बलौदा बाजार

मकान तोडऩे की कार्रवाई पर अदालत की रोक, प्रशासन को फटकार
27-Apr-2026 4:03 PM
मकान तोडऩे की कार्रवाई पर अदालत   की रोक, प्रशासन को फटकार

प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि नष्ट होने पर भी उठे सवाल

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार, 27 अप्रैल। ग्राम कुकदा निवासी जगदीश मिरी के मकान तोड़े जाने की कार्रवाई पर न्यायालय ने रोक लगा दी है। न्यायालय ने प्रशासन की कार्यवाही को प्रथम दृष्टया अवैध मानते हुए यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं तथा वाद भूमि पर किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप पर प्रतिबंध लगा दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भूमिहीन होने के कारण जगदीश मिरी को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पात्र मानते हुए जनपद पंचायत द्वारा सर्वे एवं अनुशंसा के बाद शासन ने उन्हें अन्य 107 हितग्राहियों के साथ आबादी भूमि पर मकान आवंटित किया था। यह मकान उन्हें वैध अधिकार के तहत प्रदान किया गया था।

बताया जा रहा है कि गांव के ही कुछ लोगों शिवप्रसाद, दुकालू, राधेश्याम, देवदास, विश्वनाथ, मोहनलाल, कृष्णकुमार, सियाराम और सुंदरलाल को यह आवंटन आपत्तिजनक लगा। आरोप है कि 23 जुलाई 2025 की रात इन लोगों ने एकजुट होकर जगदीश मिरी के घर पर हमला किया, दरवाजा व दीवार तोड़ दी, गाली-गलौज की और नगदी, जेवर व अनाज भी लूट ले गए।

पीडि़त द्वारा थाने में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप है। इसके बाद अनुविभागीय अधिकारी, भाटापारा द्वारा संबंधित ग्रामीणों के प्रभाव में आकर उक्त मकान को अवैध कब्जा घोषित करते हुए तोडऩे का आदेश जारी कर दिया गया। तहसीलदार द्वारा बेदखली वारंट भी जारी किया गया, जबकि कलेक्टर स्तर पर भी प्रकरण में सुनवाई नहीं हो सकी।

यह भी उल्लेखनीय है कि उसी आबादी भूमि पर बने अन्य व्यक्तियों के मकानों को नहीं तोड़ा गया। केवल जगदीश मिरी के मकान पर की गई इस कार्रवाई को लेकर भेदभाव के आरोप भी सामने आ रहे हैं। वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राप्त शासकीय सहायता राशि भी मकान तोड़े जाने के कारण नष्ट हो गई, जिससे सरकारी धन की हानि होना बताया जा रहा है।

न्याय के लिए अंतत: जगदीश मिरी ने अपने अधिवक्ता सतीश चन्द्र श्रीवास्तव के माध्यम से सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के तहत नोटिस प्रेषित कर न्यायालय में वाद दायर किया। मामले की सुनवाई करते हुए व्यवहार न्यायाधीश कु. रिद्धि बुराड ने प्रशासन की कार्रवाई को अवैध मानते हुए स्थगन आदेश पारित किया।

न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि वाद भूमि पर जगदीश मिरी के कब्जे में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न किया जाए। साथ ही संबंधित ग्रामीणों एवं प्रशासनिक अधिकारियों अनुविभागीय अधिकारी और तहसीलदार को भी हस्तक्षेप से रोका गया है। मामले में जगदीश मिरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चन्द्र श्रीवास्तव ने पैरवी की।


अन्य पोस्ट