बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 17 जून। करीब 25-30 वर्ष पूर्व नगर तथा ग्रामीण अंचल में कुआं पेयजल का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत हुआ करते थे। उपयोगिता कम होती चली गई कुछ गैर जिम्मेदार लोगों ने इनमें घर की गंदगी फेंकना प्रारंभ कर दिया जिससे धीरे-धीरे कचरों से पटते चल चले गए। प्रशासन भी कुओं की सफाई के प्रति उदासीन बना रहा। जिला मुख्यालय में ही पुराने बस स्टैंड, बेसिक शाला, पशु चिकित्सालय, सिंधी कॉलोनी, पुराना बिजली ऑफिस, शासकीय हाई स्कूल, 29 क्वार्टर, पुरानी बस्ती, जनपद पंचायत कार्यालय, पुरानी कृषि उपज मंडी जैसे दर्जनों स्थानों पर बारहमासी पेय जल के स्रोत प्राचीन कुआ थे।
कालांतर में उपेक्षा के चलते कुछ स्थानों पर कुओं को पाट कर उसमें कॉलोनी का निर्माण कर दिया गया। शेष बचे कुओं में गंदगी व कचरा डालकर पाट दिया गया जिसके चलते अब इन कुओं का अस्तित्व लगभग समाप्ति के कगार पर पहुंच चुका हैं। यदि जिला प्रशासन एवं सामाजिक कल्याण व उत्तरदायित्व के कार्य का ढिढोरा पीटने वाले कथित एनजीओ योजनाबध्द तरीके से इन कुओं की सफाई हेतु आमजनों को जोडक़र अभियान चलाएं तो निश्चित ही कुओं को नया जीवन मिल सकेगा। साथ ही बारिश के दौरान भूजल स्रोत के रिचार्ज एवं वर्षा जल संचयन की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। ऐतिहासिक महत्व का है पुराने मंडी स्थित कुआं
नगर के पुराने कृषि उपज मंडी परिसर स्थित कुआं का ऐतिहासिक महत्व हैं। वर्ष 1935 में महात्मा गांधी मंडी परिसर में आयोजित एक सभा में शामिल हुए थे। जहां उन्होंने दलित उद्धार का संदेश देने स्वयं दलित युवक के हाथों पानी निकलवा कर पिया था। यह कुआं वर्षों तक नगर की बड़ी जनसंख्या के लिए पेयजल का महत्व पूर्ण स्रोत था। बाद में इस कुआं के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए तत्कालीन मंडी सचिव ने कुआं का जीर्णोद्धार कराया था। जिसकी जानकारी लगते ही पूर्व एडीजी पुलिस आर के विज इस कुएं को देखने पहुंचे थे। वही ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए तत्कालीन कलेक्टर रजत बंसल, डोमन सिंह, पूर्व कलेक्टर दीपक सोनी आदि ने भी इस स्थल को विकसित करने की योजना बनाया था परंतु अब तक इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य नहीं हो पाया हैं। गांधीवादियों में इस ऐतिहासिक व प्राचीन धरोहर कुआं का जीर्णोद्धार सुरक्षित करने की मांग प्रशासन से किया हैं।


