बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 7 दिसंबर। धान खरीदी में पारदर्शिता और भीड़ प्रबंधन के उद्देश्य से लागू की गई टोकन तुंहर द्वार एप व्यवस्था इस खरीदी सीजन में किसानों के लिए राहत देने के बजाय कई मुसीबत बनती जा रही हैं। पोर्टल आधारित इस प्रणाली की तकनीकी खामियों ने किसानों की परेशानी दुगनी कर दी हैं। सर्वर डाउन, एरर और स्लॉट समय पर नहीं खुलने जैसी समस्याओं के चलते किसान कई दिनों से टोकन काटने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही। दो-चार मिनट ही टोकन कटता है फिर कोटा फुल हो जाता हैं। इसकी वजह से किसान लगातार परेशान हो रहे हैं।
जिले के दो प्रमुख धान खरीदी केंद्रों सहित ग्रामीण क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। बोईडीह में कई किसान एक साथ मोबाइल फोन में एप इंस्टॉल कर टोकन काटने का इंतजार करते नजर आए लेकिन सर्वर डाउन होने के कारण सभी प्रयास विफल रहे। लटुवा निवासी किशोर यदु मानसिह पैकरा खम्हरिया के देवनाथ ध्रुव और ढाबाडीह के सुखलाल साहू मोतीराम वर्मा ने बताया कि वह लगातार तीन-चार दिनों से प्रयास कर रहे हैं लेकिन हर बार तकनीकी एरर आ जाता हैं।
जिले में इस वर्ष कुल 1 लाख 65 हजार किसानों का पंजीयन किया गया हैं। धान खरीदी शुरू होने के बाद अब तक 33 हजार 289 किसानों ने अपनी उपज भेजी है जिसके तहत 15 लाख 12 हजार 290 क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी हैं। आंकड़े बड़े जरूर हैं लेकिन टोकन सिस्टम की खामियां जमीनी स्तर पर किसानों की चिंता बढ़ा रही हैं।
एनआईसी के जिम्मे एप समाधान का आश्वासन
खाद अधिकारी पुनीत वर्मा ने बताया कि टोकन तुंहर द्वार एप की व्यवस्था एनआईसी देखती है इसमें विभाग की सीधी भूमिका नहीं हैं। यदि सर्वर को लेकर शिकायतें आ रही है तो उच्च अधिकारियों से चर्चा कर समाधान कराया जाएगा।
हेल्प डेस्ट भी नहीं, भटक रहे किसान
खरीदी केंद्रों में टेक्निकल सपोर्ट या हेल्प डेस्क की व्यवस्था न होने की बजाय गंभीर समस्याएं बन गई हैं। कई केंद्र प्रभारियों ने बताया कि अनेक किसानों के पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं है या उन्हें इंटरनेट चलाने की जानकारी नहीं हैं। ऐसे किसानों के लिए फिलहाल कोई वैकल्पिक सुविधा नहीं दी गई हैं। नतीजतन उन्हें बार-बार दूसरों पर निर्भर रहना पड़ रहा हैं।
केंद्रों में सीमित संसाधन बढ़ता दबाव
खरीदी केंद्रों के प्रभारियों ने भी इस व्यवस्था की दिक्कतों को स्वीकार किया गया हैं। उनके अनुसार पोर्टल पर स्लॉट समय पर नहीं खुलती जिससे अचानक भीड़ बढ़ जाती हैं। एक समिति प्रभारी ने बताया कि सिस्टम बार-बार हैंग हो जाता हैं। जब स्लॉट खोलते हैं तो ओवरलोड की स्थिति बन जाती हैं। इससे न सिर्फ काम प्रभावित हो रहा है बल्कि किसानों का भरोसा भी कमजोर हो रहा हैं। कई केंद्रों में कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी भी प्रक्रिया को धीमा कर रही हैं।
ऑफलाइन विकल्प की उठने लगी मांग
धान बेचने को लेकर परेशान किसानों का कहना है कि या तो तकनीकी समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाए या फिर टोकन सिस्टम पर अस्थाई रोक लगाकर कोई वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए। जब बोहारडीह के किसान साधाराम नेताम दादूराम कोसले और पंकज बनर्जी ने बताया कि धान कटाई के बाद वे अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं लेकिन टोकन नहीं मिलने से उपज घरों और केंद्रों में अटकी हुई हैं।


