बस्तर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 9 जून। पत्रकार सुरक्षा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और पत्रकारों के खिलाफ बिना जांच सीधे एफआईआर दर्ज किए जाने के मामलों के विरोध में बस्तर जिला पत्रकार संघ ने 11 जून को जगदलपुर में महा धरना-प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है। आंदोलन में बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में पत्रकारों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
.बस्तर जिला पत्रकार संघ का कहना है कि प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू होने के बावजूद कई मामलों में उसके प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है। संगठन के अनुसार कानून का उद्देश्य पत्रकारों को निष्पक्ष और निर्भीक होकर कार्य करने के लिए आवश्यक सुरक्षा प्रदान करना है, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर कई मामलों में निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी की जा रही है।
.संघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि पत्रकारों से जुड़े मामलों में कानून के तहत आवश्यक जांच और परीक्षण की प्रक्रिया पूरी किए बिना सीधे एफआईआर दर्ज कर दी जाती है। उनका मानना है कि ऐसी कार्रवाई न केवल पत्रकार सुरक्षा कानून की मूल भावना के विपरीत है, बल्कि इससे पत्रकारों की स्वतंत्र कार्यप्रणाली भी प्रभावित होती है। संगठन का कहना है कि किसी भी शिकायत या विवाद की स्थिति में पहले निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जांच होनी चाहिए, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए।
.पत्रकार संघ का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पत्रकार समाज और शासन के बीच सेतु का कार्य करते हैं तथा जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में पत्रकारों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई में पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है ताकि निष्पक्ष पत्रकारिता प्रभावित न हो।
.संघ ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन किसी व्यक्ति, संस्था या विभाग विशेष के विरोध में नहीं है।
आंदोलन का मुख्य उद्देश्य पत्रकार सुरक्षा कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित कराना और पत्रकारों को कानून द्वारा प्राप्त अधिकारों एवं संरक्षण को प्रभावी रूप से लागू कराना है। संगठन का मानना है कि इससे पत्रकारों के बीच विश्वास बढ़ेगा और वे बिना किसी अनावश्यक दबाव के अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।
.बस्तर जिला पत्रकार संघ ने संभाग के सभी जिलों के पत्रकारों से आंदोलन में भाग लेने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यह मुद्दा केवल किसी एक पत्रकार या जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पत्रकार समुदाय से जुड़ा हुआ है। इसलिए व्यापक एकजुटता के साथ अपनी बात शासन और प्रशासन तक पहुंचाई जाएगी।
.संघ के अनुसार बस्तर क्षेत्र में पूर्व में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें पत्रकारों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज किए जाने को लेकर सवाल उठे थे। इन्हीं घटनाओं की पृष्ठभूमि में पत्रकार सुरक्षा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग को लेकर यह आंदोलन आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों को उम्मीद है कि इस पहल से संबंधित अधिकारियों और सरकार का ध्यान इस विषय की ओर आकर्षित होगा तथा भविष्य में पत्रकारों से जुड़े मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।


