बलौदा बाजार

बिना रॉयल्टी के 10 फीट तक गहरा खोद दिया तालाब
14-Dec-2025 9:31 PM
बिना रॉयल्टी के 10 फीट तक गहरा खोद दिया तालाब

सडक़ निर्माण में प्रयुक्त सामग्री और तालाब से मिट्टी निकासी पर उठे सवाल

बलौदाबाजार, 14 दिसंबर। राजधानी रायपुर को जोडऩे वाले पडक़ीडीह से हिरमी तक लगभग 15 किलोमीटर लंबी सडक़ के निर्माण कार्य में प्रयुक्त सामग्री को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति दर्ज कराई है। यह सडक़ लगभग 2 करोड़ 29 लाख रुपये की लागत से निर्मित की जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि सडक़ के जीएसबी लेयर में मुरुम या मिक्स गिट्टी के स्थान पर कुछ स्थानों पर काली और कुछ स्थानों पर पीली मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है। उनके अनुसार इससे सडक़ की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि सडक़ मार्ग से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर मुरुम उपलब्ध है।

रॉयल्टी और मिट्टी निकासी को लेकर आपत्ति

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सडक़ निर्माण के लिए कसहीडीह गांव के तालाब से मिट्टी निकाली जा रही है और इसके लिए माइनिंग लीज या रॉयल्टी का पालन नहीं किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब को लगभग 10 फीट तक गहरा किया गया है, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है।

ग्रामीण प्रतिनिधियों के अनुसार, तालाब के गहरीकरण से बारिश के समय पानी भरने पर मनुष्यों और मवेशियों के लिए जोखिम की स्थिति बन सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण स्थल पर पानी का छिडक़ाव पर्याप्त नहीं होने से धूल की समस्या हो रही है।

इस संबंध में ठेकेदार के मैनेजर एस.एम. अंसारी ने कहा कि मिट्टी खुदाई के लिए रॉयल्टी की आवश्यकता नहीं होती और तालाब का गहरीकरण ग्रामीणों के कहने पर किया जा रहा है।

ग्रामीण प्रतिनिधि बैसाखू बंजारे सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने केवल चारों ओर स्लैब निर्माण की बात कही थी और यदि माइनिंग विभाग या जनप्रतिनिधियों द्वारा मिट्टी निकासी पर रोक लगाई जाती है, तो आगे खुदाई नहीं की जानी चाहिए।

लोक निर्माण विभाग, उपसंभाग भाटापारा के एसडीओ आर.के. साहू ने कहा कि वे स्वयं स्थल निरीक्षण पर गए थे। उनके अनुसार, सडक़ निर्माण में प्रयुक्त काली और पीली मिट्टी का विभागीय इंजीनियरों द्वारा परीक्षण किया गया है।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि तालाब से मिट्टी निकासी और सडक़ निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री की जांच की जाए, ताकि निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर स्पष्टता हो सके।


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