बलौदा बाजार
भाटापारा, 11 अप्रैल। रासायनिक उर्वरकों की बढ़ती कीमत और उपलब्धता की चुनौती को देखते हुए किसानों को वैकल्पिक पोषक स्रोत अपनाकर टिकाऊ खेती की ओर बढऩा चाहिए। यह बात सिद्ध श्री शीतला पर्यावरण सेवा समिति के अध्यक्ष रविन्द्र गिन्नौरे ने कही। उन्होंने कहा कि गौ-आधारित एवं समन्वित जैविक खेती अपनाकर किसान न केवल खेती की लागत कम कर सकते हैं, बल्कि विषाक्त भोजन, जलवायु परिवर्तन और भूमि-जल प्रदूषण जैसी समस्याओं से भी निपट सकते हैं। गिन्नौरे ने बताया कि रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में ‘हरित खाद, नील-हरित शैवाल और जैव उर्वरकों’ का उपयोग किया जा सकता है, जिससे लगभग 50 प्रतिशत तक रासायनिक उर्वरकों की पूर्ति संभव है।
इसके अलावा नाडेप खाद, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य जैविक खादों के उपयोग से फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्व (एनपीके) उपलब्ध कराकर उनकी गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों का उपयोग बढ़ाएं। इससे मृदा स्वास्थ्य सुधरेगा, जैव विविधता संरक्षित होगी और फसलें अधिक सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण बनेंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि टिकाऊ एवं जैविक खेती ही भविष्य की खेती है। इसके माध्यम से किसान न केवल अपनी लागत घटा सकते हैं, बल्कि आने वाली पीढिय़ों के लिए स्वस्थ पर्यावरण और सुरक्षित भोजन सुनिश्चित कर सकते हैं।


