बलरामपुर

चेक डैम बनने से बारिश पर निर्भरता हुई कम
14-Jun-2026 4:19 PM
चेक डैम बनने से बारिश पर निर्भरता हुई कम

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलरामपुर, 14 जून।
जिला प्रशासन के सतत प्रयासों से जल संरक्षण एवं कृषि विकास की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। जिसके अंतर्गत कभी केवल बारिश के भरोसे खेती करने वाले ग्राम सुलसुली के किसानों के लिए अब सिंचाई की नई राह खुल गई है। मनरेगा के तहत लेदो नाला पर निर्मित चेक डैम न केवल खेतों तक पानी पहुंचाएगा, बल्कि किसानों को दोहरी फसल लेने और आय बढ़ाने का अवसर भी प्रदान करेगा।
जनपद पंचायत वाड्रफनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत सुलसुली के लेदो नाला में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 17 लाख रुपये की लागत से चेकडेम का निर्माण कराया गया है।  जिससे किसानों को खरीफ एवं रबी दोनों सीजन की फसलों के लिए पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध हो सकेगा।

पूर्व में ग्राम सुलसुली के किसानों को सिंचाई संसाधनों की कमी के कारण मुख्य रूप से केवल एक ही फसल लेने की मजबूरी थी। वर्षा आधारित खेती होने के कारण रबी सीजन में अधिकांश भूमि खाली रह जाती थी।
लेदो नाला पर निर्मित इस चेक डैम के बनने से अब लगभग 10 किसानों की 15 हेक्टेयर कृषि भूमि को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी, दोहरे फसल चक्र को बढ़ावा मिलेगा तथा कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी।
 चेकडेम निर्माण से क्षेत्र में भू-जल स्तर में सुधार होगा तथा आसपास के कुओं एवं जलस्रोतों का जलस्तर भी बढ़ेगा। इससे किसानों को कृषि कार्यों के लिए लंबे समय तक पानी उपलब्ध रहेगा। सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित होंगे।

यह चेकडैम केवल सिंचाई तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के दैनिक जीवन में भी उपयोगी सिद्ध होगा। संरक्षित जल का उपयोग ग्रामीणों द्वारा नहाने-धोने, घरेलू निस्तार कार्यों तथा मवेशियों के पेयजल के रूप में भी किया जा सकेगा। इससे गांव में जल संकट की समस्या काफी हद तक कम होगी।
 मनरेगा के तहत निर्मित यह चेक डैम जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन एवं कृषि विकास का सफल मॉडल बनकर उभरा है। यह परियोजना ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण, जल सुरक्षा तथा सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।


अन्य पोस्ट