बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 13 दिसंबर। जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने के साथ ही प्रशासन ने बिना कृषि उपज मंडी लाइसेंस के धान खरीदी-बिक्री पर कार्रवाई के प्रावधान लागू किए हैं।
प्रशासन के अनुसार बिना लाइसेंस धान खरीदने पर समर्थन मूल्य के आधार पर पांच गुना तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। फुटकर खरीदी की सीमा 20 क्विंटल निर्धारित की गई है।
प्रशासन का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखना और अवैध खरीदी पर रोक लगाना है। वहीं किसानों और दुकानदारों का कहना है कि इन प्रावधानों के कारण उन्हें व्यवहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों और दुकानदारों की समस्याएं
किसानों का कहना है कि वे हर वर्ष अपनी आवश्यकताओं के अनुसार कम मात्रा में धान बेचते रहे हैं, क्योंकि मंडी दूरी पर स्थित है। दुकानदारों ने बताया कि उन्हें लाइसेंस प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं थी और पहले फुटकर खरीदी के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती थी।
दुकानदारों के अनुसार, जुर्माने के प्रावधान के कारण वे धान खरीदने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि फुटकर खरीदी की 20 क्विंटल की सीमा भी कम है।
लाइसेंस प्रक्रिया को लेकर आपत्ति
प्रशासन के अनुसार फुटकर लाइसेंस का शुल्क 300 रुपये और थोक लाइसेंस का शुल्क 5,000 रुपये निर्धारित है।
दुकानदारों का कहना है कि लाइसेंस के लिए आधार, पैन, बैंक खाता, जीएसटी नंबर, गोदाम व दुकान का लाइसेंस और ग्राम पंचायत की एनओसी जैसी शर्तें पूरी करना छोटे व्यापारियों के लिए कठिन है।
कृषि उपज मंडी के अनुसार जिले में अब तक 445 लोगों ने मंडी लाइसेंस प्राप्त किया है।
फुटकर और थोक खरीदी पर सवाल
दुकानदारों ने बताया कि फुटकर लाइसेंस में 20 क्विंटल की सीमा निर्धारित है, जबकि थोक लाइसेंस में खरीदी की कोई सीमा तय नहीं की गई है। इसको लेकर उन्होंने असमानता का प्रश्न उठाया है।
ग्रामीण परंपरा और बदलाव
ग्रामीण किसानों का कहना है कि वर्षों से गांवों में धान बेचकर उसी दुकान से आवश्यक वस्तुएं खरीदने की परंपरा रही है। किसानों और दुकानदारों का कहना है कि समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू होने के बाद प्रशासनिक सख्ती बढ़ी है।
किशन यादव (लटुवा) ने बताया कि उन्हें बच्चों के लिए साइकिल खरीदने हेतु धान बेचना था, लेकिन दुकानदारों ने खरीदी सीमा पूरी होने की बात कही।
मनोज वर्मा (खपरी) ने कहा कि वे वर्षों से घरेलू खर्च के लिए कम मात्रा में धान बेचते आए हैं।
धरमलाल साहू (अर्जुनी) ने बताया कि पत्नी की दवा के लिए पैसे की जरूरत थी, लेकिन गांव में कोई दुकानदार धान खरीदने को तैयार नहीं हुआ।
सुरेश ठाकुर (कोटवा) का कहना है कि छोटे किसानों के लिए मंडी तक जाना खर्चीला पड़ता है, इसलिए वे गांव में ही धान बेचते थे।
कृषि उपज मंडी बलौदाबाजार के सचिव मदनलाल मेश्राम ने कहा—दुकान संचालकों को मंडी लाइसेंस लेने के लिए जागरूक किया जा रहा है। बिना लाइसेंस धान खरीदी पर जब्ती की कार्रवाई की जा रही है।


