बलरामपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलरामपुर, 12 जून। विकासखंड रामचंद्रपुर के ग्राम पंचायत पिपरौल के किसान कभी सिंचाई के लिए आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखते थे लेकिन यह वर्षों पुरानी समस्या अब बीते दिनों की बात हो चुकी है। गांव में निर्मित सी.सी. चेक डैम से न केवल वर्षा जल को सहेजने का कार्य किया गया है, बल्कि किसानों के जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाई है। ग्राम पंचायत पिपरौल में निर्मित सी.सी. चेक डैम जल संरक्षण का मॉडल बनकर उभरा है।
ग्रामीण बताते हैं कि जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। पहले जहां बारिश का अधिकांश पानी बहकर नालों और नदियों में चला जाता था। भू-जल स्तर कम होने से सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पाता था। इससे खेती प्रभावित होती थी और उत्पादन भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिल पाता था। कई बार किसानों को सीमित संसाधनों के कारण कम रकबे में खेती करनी पड़ती थी।
लेकिन चेक डैम बनने के बाद वर्षा जल का संचयन होने लगा है, जिससे आसपास के कुओं, हैंडपंपों और अन्य जल स्रोतों में जल उपलब्धता बढ़ी है।
किसानों को खरीफ और रबी दोनों मौसमों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल रहा है। खेतों में नमी लंबे समय तक बनी रहने से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार हुआ है।
इस परियोजना से लगभग 6 परिवार सीधे तौर पर लाभान्वित हुए हैं, जबकि 12 से 14 हेक्टेयर कृषि भूमि को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा प्राप्त हुई है और वे बेहतर उत्पादन के लिए नई संभावनाओं की ओर बढ़ रहे हैं।
चेक डैम ने केवल सिंचाई सुविधा ही नहीं बढ़ाई, बल्कि मिट्टी के कटाव को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जहां कभी पानी की कमी किसानों की चिंता थी, जल संरक्षण के छोटे-छोटे प्रयास भी ग्रामीण विकास और कृषि समृद्धि की तस्वीर बदल रहे हैं।


