बलौदा बाजार

एग्रीस्टैक पोर्टल में रकबा त्रुटि से प्रभावित हुई धान खरीदी, किसान पंजीयन व टोकन के लिए परेशान
01-Dec-2025 8:18 PM
एग्रीस्टैक पोर्टल में रकबा त्रुटि से प्रभावित हुई धान खरीदी, किसान पंजीयन व टोकन के लिए परेशान

किसानों ने तहसील स्तर पर त्रुटि सुधार शिविर लगाने की मांग की

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार, 1 दिसंबर। जिले में इस वर्ष धान खरीदी प्रक्रिया रकबा सत्यापन की त्रुटियों के कारण प्रभावित हो रही है। एग्रीस्टैक पोर्टल पर कई किसानों का पंजीयन इसलिए अटका हुआ है क्योंकि गिरदावरी में धान की जगह अन्य फसल दर्ज है या रकबा डेटा सही प्रदर्शित नहीं हो रहा। इसके चलते किसान टोकन नहीं काट पा रहे हैं और खरीदी केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू हो चुकी है, लेकिन रकबा सत्यापन आगे नहीं बढऩे से बड़ी संख्या में किसानों के आवेदन लंबित हैं। पोर्टल पर कई बार ‘टोकन पंजीयन फिलहाल बंद है’ जैसे संदेश भी दिखाई दे रहे हैं।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार— 3369 किसानों के नाम परिवार के अन्य खातों में दर्ज पाए गए हैं या उनकी मृत्यु दर्ज है। वहीं 1862 किसान रकबा संबंधी त्रुटियों के कारण पंजीयन पूरा नहीं कर पा रहे।

अधिकारियों का कहना है कि पोर्टल और एप के नए अपडेट उपलब्ध न होने से सर्वर पर दबाव बढ़ गया है और प्रक्रिया रुक-रुक कर चल रही है। किसानों ने मांग की है कि रकबा जांच और त्रुटि समाधान के लिए तहसील स्तर पर विशेष शिविर लगाए जाएं।

किसानों का कहना है कि रकबा गलत दर्ज होने से वे अपना पूरा उत्पादन समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पाएंगे। तिथि बढऩे के बावजूद त्रुटि समाधान के बिना खरीदी सुचारू नहीं हो सकती।

प्रशासन का कहना है कि खरीदी चल रही है और अब तक जिले के 19,210 किसानों से 85,774 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है, साथ ही भुगतान प्रक्रिया भी जारी है।

हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसानों का दावा है कि पोर्टल संबंधी दिक्कतों और रकबा असमानता के कारण वे प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं।

लटुवा एवं खपरी गांव में किसानों ने रकबा डेटा में बड़े अंतर की शिकायत की है।

लटुवा के किसान नोहर यदु ने बताया कि पिछले वर्षों का रकबा सही होते हुए भी इस बार पोर्टल पर उत्पादन क्षमता आधी दिख रही है।

 खपरी के किसानों ने कहा कि बी-1 और अन्य दस्तावेजों में रकबा सही है, लेकिन पोर्टल पर कम दिख रहा है, जिससे टोकन प्रक्रिया रुक रही है।

किसानों का कहना है कि शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी समाधान देर से मिल रहा है।

कई आवेदकों के आवेदन रकबा मिलान न होने से रिजेक्ट

कई गांवों में खसरा-खतौनी और पोर्टल डेटा में मेल न होने से आवेदन रिजेक्ट हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि दस्तावेज सही होने के बावजूद ऑनलाइन रकबा कम दिखने से पंजीयन आगे नहीं बढ़ रहा।

पंजीयन के लिए तिथि अब 15 दिसंबर तक

नोडल कार्यालय के पर्यवेक्षक सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि जिले में अब तक 1,62,480 किसानों का  पंजीयन पूरा हो चुका है। शेष किसानों के लिए पंजीयन की तिथि बढ़ाकर 15 दिसंबर कर दी गई है। हालांकि किसानों का कहना है कि जब तक रकबा संबंधी त्रुटियों का समाधान नहीं होगा, खरीदी प्रक्रिया आगे बढऩे में कठिनाई बनी रहेगी।


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