बलौदा बाजार

विश्व स्तनपान सप्ताह जागरुकता कार्यक्रम
09-Aug-2024 3:57 PM
विश्व स्तनपान सप्ताह जागरुकता कार्यक्रम

 ‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

भाटापारा, 9 अगस्त। विश्व स्तनपान दिवस सप्ताह 2024के अवसर पर यूनिसेफ, छत्तीसगढ़ एलायंस फॉर बिहैवियर चेन्ज एवं चिराग सोशल वेलफेयर सोसायटी अम्बिकापुर द्वारा संचालित लक्ष्यगत हस्तक्षेप परियोजना भाटापारा जिला बलौदाबाजार-भाटापारा छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में परियोजना संचालक मंगल पाण्डेय के मार्गदर्शन में तथा परियोजना प्रबंधक दशोदी सिंह के नेतृत्व में स्तनपान के संबंध में महिलाओं एवं बालिकाओं को जागरूक करने के उद्देश्य महासती वार्ड भाटापारा में से विश्व स्तनपान सप्ताह जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

ट्रांजिट माइग्रेंट आउट रीच वर्कर प्रियंका मेश्राम द्वारा स्तनपान क्यों जरूरी है। तथा स्तनपान कराने से शिशु एवं शिशुवती माताओं को क्या- क्या फायदे होते हैं, विस्तृत रूप से जानकारी दिया गया। मां का पहला दूध यानी कोलोस्ट्रोम,पोषक से भरपूर और शिशु के लिए आवश्यक होता है। नवजात को घातक बिमारियों से बचा ने के लिए जन्म के एक घण्टे के भीतर यह दूध पिलाना आवश्यक है। स्तनपान के दौरान मां और शिशु दोनों आक्सीटोसिन नामक हार्मोन का उत्पादन करते हैं जो तनाव एवं चिन्ता को कम करता है और उनके बन्धन को गहरा बनाने में मदद करता है।

शिशु की आंत में स्वस्थ बैक्टीरिया का विकास करने में स्तनपान सहायता करता है,जो जीवन भर के लिए बच्चे का मजबूत इम्यून सिस्टम बनाता है। मां के दूध में एंटीबॉडीज होती है,जो शिशु को उसके आस-पास फैलने वाले संक्रमणों से लडऩे में मदद करती है। शिशु पहले कुछ दिनों तक अधिक स्तनपान करते हैं। शिशु जितना अधिक दूध पीता है, मां का शरीर उतना ही तेजी से दूध का उत्पादन करता है। आउट रीच बिंदेश्वरी टंडन ने अपने उद्बोधन में कहा कि मां का गाढ़ा पीला दूध बच्चे को सभी रोगों से लडऩे की क्षमता प्रदान करता है। ट्रान्जिट माइग्रेंट आउट रीच वर्कर अनिता लहरे मां के दूध में सभी पौष्टिक तत्व समाहित होते हैं। मां के दूध से बच्चों को भरपूर पौष्टिक तत्व मिलता है, जिससे उनका सर्वांगीण विकास होता है। स्तन पान एवं नौकरी दोनों एक साथ किया जा सकता है। शिशुवती माताओं को भी स्तनपान कराने से अनेकों लाभ होते हैं। मां के दूध से बच्चों का सर्वांगीण विकास तो होता ही है साथ ही बच्चों में भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है। कार्यक्रम को सफल बनाने में काउन्सलर सुलोचना देवांगन, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन अधिकारी दशोदा साहू एवं समस्त पीयर एजुकेटरों का सराहनीय योगदान रहा।


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