बस्तर
तस्वीर / ‘छत्तीसगढ़’ / विमल मिंज
बाढ़ ने ढाया था कहर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 24 फरवरी। बस्तर के लोहंडीगुड़ा के गांव मांदर में अगस्त महीने के 25-26 तारीख को आए अचानक बाढ़ ने अपना कहर दिखाया था। पूरा गांव पानी के चपेट में डूब गया था। बिजली की सप्लाई भी बंद थी। करीब 25 मकान पूरी तरह धराशाई हो गए थे और 85 घरों को नुकसान हुआ था।
प्रशासन की टीम सर्वे के कार्य मे जुट गई थी। गांव में मेडिकल उपचार कर रही थी। राहत शिविर केंद्रों में भोजन, कपड़े के साथ ही आवश्यक सामान उपलब्ध कराए जा रहे थे। मुआवजा राशि को लेकर जारी सर्वे को पूरा किया जा रहा था। आज सात महीने बाद ‘छत्तीसगढ़’ अखबार ने फिर से मांदर गांव जाकर वर्तमान स्थिति को देखा और लोगों से बात की, उस समय के पीडि़त गीता पटेल, पति सेवन पटेल, ग्राम मांदर, से मुलाकात हुई।

उन्होंने बताया कि उस आपदा में घर के नुकसान के साथ-साथ घर में रखे सामान, और जमीन के कागजात के साथ बच्चों के किताब कॉपियां, धान, जमा पूंजी, सोने-चांदी के आभूषण भी बह गए और सरकार ने जो आर्थिक सहायता के स्वरूप मात्र 1 लाख बीस हजार रुपए मिलें, जो उनके हुए नुकसान के अनुपात बहुत कम है। गीता पटेल कहतीं है कि शुक्र है हम सबकी जान बच गई। आपदा तो कहकर नहीं आती, और अभी भी वे अपने बन रहे अधूरे मकान को बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि सही मुवावजा मिलता तो घर जल्दी बन जाता। अभी भी परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।



