बलौदा बाजार

केंद्र सरकार मनरेगा में काम की गारंटी और मजदूरी की गारंटी निश्चित करें-सुशील शर्मा
22-Jan-2026 7:46 PM
केंद्र सरकार मनरेगा में काम की गारंटी और मजदूरी की गारंटी निश्चित करें-सुशील शर्मा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
भाटापारा, 22 जनवरी।
प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधि एवं पूर्व मंडी अध्यक्ष सुशील शर्मा,ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष ग्रामीण अमर मंडावी ने आज ग्रामीण क्षेत्र में जाकर मनरेगा के तहत हो रहे कार्यों का निरीक्षण किया।

इस अवसर पर ग्राम कोड़ापार में उपस्थित मजदूरों ने बताया कि सरकार मुरुम युक्त पथरीली जमीन में अमृत सरोवर निर्माण करा रही है जहां पर जमीन काफी पथरीली और ठोस है खुदाई करने में काफ़ी मेहनत और समय लग रहा है किंतु सरकार के कतिपय अधिकारी हमें मजदूरी की राशि कम दे रहे है,कम राशि का भी भुगतान तय समय के अनुसार नहीं मिलता है हमारी मेहनत की मजदूरी काफी विलंब से प्राप्त हो रही है, मेट के रूप में 50 मजदूरों के पीछे मात्र दो मेट ही रखा जाता है और मेट कार्य करने वालों की रोजी भी पर्याप्त समय में नहीं मिल रही है एक तो कम रोजी मिलती है और वह रोजी भी समय में नहीं मिलती है।

रोजगार सहायक और इंजीनियर कार्य स्थल से नदारत रहते है। कार्यरत मजदूरों के लिये ना तो पीने के लिये पानी और भोजन करने के लिए छांव की व्यवस्था नहीं है, प्राथमिकी उपचार के लिये कोई दवाई भी कार्यरत मज़दूरों के हितार्थ कार्य स्थल पर विधमन नहीं है ये अधिकारी की मज़दूरों के प्रति घोर लापरवाही को प्रमाणित करता है।
मजदूरों की समस्याओं को सुनकर सुशील शर्मा और अमर मंडावी ने कहा की मनरेगा कार्य जिसे गांव के गरीब अंतिम व्यक्ति को रोजगार देने के लिये हमारी कांग्रेस सरकार के प्रधानमंत्री स्व.मनमोहन सिंह ने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के नाम से क़ानून बनाया था जिसमें प्रत्येक परिवार के सदस्यों को 15 दिन के अंदर रोजगार देने सरकार कटिबद्ध रहती थी और पूरे 365 दिन अर्थात पूरे वर्ष भर मजदूरों को कार्य मिलता था किंतु इस नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार ने इस महत्वपूर्ण योजना से महात्मा गांधी का नाम बदल कर विकसित भारत गारंटी फार रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण नाम रखा है जिसे भाजपा के नेता वीबी जीरामजी योजना कहते फिर रहे है।

 इस योजना के अंतर्गत मज़दूर भाइयों और बहनों आपको लगातार 365 दिन कार्य नहीं मिलेगा,क्यूंकि वर्षाकाल के समय 2 महीना आपके गाँव में कार्य बंद रहेगा, आपके ग्राम पंचायत के प्रस्ताव की कोई अहमियत नहीं होगी। ग्राम पंचायत सिर्फ बाबू बनकर पत्रों का आदान प्रदान ही करेगा,आपके निर्णय को दरकिनार कर दिया जायेगा। राज्य सरकार को आपकी मजदूरी का 40 प्रतिशत हिस्सा ख़ुद को देना पड़ेगा।

पैसा बचाने आपको मजदूरी की राशि भी कम मिलेगी और समय पर नहीं मिलेगी।  हो सकता है आपके गांव में मनरेगा कार्य बंद भी करा सकते है। ऐसे मजदूर विरोधी योजना का पुरजोर विरोध होना चाहिये आपके हितों को ध्यान में रखकर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार से माँग की है कि ग्रामीण मजदूरों को काम की गारंटी-मजदूरी की गारंटी सहित जवाबदेही की भी गारंटी होना चाहिये। मनरेगा में जो बदलाव किया गया है उसकी तत्काल वापसी होनी चाहिये,काम के संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली होनी चाहिये,मज़दूरों को प्रतिदिन न्यूनतम वेतन 400 रूपये मिलना चाहिये।
 


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