बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 11 अप्रैल। जिला एवं सत्र न्यायालय बलौदाबाजार ने मां-बेटी की निर्मम हत्या के चर्चित मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोहरा आजीवन कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस प्रकार के जघन्य अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं, इसलिए कठोर दंड आवश्यक है।
यह घटना कसडोल थाना क्षेत्र के भदरा गांव की है, जहां 28 जुलाई 2024 को संतोषी साहू और उनकी पुत्री ममता साहू के अधजले शव उनके घर में मिले थे। इस घटना से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी दिलहरण कश्यप का मृतका के साथ कथित संबंध था और वह अक्सर घर आता-जाता था। मोबाइल कॉल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों ने इस कड़ी को मजबूत किया। घटना से पहले दोनों के बीच बातचीत भी सामने आई, जिससे संदेह गहराया।
जांच के दौरान आरोपी के बयान के आधार पर कुल्हाड़ी बरामद की गई, जिस पर खून के निशान पाए गए। घटना के समय पहने गए कपड़े भी जब्त किए गए। सुनवाई के दौरान 25 गवाह पेश किए गए, जिनमें कई ने आरोपी और मृतका के बीच संबंध की पुष्टि की।
अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार वर्मा ने सभी साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया और दोनों हत्याओं के लिए अलग-अलग आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
मामले में अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता संतोष कुमार कन्नौजे ने प्रभावी पैरवी करते हुए साक्ष्यों और गवाहों को मजबूती से प्रस्तुत किया, जिससे दोष सिद्धि संभव हो सकी।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे अपराधों पर सख्त रुख अपनाना आवश्यक है, ताकि समाज में कानून का भय बना रहे। यह फैसला न केवल पीडि़त परिवार के लिए न्याय है, बल्कि समाज के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि गंभीर अपराधों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


