बलौदा बाजार

गांव को जल संकट से उबारने योजना क्रियान्वयन नहीं
27-Apr-2026 4:08 PM
 गांव को जल संकट से उबारने योजना क्रियान्वयन नहीं

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार, 27 अप्रैल। भीषण गर्मी के चलते सुहेला, रानी जरौद, आमाकोनी, टेकरी, मटिया, फरहद और डिग्गी खपरी सहित कई गांव में पेयजल संकट गहराता जा रहा हैं। इलाके में नजदीकी बांध से पानी लाने की योजना पहले बनाई गई थी। यह बांध इलाके से 15 किलोमीटर दूर हैं। सप्लाई के लिए बनाई गई नहरों में कुछ दूर तक तो पानी सही आया, लेकिन उसके बाद अलग-अलग परेशानियों के चलते योजना पूरी तरह फ्लॉप हो गई। अब ग्रामीणों को रानी जरौद गांव की सरहद में 50 एकड़ शासकीय भूमि पर बंद पड़ी दर्जनों पत्थर खदानों से उम्मीद है जिसमें बारिश का पानी इक_ा हैं।

यह खदानें प्रभावित क्षेत्र से महज 15 किलोमीटर दूर हैं। ऐसे में पानी की सप्लाई भी आसान होगी। ऐसे में ग्रामीणों ने शासन प्रशासन ने गर्मी में इन्हें बंद पड़ी खदानों के जरिए पानी का अस्थाई इंतजाम करने की मांग की हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन खदानों को आपस में जोडक़र एक बड़े जलाशय का रूप दिया जाए तो लगभग 7 से 8 गांव की करीब 20 हजार आबादी को सीधे पेयजल और सिंचाई का लाभ मिल सकता हैं। इसके साथ ही इलाके में सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई भी संभव हो सकेगी। क्षेत्र के पंचायत जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मांग की है कि वर्षों से बंद पड़ी खदानों के मेड हटाकर उन्हें एकीकृत किया जाए जिससे एक बड़ा जलसंग्रहण संरचना तैयार हो सकें। उसका कहना है कि इससे भूजल स्तर में सुधार होगा और गर्मी के मौसम में आसपास के गांव के तालाबों में ट्यूबवेल के माध्यम से पानी भरा जा सकेगा।

यह क्षेत्र वृष्टि छाया क्षेत्र में आता है, जहां लगभग 20 से 25 गांव बंजारी नाला और जमनिया नाला के बीच स्थित हैं। भौगोलिक स्थिति के कारण यह सिंचाई के स्थायी साधन सीमित हैं। किसानों ने पहले भी महानदी के समोदा डायवर्सन से तिल्दा ब्लॉक के कुम्हारी बांध तक पानी पहुंचाने और सुहेला से गुर्रा तक सिंचाई नहर विस्तार की मांग को लेकर लंबा आंदोलन किया था। इस प्रयास के तहत रायखेड़ा स्थित अदानी पावर प्लांट से कुम्हारी बांध तक पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन योजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी।

ग्रामीणों की मांग सभी बंद पड़ी खदानों को जोडक़र बांध जैसा निर्माण किया जाए

मिली जानकारी के अनुसार 2017 18 में तत्कालीन जिला कलेक्टर डॉक्टर बसवराजू एस ने खदान क्षेत्र का निरीक्षण किया था लेकिन स्थानांतरण के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया। वर्ष 2022-23 में जिला पंचायत स्तर पर सभी खदानों को एकीकृत करने की योजना बनी थी परंतु खुदाई और पुनर्भरण को लेकर मतभेद के कारण काम अटक गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार आमकोनी, सरपंच मनीष साहू, पैरहदा सरपंच, महेश जांगड़े, टेकारी सरपंच रतन रामनारायण ध्रुव, मटिया सरपंच अनिता टीकाराम निषाद, रानी जरौद सरपंच कांति भोला साहू सहित पूर्व पंचायत सरपंचों और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से खदानों को जोडक़र बांध जैसे निर्माण की मांग रखी हैं।

जिला पंचायत की बैठक में रखा जाएगा मुद्दा सभापति

जिला पंचायत सभापति ईशान वैष्णव ने कहां की पंचायत जनप्रतिनिधियों की मांग को जिला पंचायत की बैठक में रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रस्ताव पर चर्चा के बाद ही आगे की कार्यवाही तय होगी। खदान नियमों के अनुसार खदान संचालकों को खनन के बाद गढ्ढों का पुनर्भरण करना आवश्यक होता है, लेकिन अधिकांश खदानें बिना भरे ही छोड़ दिए गए हैं। इसी मुद्दे को लेकर पूर्व में पंचायत प्रतिनिधियों और खदान संचालकों के प्रतिनिधिमंडल के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सुहेला प्रवास के दौरान बांध निर्माण का प्रस्ताव भी सोपा था।

समीक्षा के बाद निर्णय लेंगे

मंत्री और बलौदाबाजार के विधायक वर्मा ने कहा कि नियमों के अनुसार खदानों का पुनर्भरण अनिवार्य प्रावधान हैं। फिर भी संबंधित विभाग से जानकारी लेकर समीक्षा करेंगे। इसके बाद ही उसके लिए जलाशय निर्माण को लेकर कोई निर्णय लेना संभव होगा।


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