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बाजे-गाजे के साथ कलश यात्रा निकालकर जलाभिषेक
01-Mar-2022 10:04 PM
बाजे-गाजे के साथ कलश यात्रा निकालकर जलाभिषेक

झांकी, रुद्राभिषेक के बाद शिव-पार्वती का विवाह

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
भोपालपट्टनम,  1 मार्च। 
हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी भोपालपट्टनम नगर में महाशिवरात्रि पर भव्य मेला का आयोजन किया गया।

 भोपालपट्टनम के मुख्य मार्ग पर स्थित भगवान शिव मंदिर को टिमटिमाती रोशनी से सजाया गया। भोपालपट्टनम में महाशिवरात्रि पर भगवान शिव एवं पार्वती का विवाह भक्ति निष्ठा के साथ किया जाता है। इसके के लिए एक दिन पूर्व ही मण्डपाच्छादन किया जाता है।

सुबह सभी महिलाएं बाजे-गाजे के साथ कलश में जल लेकर शिव मंदिर तक कलश यात्रा निकालते हुए जल लाकर भगवान शिव का जल अभिषेक किया जाता है, तत्पश्चात शाम को भगवान शिव एवं माता पार्वती का मूर्तियों को झांकी के रूप में ले जाकर स्थानीय गांधी चौक में बैठकर सगाई किया जाता है।

महाशिवरात्रि पर पहले शिव का रुद्राभिषेक कर बाद में हवन कर भव्य मण्डप में शिव पार्वती का विवाह किया जाता है। क्षेत्र के लोग इस विवाह समारोह में आते हैं और भगवान शिव जी व माता पार्वती से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।  

शिवरात्रि के दिन सुबह भोपालपट्टनम से चार किलोमीटर दूर स्थित इंद्रावती नदी जाकर स्नान करते हंै। मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन नदी में नहाने से  पाप धुल जाते हैं। इंद्रावती नदी किनारे भी पहाड़ पर भगवान शिव जी का लिंग है, जोबहुत ही प्राचीन है। कहा जाता है कि जो भी भक्त सच्ची आस्था से मन्नत माँगता है भोलेनाथ उसे पूरा करते हैं।

आस पास के श्रद्धालु भद्रकाली के पास स्थित त्रिवेणी संगम में भी स्नान करने जाते हैं और भोपालपट्टनम से लगभग 75 किलोमीटर तेलंगाना में कालेश्वरम भी त्रिवेणी संगम स्थित है, जिसे दक्षिण काशी के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि मुक्तेश्वर व कालेस्वर दोनों ही लिंग एक साथ दर्शन देते हंै  ।

यहां के  मेला में छत्तीसगढ़ के अलावा महाराष्ट्र, तेलंगाना के दुकानदार भी अपने   अपने  दूकानों में  तरह तरह के समान लाते हैं  और मेला में झूला,  बच्चों  के मनोरंजन के समान के साथ  साथ  मेला में लोग दूर  दराज से आकर भगवान शिव पार्वती का आशीर्वाद लेकर  मेला  का आनंद लेते हैं।   मेला के अंतिम दिन प्रसाद के रूप में भोज का आयोजन भी समिति की ओर से किया जाता है।


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