बलौदा बाजार
इंडक्शन, मिट्टी के चूल्हों का ले रहे सहारा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 15 अप्रैल। शहर में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत अब गंभीर रूप से ले चुकी हैं। सप्लाई महज 20 फीसदी होने का दावा किया जा रहा है लेकिन जमीनी स्थिति इससे कहीं अधिक चिंताजनक हैं। बीते एक सप्ताह से शहर के कई इलाकों में एक भी सिलेंडर की आपूर्ति नहीं हुई हैं। ऐसे में होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों के सामने संचालन संकट खड़ा हो गया हैं। स्थिति यह है कि शहर के करीब 80 फीसदी होटल में तंदूर, बिरयानी और नान जैसे प्रमुख व्यंजन अस्थाई रूप से बंद कर दिए गए हैं।
गैस की कमी का सीधा असर होटल व्यवसाय के कामकाज और मेनू पर साफ दिख रहा हैं। संचालकों को मजबूरी में अपने किचन सिस्टम में बदलाव करना पड़ रहा हैं। कई जगहों पर इंडक्शन चूल्हों, इलेक्ट्रिक उपकरणों और लकड़ी के चूल्हा का सहारा लिया जा रहा हैं। इससे न केवल लागत बढ़ रही है बल्कि खाना बनाने में समय भी अधिक लग रहा है, जिससे ग्राहकों को सेवा देने में परेशानी हो रही हैं।
होटल संचालकों का कहना है कि पहले जहां 2 दिन से तीन दिन कामर्शियल सिलेंडरों की आवश्यकता होती थी, वहीं अब एक सप्ताह में सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा हैं। इससे कारोबार प्रभावित हो रहा है और कुछ स्थानों पर स्टाफ में कटौती तक करनी पड़ी हैं। बड़े होटलों में पनीर, पिज्जा, तंदूरी आइटम, मैगी और बर्गर जैसे कई लोकप्रिय व्यंजन में न्यू से हटा दिए गए हैं। कुछ होटल संचालक अब डीजल भट्टी के जरिए खाना बनाने को मजबूर हैं। जबकि दोसा जैसे आइटम भी सीमित समय के लिए ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कुल मिलाकर शहर में कमर्शियल गैस की कमी ने होटल और स्ट्रीट फूड व्यवसाय को संकट में डाल दिया हैं। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो इसका असर न केवल व्यवसायियों बल्कि आमजनता की जेब और रोजमर्रा की खानपान व्यवस्था पर भी पड़ेगा।
स्ट्रीट फूड वाले प्रभावित आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ेंगे
कमर्शियल गैस संकट का असर अब स्ट्रीट फूड कारोबार पर भी साफ नजर आने लगा हैं। चौपाटी, बस स्टैंड, गार्डन चौक और अंबेडकर चौक जैसे प्रमुख इलाकों में कई ठेले संचालकों ने अपना काम बंद कर दिए हैं। छोटे व्यवसाईयों का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडरों के उपयोग पर भी समय सीमा और नियम लागू है, जिससे वैकल्पिक व्यवस्था भी सीमित हो गई हैं। यदि जल्द ही आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो शहर के स्ट्रीट फूड कारोबार पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता हैं। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी दिनों में गैस सप्लाई की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो खाने-पीने की वस्तुओं के दाम में 10 से 15 फीसदी तक बढ़ोतरी करनी पड़ सकती हैं। इससे आम उपभोक्ताओं पर भी सीधा असर पड़ेगा।
गैस 15 दिन से नहीं मिलने से इंडक्शन ले आए
शहर के मुख्य मार्ग स्थित एक दुकान में इंडक्शन के जरिए चाय बनाई जा रही हैं। संचालक मोहन साहू ने बताया कि लगभग 15 दिन पहले गैस खत्म हो गई थी, लेकिन लगातार प्रयासों के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल पाया। इसी तरह शहर के एक प्रमुख भोजनालय में गैस की उपलब्धता के चलते तीन कोयले की भ_ियां बनाकर खाना तैयार किया जा रहा हैं।
दुकानों में घरेलू गैस जल रहे इससे समस्या- पुनीत वर्मा
फूड ऑफिसर पुनीत वर्मा का कहना है कि समस्या उन्हीं लोगों को हो रही जो कमर्शियल गैस कनेक्शन लेने की बजाय घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल कर रहे थे। जिन व्यवसाईयों के पास वेद कमर्शियल कनेक्शन है, उन्हें उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार सिलेंडर दिए जा रहे हैं।


