बलौदा बाजार

लवन सहकारी बैंक में समय पर राशि न मिलने से किसान परेशान
22-Feb-2026 4:12 PM
लवन सहकारी बैंक में समय पर राशि न मिलने से किसान परेशान

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 22 फरवरी।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की लवन शाखा में किसानों को राशि वितरण में देरी की शिकायत सामने आई है। किसानों का कहना है कि सुबह बैंक पहुंचने के बाद भी उन्हें देर तक इंतजार करना पड़ता है और कई बार बिना राशि निकाले लौटना पड़ता है।
किसानों के अनुसार, कैश वाहन के देर से पहुंचने के कारण भुगतान प्रक्रिया प्रभावित होती है। दूरस्थ गांवों से आने वाले किसानों को बार-बार बैंक आना पड़ रहा है। बैंक कर्मचारियों ने बताया कि जिले से कैश वाहन आने के बाद ही राशि वितरण संभव हो पाता है।
 

पंजीकृत किसानों की स्थिति
लवन शाखा के अंतर्गत 15 उपार्जन केंद्र संचालित हैं। शाखा प्रबंधन के अनुसार यहां 14,047 किसान पंजीकृत हैं। किसानों ने समय पर कैश उपलब्ध कराने की मांग की है ताकि उन्हें बार-बार बैंक नहीं आना पड़े।
शाखा प्रबंधक गिरधारी लाल ध्रुव ने बताया कि बड़ी संख्या में किसान पंजीकृत होने के कारण दबाव रहता है। उन्होंने किसानों को एटीएम कार्ड बनवाने की सलाह दी ताकि वे एटीएम से भी राशि निकाल सकें। उनका कहना है कि कैश उपलब्ध होने पर प्राथमिकता के आधार पर भुगतान किया जाता है।

धान उठाव में देरी का मुद्दा
धान खरीदी बंद हुए 18 दिन बीत चुके हैं। बैंक और समितियों से मिली जानकारी के अनुसार लवन शाखा अंतर्गत इस वर्ष 7,02,330 क्विंटल धान की खरीदी हुई, जिसमें से 5,29,000 क्विंटल का परिवहन हो चुका है और 1,99,424 क्विंटल धान का उठाव शेष है।
कोसमंडी शाखा अंतर्गत 6 उपार्जन केंद्रों में 2,82,138 क्विंटल धान की खरीदी हुई, जिसमें से 1,71,767 क्विंटल का उठाव हो चुका है और 1,10,370 क्विंटल शेष है। समिति प्रबंधकों का कहना है कि खरीदी के 72 घंटे के भीतर उठाव का प्रावधान है, लेकिन परिवहन में देरी से समस्या उत्पन्न हो रही है।

 अधिकारियों का पक्ष
क्षेत्रीय फील्ड ऑफिसर लक्की ने बताया कि कुछ स्थानों के लिए डीओ (डिलीवरी ऑर्डर) जारी हो चुका है और शेष डीओ जारी करने के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
कोसमंडी शाखा प्रबंधक डी.एस. वर्मा ने बताया कि डीओ जारी होने के बाद मिलर्स के माध्यम से धान उठाव की प्रक्रिया जारी है, ताकि शॉर्टेज की स्थिति से बचा जा सके। प्रबंधन का कहना है कि प्रक्रिया को सुचारू बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं किसान समयबद्ध भुगतान और उठाव की मांग कर रहे हैं।
 


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