बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 8 मार्च। शनिवार 7 मार्च को अब्दुल जाहिद कुरैशी, प्रधान जिला न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बलौदाबाजार के निर्देशन में अमिता जायसवाल, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बलौदाबाजार (छ.ग.) द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कार्यालय जिला एवं सत्र न्यायालय बलौदाबाजार (छ.ग.) में महिला न्यायिक अधिकारियों न्यायिक कर्मचारियों के सम्मान में सम्मान समारोह एवं विधिक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन बलौदाबाजार न्यायालय परिसर में किया गया।
महिला सम्मान समारोह का शुभांरभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अब्दुल जाहिद कुरैशी, प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय राजभान सिंह, प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार वर्मा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गिरीश पाल सिंह, महिला कर्मचारियों की उपाध्यक्ष दीपा नायक द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया, जिसमें तृतीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश विवेक गर्ग, विशेष न्यायाधीश एफटीसी पॉक्सो न्यायालय गिर्जेश प्रताप सिंह, वरिष्ठ न्यायाधीश प्रशांत भास्कर, कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश पूजा चन्द्रा एवं माला यादव उपस्थित रहे हैं। आयोजन समारोह का मंच संचालन कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सुश्री सारिका नंदे के द्वारा किया गया। सम्मान समारोह में समस्त महिला कर्मचारियों एवं अधिकारियों को स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ती पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही, एक वर्ष में अधिकतम कार्यदिवस पर उपस्थित महिला कर्मचारी, वरिष्ठ महिला कर्मचारी, नेतृत्व के आधार पर, तीन वर्ष के एसीआर के आधार पर अच्छा प्रदर्शन करने वाले महिला कर्मचारियों को विशेष स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बलौदाबाजार अब्दुल जाहिद कुरैशी के द्वारा अपने उद्बोधन भाषण में यह कथन किया गया कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस ‘‘मात्र कलेंडर का एक दिन नहीं है, यह एक वैश्विक आंदोलन है’’ जो महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाता है और लैंगिक समानता को रेखांकित करता है, महिला दिवस एक उत्सव होने के साथ-साथ कार्रवाई का आह्वान भी है। यह आर्थिक, सशक्तिकरण से लेकर हिंसा के अनुमोदन तक महिला दिवस के महत्व पर जोर देता है और साथ ही एकता को भी प्रोत्साहित करता है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का लक्ष्य शिक्षा, स्वास्थ्य, नेतृत्व और वेतन समानता में लैंगिक समानता को गति देना है। महिलाओं के पांच सबसे महत्वपूर्ण अधिकार, शिक्षा का अधिकार, समान वेतन का अधिकार, स्वास्थ्य सेवा का अधिकार, लैंिगक उत्पीडऩ से मुक्त कार्य के लिए सुरक्षित वातावरण सम्पत्ति का अधिकार है।


