बस्तर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 23 अप्रैल। शासन द्वारा प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जड़ों को पुनर्जीवित करने की दिशा में संचालित ‘ज्ञानभारतम’ पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान अब बस्तर के ग्रामीण अंचलों में अपनी सफलता के नए अध्याय लिख रहा है। बस्तर जिले के ग्राम पंचायत बेसोली के ग्राम बोडऩपाल और ग्राम पंचायत कोलचुर में अत्यंत प्राचीन ताड़पत्र (पांडुलिपियां) प्राप्त हुई हैं, जो क्षेत्र की सदियों पुरानी बौद्धिक और साहित्यिक संपन्नता का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। इन अनमोल धरोहरों की खोज ने प्रदेश के स्वर्णिम इतिहास को सहेजने के इस महाभियान को एक नई ऊर्जा प्रदान की है।
‘ज्ञानभारतम’ पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत छत्तीसगढ़ अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा को न केवल सहेजने, बल्कि उसे आधुनिक स्वरूप में संकलित करने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।
बोडऩपाल और कोलचुर जैसे ग्रामों से मिली ये पांडुलिपियां अब तक गुमनामी के अंधेरे में थीं, लेकिन अब ये शोधार्थियों के लिए ज्ञान का अटूट भंडार साबित होंगी। ये ताड़पत्र न केवल छत्तीसगढ़ के प्राचीन चिकित्सा विज्ञान, ज्योतिष और साहित्य के वाहक हैं, बल्कि बस्तर की अनूठी लोक परंपराओं के रहस्यों को भी उजागर करते हैं। शासन की इस अनूठी पहल से न केवल प्रदेश की बौद्धिक संपदा का संरक्षण होगा, बल्कि आने वाली पीढिय़ां भी अपनी गौरवशाली संस्कृति और पूर्वजों के ज्ञान से सीधे तौर पर रूबरू हो सकेंगी।


