तीसगढ़ मंडपम) में आयोजित एक गरिमामयी राज्य स्तरीय समारोह में प्रदेश के राज्यपाल रमेन डेका ने महेंद्र सेठिया को उनके इस अतुलनीय योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
महेंद्र सेठिया को बस्तर जिले में सर्वाधिक बार रक्तदान करने वाले रक्तवीर के रूप में गौरव प्राप्त हुआ है। अपनी रगों में बहते खून से दूसरों की जिंदगी में उजाला भरने वाले महेंद्र पिछले 20 वर्षों में रिकॉर्ड 63 बार रक्तदान कर चुके हैं। भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित इस भव्य समारोह में राज्यपाल व छत्तीसगढ़ के रेडक्रॉस अध्यक्ष ने राज्य के सभी रक्तवीरों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे निस्वार्थ सेवाभावी डोनर्स ही समाज के असली नायक हैं।
20 की उम्र से शुरू हुआ सफर,
आधी रात को भी रहते हैं तैयार
महेंद्र बताते हैं कि उन्होंने पहली बार 20 वर्ष की उम्र में डॉ. एमपी तिवारी के कहने पर रक्तदान किया था। तब से लेकर आज तक यह सिलसिला अनवरत जारी है और वे साल में 3 से 4 बार नियमित रूप से रक्तदान करते हैं। पीडि़त मानवता की सेवा के लिए वे इस कदर समर्पित हैं कि आधी रात को भी किसी जरूरतमंद का फोन आ जाए, तो वे बिना समय गंवाए तत्काल अस्पताल पहुंच जाते हैं।
सम्मान पाने के बाद उन्होंने भावुक होकर कहा, किसी डूबती हुई जिंदगी को सहारा देना और रक्तदान कर उसकी जान बचाना, दुनिया का सबसे सुकून देने वाला काम है। इससे नेक कार्य और कुछ नहीं हो सकता। राज्यपाल के हाथों मिला यह सम्मान मेरे संकल्प को और मजबूत करेगा।
200 से अधिक लोगों को किया प्रेरित
बस्तर के आदिवासी व ग्रामीण अंचलों में साक्षरता की कमी के कारण रक्तदान को लेकर कई अंधविश्वास फैले हैं। लोग मानते हैं कि रक्तदान करने से शरीर में कमजोरी आती है या बीमारियां होती हैं। इन मिथकों के कारण लोग रक्तदान करने से कतराते हैं, जिसे दूर करना बेहद जरूरी है।
सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र सेठिया केवल खुद रक्तदान नहीं करते, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में फैली भ्रांतियों को भी मिटा रहे हैं। उन्होंने अब तक 200 से अधिक ग्रामीणों को जागरूक कर उनसे रक्तदान कराया है। उनका मानना है कि सही जानकारी मिलने पर लोग खुद आगे आते हैं।


