बलौदा बाजार

खरवे में 90 दिनों के भीतर 8 मौतें, शवों को कब्र से निकालकर जांच शुरू
17-Jun-2026 3:15 PM
खरवे में 90 दिनों के भीतर  8 मौतें, शवों को कब्र से निकालकर जांच शुरू

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार, 17 जून। बलौदाबाजार जिले के कसडोल विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम खरवे में पिछले 90 दिनों के भीतर 8 ग्रामीणों की मृत्यु का मामला सामने आया है। इन मौतों को लेकर स्थानीय ग्रामीणों द्वारा आशंका व्यक्त किए जाने के बाद प्रशासन और पुलिस ने मामले की वैधानिक जांच शुरू कर दी है।

 फरवरी से मई के बीच हुईं मौतें

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मौतों का यह सिलसिला फरवरी से शुरू हुआ था। सात फरवरी को बद्री पटेल की मृत्यु हुई, जिसके बाद पुतुल राम साहू और पूर्व सरपंच चैतराम साहू की भी मौत हो गई। इसके बाद 14 मार्च को बुधराम जायसवाल, फिर विनोद साहू और 28 अप्रैल को गजानन माझी की मृत्यु हुई। अप्रैल और मई के दौरान दो अन्य ग्रामीणों, चैतराम साहू (30 अप्रैल) और महत्तरू साहू (15 मई) की भी जान चली गई।

मामले को लेकर ग्रामीणों ने गांव के ही एक किराना व्यापारी पर संदेह व्यक्त किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त व्यापारी लोगों को शराब पीने के लिए आमंत्रित करता था, जिसके बाद संबंधित व्यक्तियों की तबीयत बिगड़ती थी और उनकी मृत्यु हो जाती थी। लगातार हो रही इन मौतों को लेकर क्षेत्र में विभिन्न तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग इसे अंधविश्वास और तांत्रिक अनुष्ठान से जोडक़र देख रहे हैं, हालांकि पुलिस प्रशासन इन दावों से परे मामले की आपराधिक और वैज्ञानिक नजरिए से जांच कर रहा है।

जांच के दौरान कार्तिक कुमार नामक एक ग्रामीण का मामला सामने आया है, जो पुलिस के लिए महत्वपूर्ण गवाह माना जा रहा है। बयान के अनुसार, कार्तिक भी कथित तौर पर उक्त व्यापारी के साथ था। शराब का सेवन करते ही उसे पेट में तेज दर्द और उल्टियां शुरू हो गईं। चिकित्सकों के अनुसार, उल्टियां होने के कारण संदिग्ध पदार्थ शरीर में पूरी तरह नहीं फैल पाया। उसे गंभीर स्थिति में रायपुर रेफर किया गया था, जहां वेंटिलेटर पर तीन दिनों तक चले उपचार के बाद अब उसकी हालत सामान्य है।

ग्रामीणों द्वारा कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से शिकायत किए जाने के बाद प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ है। कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, एसडीएम और चिकित्सकों की टीम की उपस्थिति में मृतकों के शवों को कब्रों से बाहर निकाला जा रहा है।

पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में शवों का पोस्टमार्टम और फोरेंसिक परीक्षण कराया जा रहा है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही मौतों के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा और उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


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