बस्तर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 24 फरवरी। बस्तर जिले के जगदलपुर से लगे मिचनार गांव में इन दिनों ग्रामीण परिवार इमली प्रसंस्करण के कार्य में जुटे हैं। गांव के मोचो कर्मा और भूसा कर्मा का परिवार दोपहर के समय इमली से बीज अलग करने का काम करते है। यह मेहनत भरा कार्य उनकी आजीविका का प्रमुख साधन बना हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार, बिना बीज वाली इमली बाजार में 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक बिकती है, जबकि बीज सहित इमली की कीमत लगभग 40 रुपये प्रति किलो मिलती है। बीज निकालने की प्रक्रिया समय लेने वाली होती है, लेकिन इससे उत्पाद का मूल्य दोगुना हो जाता है, जिससे परिवारों को बेहतर आमदनी मिलती है।
बस्तर की इमली अपनी गुणवत्ता और स्वाद के लिए जानी जाती है। प्राकृतिक रूप से जंगलों में पकी यह इमली खटास और हल्की मिठास के संतुलन के कारण बाजार में खास पहचान रखती है। स्थानीय स्तर पर इमली संग्रहण और प्रसंस्करण से कई ग्रामीण परिवारों को रोजगार मिल रहा है। वहीं बड़े व्यापारी थोक में इमली की खरीददारी करते हैं और उसे प्लास्टिक की थैली में डाल कर इक_ा करते हैं।


