बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 30 नवंबर। बारनवापारा अभयारण्य छत्तीसगढ़ का प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। अभयारण्य में जंगल सफारी की सुविधा वन विभाग द्वारा संचालित की जाती है। पहले पर्यटकों को अपनी निजी गाडिय़ों से प्रवेश की अनुमति थी, लेकिन समय के साथ विभाग ने प्रवेश और सफारी संबंधी नियमों में परिवर्तन किया है। अब प्रवेश केवल विभागीय जिप्सी के माध्यम से ही दिया जा रहा है।
नई व्यवस्थाएं और पर्यटकों की प्रतिक्रिया
नए नियमों और प्रवेश व्यवस्था में बदलाव को लेकर वाइल्डलाइफ कंजरवेशन सोसायटी के अध्यक्ष निखिलेश त्रिवेदी ने कहा—नए नियमों के चलते पर्यटकों को यहां आने और घूमने में दिक्कत होगी। पहले 1300 रुपये में सफारी हो जाती थी, अब शुल्क 4500 से 5500 रुपये के बीच बताया जा रहा है। भूताही गेट पर प्रवेश नहीं मिला और बरबसपुर गेट से जाना पड़ा, जहां टिकट अधिक था और सफारी लेना अनिवार्य बताया गया।
वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर अविनाश केशरवानी ने भी नियमों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा—इस बार गेट पर बताया गया कि निजी वाहन से प्रवेश संभव नहीं है। हम किसी प्राकृतिक संरचना को नुकसान नहीं पहुंचाते, फिर भी रोक लगाई जा रही है। बाहर से आने वाली कुछ टीमों को अनुमति दी जा रही है, लेकिन हमें प्रतिबंधित किया जा रहा है।
बलौदाबाजार के डीएफओ गणवीर धम्मशील ने नए नियमों के पीछे विभाग की दृष्टि स्पष्ट की। उन्होंने कहा—पर्यटकों की सुविधा के लिए तीन गेट बरबसपुर, रवान और बकरीद से सफारी संचालित है। इससे प्रबंधन सुगम हुआ है और सुरक्षा पर बेहतर नियंत्रण संभव हुआ है। पहले सफारी मार्ग लंबा होने से शुल्क अधिक लगता था। अब बरबसपुर से 2500 रुपये में सफारी कराई जा रही है।
डीएफओ ने आगे बताया—सफारी संचालन मुख्य रूप से स्थानीय युवाओं द्वारा किया जाता है। कुछ असामाजिक तत्व निजी वाहन और बाइक से बिना अनुमति अंदर पहुंच जाते थे, इसलिए गेटों को सीमा क्षेत्र तक स्थानांतरित करना पड़ा। अब प्रवेश केवल जिप्सी से ही दिया जा रहा है, जिससे नियंत्रण और निगरानी बेहतर हो सकी है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
बारनवापारा अभयारण्य बलौदाबाजार क्षेत्र में महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र है। यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या से स्थानीय समुदाय को आय के अवसर मिलते हैं, और वन विभाग को भी राजस्व प्राप्त होता है। अभयारण्य में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन प्रबंधन दोनों को ध्यान में रखते हुए मौजूदा नियम लागू किए गए हैं।


