बलौदा बाजार

10 दिन में काम से हटे नए कंप्यूटर ऑपरेटर
30-Nov-2025 8:49 PM
10 दिन में काम से हटे नए कंप्यूटर ऑपरेटर

सहकारी समितियों के कर्मियों की हड़ताल के दौरान हुई थी अस्थायी नियुक्तियां

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार, 30 नवंबर। बलौदाबाजार जिले में धान खरीदी व्यवस्था के बीच कंप्यूटर ऑपरेटरों की हड़ताल और अस्थायी नियुक्ति का मामला विवाद का कारण बना हुआ है। जिले के 166 सरकारी धान खरीदी केंद्रों में खरीदी कार्य प्रभावित होने पर प्रशासन ने अस्थायी रूप से नए कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति की थी, जिन्हें लगभग 10 दिनों बाद कार्यमुक्त कर दिया गया। इससे नए ऑपरेटरों में नाराजगी है।

3 नवंबर से सहकारी कर्मचारी समिति संघ के आह्वान पर लैम्पस प्रबंधन के कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर चार सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे। इस बीच 15 नवंबर से जिले में धान खरीदी प्रारंभ हुई, लेकिन ऑपरेटरों की अनुपस्थिति के कारण खरीदी कार्य प्रभावित होने लगा।

17 नवंबर को प्रशासन ने सभी 166 केंद्रों पर अस्थायी ऑपरेटर नियुक्त किए। इनमें कई युवा अपनी पूर्व नौकरियां छोडक़र या पढ़ाई के साथ यह कार्य करने पहुंचे थे।

21 नवंबर को हड़ताल समाप्त होने पर पुराने लैम्पस कर्मचारी व ऑपरेटर काम पर लौट आए। इसके बाद प्रशासनिक समीक्षा के पश्चात 26 नवंबर को निर्णय लिया गया कि खरीदी केंद्रों में पूर्व ऑपरेटर ही कार्य करेंगे। इसी निर्णय के साथ नए ऑपरेटरों को कार्यमुक्त कर दिया गया और आउटसोर्सिंग कंपनी से किया गया अनुबंध भी निरस्त कर दिया गया। उप पंजीयक सरकारी संस्थाएं उमेश गुप्ता ने इसकी पुष्टि की।

कलेक्टर से वैकल्पिक रोजगार की मांग

कार्यमुक्त ऑपरेटरों उमाशंकर श्रीवास, अश्वनी कुमार वर्मा, नागेश साहू, दिलीप वर्मा और प्रेमलता साहू ने कलेक्टर से मिलकर वैकल्पिक रोजगार या अन्य सरकारी कार्य दिए जाने का अनुरोध किया। उनका कहना है कि निर्णय के कारण वे आर्थिक और मानसिक कठिनाई की स्थिति में हैं और आगे आंदोलन की रणनीति भी बना रहे हैं।

नए ऑपरेटरों की स्थिति —

बयान उनके शब्दों में 12000 की नौकरी छोड़ आया था

धुर्राबांधा निवासी दिलीप वर्मा ने कहा कि वह एक ठेकेदार के पास सुपरवाइजर के रूप में 12000 मासिक पर कार्यरत थे। नई नियुक्ति के लिए उन्होंने यह नौकरी छोड़ी, लेकिन कुछ दिनों बाद वे पुन: बेरोजगार हो गए।

पढ़ाई छोडक़र नौकरी की, अब हटा दिया गया

करदा निवासी प्रेमलता साहू ने बताया कि वह बीएड और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं। पारिवारिक कारणों से उन्होंने यह काम ज्वाइन किया था। उनका कहना है कि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि बीच में नहीं हटाया जाएगा।

जहां नौकरी छोड़ी, वहां दूसरा रख लिया गया

कोसमंदी निवासी उमाशंकर श्रीवास ने कहा कि वे एक निजी कंपनी में 10000 वेतन पर ऑपरेटर थे। नई नियुक्ति के लिए उन्होंने वह नौकरी छोड़ी, लेकिन अब वापस जाने पर वहां दूसरा व्यक्ति रखा जा चुका है।


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