बस्तर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 26 मार्च। बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026 को लेकर इनाम राशि भुगतान में देरी का मुद्दा अब राजनीतिक रंग लेने लगा है। शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने गुरुवार को प्रेसवार्ता कर इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए जिला प्रशासन और राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में बस्तर समेत देश और विदेश से बड़ी संख्या में धावकों ने भाग लिया था, जिन्होंने कई दिनों की मेहनत और तैयारी के बाद स्थान हासिल किया, लेकिन अब तक विजेताओं को घोषित इनाम राशि नहीं मिल पाई है।
प्रेसवार्ता के दौरान बताया गया कि आयोजन में करीब 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि घोषित की गई थी और इसे वितरित किया जाना था, लेकिन अब तक प्रतिभागियों को भुगतान नहीं किया गया है। इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा गया कि यह न केवल खिलाडिय़ों के साथ अन्याय है, बल्कि इससे बस्तर की छवि पर भी असर पड़ा है।
.सुशील मौर्य ने कहा कि प्रशासन द्वारा तकनीकी कारणों का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन यह तर्क स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह जिला प्रशासन की नाकामी है और सरकार को इस पर स्पष्ट बयान देना चाहिए कि आखिर अब तक इनाम राशि क्यों नहीं दी गई। उन्होंने इसे शर्मनाक और अफसोसजनक स्थिति बताया और मांग की कि सरकार तथा प्रशासन प्रतिभागियों से माफी मांगे।
.उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके द्वारा लगाए गए आरोप गलत साबित होते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया कि क्या सरकार इनाम राशि देने के लिए संसाधनों की कमी का सामना कर रही है।
प्रेसवार्ता में राज्य सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए। आरोप लगाया गया कि बीते 60 दिनों में बड़े पैमाने पर आयोजनों पर भारी खर्च किया गया है, जबकि कर्मचारियों को वेतन और महंगाई भत्ता जैसे मुद्दों पर समस्याएं बनी हुई हैं। किसानों की स्थिति, सडक़ों और नालियों की हालत को लेकर भी नाराजगी जताई गई।
.इसके अलावा शहर में हाल ही में हुई अन्य घटनाओं का भी उल्लेख किया गया, जिनमें हत्या, मंदिर चोरी और केंद्रीय जेल से कैदी के फरार होने जैसी घटनाओं को कानून व्यवस्था से जोड़ा गया। इन घटनाओं को प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला बताया गया।
.बहरहाल, मैराथन के इनाम भुगतान को लेकर उठे इस विवाद ने प्रशासन और सरकार के सामने जवाबदेही का सवाल खड़ा कर दिया है।


