बलरामपुर

आईटीआई कॉलेज की भूमि पर स्वामित्व विवाद
08-Jun-2026 10:29 PM
आईटीआई कॉलेज की भूमि पर स्वामित्व विवाद

ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

राजपुर, 8 जून। बलरामपुर जिले के राजपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम करजी में संचालित आईटीआई कॉलेज एवं छात्रावास की भूमि पर स्वामित्व विवाद सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। सरकारी भूमि पर कथित फर्जी पट्टे के माध्यम से स्वामित्व दावा किए जाने के आरोपों को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम करजी में पिछले लगभग दस वर्षों से आईटीआई कॉलेज और छात्रावास संचालित हैं, जहां बड़ी संख्या में छात्र अध्ययन कर रहे हैं। वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा संस्थान का लोकार्पण भी किया गया था। हाल ही में कॉलेज परिसर में अहाता निर्माण कार्य शुरू होने के दौरान एक व्यक्ति ने भूमि पर अपना स्वामित्व दावा करते हुए पट्टा प्रस्तुत किया और निर्माण कार्य पर आपत्ति दर्ज कराते हुए स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया।

घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। उनका आरोप है कि जिस व्यक्ति के नाम पर पट्टा बताया जा रहा है, उसे गांव के अधिकांश लोग नहीं जानते। ग्रामीणों का कहना है कि यदि भूमि निजी स्वामित्व की थी, तो पिछले एक दशक से वहां शासकीय मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान और छात्रावास का संचालन कैसे होता रहा। साथ ही यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि सरकारी स्तर पर लोकार्पित संस्थान के निर्माण की अनुमति निजी भूमि पर कैसे दी गई।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि संबंधित भूमि को मदन सिंह पिता रामेश्वर सिंह के नाम दर्ज बताया जा रहा है, जबकि भूमि स्वामित्व से जुड़े आवश्यक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। कुछ ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि प्रभावशाली रिश्तों के चलते राजस्व विभाग पर दबाव बनाकर पक्ष में निर्णय कराने का प्रयास किया गया। वहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग भू-अधिग्रहण मुआवजे से जुड़े लाभ लेने के उद्देश्य से भी भूमि रिकॉर्ड में हेरफेर किए जाने की आशंका जताई जा रही है।ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित व्यक्ति के नाम पर ग्राम करजी में कई खातों में भूमि दर्ज है, जिससे पहाड़ी कोरवा परिवारों सहित अन्य लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि यदि संबंधित व्यक्ति ग्राम का निवासी नहीं है, तो उसके नाम इतनी भूमि दर्ज कैसे हुई।

इधर, कॉलेज प्रबंधन ने भी मामले पर चिंता जताई है। प्रबंधन का कहना है कि भूमि विवाद बढऩे की स्थिति में कॉलेज एवं छात्रावास का संचालन प्रभावित हो सकता है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन और चक्काजाम जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं, जिसके बाद ही भूमि पट्टे की वैधता और पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


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