निक मार्टिन
स्पेसएक्स इतिहास की सबसे बड़ी पब्लिक लिस्टिंग लॉन्च कर रहा है, जिससे इलॉन मस्क की दौलत आसमान की ऊंचाइयों पर पहुंच जाएगी. क्या इस कंपनी की ‘इस दुनिया से परे’ वाली महत्वाकांक्षाएं सचमुच ब्रह्मांड जितनी विशाल हैं.
इलॉन मस्क की एक आदत है- साइंस फिक्शन, यानी किताबों और फिल्मों की काल्पनिक कहानियों को हकीकत में बदलना. बार-बार इस्तेमाल होने वाले रॉकेट से लेकर बिना ड्राइवर के चलने वाली गाड़ियों और इंसानों जैसे दिखने वाले रोबोट तक, इस अरबपति की कंपनियों ने वह सब कर दिखाया है जिसे कभी नामुमकिन माना जाता था. अब, स्पेसएक्स के आईपीओ के जरिए मस्क का इरादा इससे भी बड़े मुकाम हासिल करने का है.
यह कंपनी, जिसने पिछले 24 सालों से खुद को शेयर बाजार से पूरी तरह दूर रखा था, अब जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है. अमेरिकी रेगुलेटर्स को बुधवार को दिए गए सैकड़ों पन्नों के एक दस्तावेज ‘एस1 फाइलिंग' के मुताबिक, स्पेसएक्स नए निवेशकों से करीब 75 अरब डॉलर जुटाने की योजना बना रही है. अगर ऐसा होता है, तो कंपनी की कुल वैल्यू बढ़कर 1.75 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी.
एक ऐसी कंपनी के लिए यह वाकई कोई खराब सौदा नहीं है जो अभी भी घाटे में चल रही है और जिस पर दुनिया के सबसे अमीर इंसान यानी मस्क का ही पूरा कंट्रोल रहेगा.
मंगल ग्रह पर बस्ती बसाने की तैयारी
मस्क सिर्फ यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजकर रुकना नहीं चाहते, उनका इरादा स्पेसएक्स से इससे कहीं ज्यादा करवाने का है. वह एक ऐसा इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना चाहते हैं जिससे पृथ्वी के बाहर भी इंसानी बस्ती बसाई जा सके. मस्क ने खुद कहा है कि उनका असली मकसद मंगल ग्रह पर ऐसे शहर बसाना है जो खुद अपनी जरूरतें पूरी कर सकें और जहां करीब 10 लाख लोग रह सकें.
इस सपने को सच करने के लिए, स्पेसएक्स अपने विशालकाय और दोबारा इस्तेमाल होने वाले स्पेसक्राफ्ट ‘स्टारशिप' की मदद लेगा. उनकी योजना साल 2030 तक मंगल ग्रह पर बिना इंसानों वाली पहली उड़ानें भेजने की है. इस लाल ग्रह की एक तरफ की यात्रा औसतन लगभग 14 करोड़ मील लंबी है, जिसे पूरा करने में छह से नौ महीने का समय लगता है. शुरुआती मिशन में वहां उतरने के सिस्टम का टेस्ट किया जाएगा और बुनियादी चीजें जुटानी शुरू की जाएंगी, जिसके कुछ सालों बाद इंसानों को वहां भेजा जाएगा.
स्पेसएक्स का यह भी सोचना है कि इंसानों को कई ग्रहों पर बसाने के लिए, पृथ्वी के नजदीक मौजूद अन्य खगोलीय पिंडों, जैसे कि चांद या उल्कापिंडों के संसाधनों का इस्तेमाल किया जाए. मस्क का मानना है कि अंतरिक्ष में अपनी कक्षा बदलते हुए घूमने वाले एस्टेरॉयड भविष्य में इंसानों के बहुत काम आ सकते हैं और एक दिन वहां भी खुदाई करके कीमती चीजें निकाली जा सकेंगी.
एस्टेरॉयड पर गुरुत्वाकर्षण न के बराबर होता है, जिसकी वजह से वहां उतरना और कीमती चीजें निकालना बहुत आसान और सस्ता हो जाता है. हालांकि, स्पेस इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का अनुमान है कि बड़े पैमाने पर एस्टेरॉयड से प्लेटिनम, निकेल, सोना और बर्फ (पानी) निकालने का काम 2040 के दशक या उसके बाद ही मुमकिन हो पाएगा. ये सभी चीजें मंगल ग्रह पर जीवन बसाने, घर बनाने और ईंधन तैयार करने के लिए बेहद जरूरी हैं.
हालांकि, इस पूरे सफर का सबसे पहला और जरूरी पड़ाव चांद होगा, जो पृथ्वी से सिर्फ तीन दिन की दूरी पर है. स्पेसएक्स का मानना है कि चांद पर इंसानों के रहने की जगहें, फैक्ट्रियां और फ्यूल स्टेशन बनाए जा सकते हैं. पृथ्वी से भारी मात्रा में सामान अंतरिक्ष में भेजने के मुकाबले, चांद पर ही ये सब तैयार करना कहीं ज्यादा सस्ता पड़ेगा.
मस्क का यह भी मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सामने खड़ी सबसे बड़ी मुश्किलों में से एक का हल अंतरिक्ष में छिपा है. दरअसल, अरबों लोगों के अनुरोध को एक साथ प्रोसेस करने के लिए बड़े-बड़े डेटा सेंटर को भारी मात्रा में बिजली और कूलिंग की जरूरत होती है और स्पेस इस समस्या को दूर कर सकता है.
पृथ्वी पर बिजली की भारी खपत करने वाले ऐसे और डेटा सेंटर बनाने के बजाय, स्पेसएक्स ने एक अनोखा आइडिया सामने रखा है. उसका विचार है कि क्यों न बड़े-बड़े एआई सुपर कंप्यूटर को सैटेलाइट के नेटवर्क पर रखकर सीधे अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया जाए.
अंतरिक्ष में मौजूद ये डेटा सेंटर ऊर्जा के लिए सूरज की असीमित धूप का इस्तेमाल कर सकेंगे और इन्हें ठंडा रखने के लिए स्पेस की जमा देने वाली ठंडक मुफ्त में मिल जाएगी. इससे बड़े पैमाने पर एआई को ट्रेन करना हमारी पृथ्वी के मुकाबले कहीं ज्यादा सस्ता और असरदार हो जाएगा.
क्या मस्क बनेंगे दुनिया के पहले खरबपति?
अगर स्पेसएक्स की महत्वाकांक्षाएं पहले ही अविश्वसनीय प्रतीत नहीं हो रही हैं, तो रुकिए! इस आईपीओ के जरिए दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति मस्क को जिस मुकाम पर पहुंचाने की तैयारी है, वो तो सचमुच अविश्वसनीय है.
फिलहाल, स्पेसएक्स में मस्क की हिस्सेदारी करीब 42 फीसदी मानी जाती है. अगर कंपनी की वैल्यू 1.75 खरब डॉलर के तय लक्ष्य तक पहुंच जाती है, तो सिर्फ उनका यह शेयर ही लगभग 735 अरब डॉलर का हो जाएगा. टेस्ला, एक्सएआई और उनके बाकी कारोबार की संपत्ति को भी इसमें जोड़ दें, तो इस आईपीओ के बाद मस्क की कुल नेटवर्थ 1 ट्रिलियन डॉलर यानी 1 खरब डॉलर के आंकड़े को पार कर जाएगी. इस तरह वह इतिहास के पहले ट्रिलियनेयर यानी खरबपति बन जाएंगे.
शेयरों के एक खास किस्म के सिस्टम (डुअल-क्लास शेयर स्ट्रक्चर) की वजह से मस्क के पास कंपनी के 80 फीसदी से भी ज्यादा वोटिंग राइट्स हैं, भले ही स्पेसएक्स की कुल संपत्ति में उनका मालिकाना हिस्सा काफी कम हो. इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उन्हें सीईओ के पद से हटाना लगभग नामुमकिन हो जाता है. इससे उन्हें कम समय के लिए मुनाफा ढूंढने वाले निवेशकों या दखल देने वाले शेयरधारकों के दबाव के बिना, मंगल मिशन जैसे लंबे और भारी जोखिम वाले प्रोजेक्ट पर खुलकर काम करने की पूरी आजादी मिलती है.
मस्क के इस सख्त नियंत्रण पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं. सबसे ज्यादा विवाद उनकी कंपनी ‘टेस्ला' में हुआ था, जहां शेयरधारकों ने उनके भारी-भरकम सैलरी पैकेज और निजी हितों के टकराव को लेकर अदालत में मुकदमा दायर कर दिया था. उनका आरोप था कि कंपनी का बोर्ड मस्क के सामने पूरी तरह आजाद नहीं है. कुछ ऐसी ही चिंताएं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स' पर उनके नियंत्रण को लेकर भी उठी हैं, जहां बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को नौकरी से निकालने और रणनीतिक बदलाव जैसे सारे फैसले अकेले मस्क ने ही लिए थे.
इस धमाकेदार लिस्टिंग से कंपनी के शुरुआती निवेशकों और बड़े अधिकारियों की भी लॉटरी लगने वाली है. फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, स्पेसएक्स की प्रेसिडेंट ग्विन शॉटवेल और सीएफओ ब्रेट जॉनसन के शेयरों की कीमत 1 अरब डॉलर के पार चली जाएगी. वहीं, कंपनी के पुराने निवेशक एंटोनियो ग्रेसियास के पास 70 अरब डॉलर या उससे भी ज्यादा की दौलत हो सकती है. जबकि, पेपाल के को-फाउंडर ल्यूक नोसेक की हिस्सेदारी की वैल्यू लगभग 5 अरब डॉलर पहुंच जाएगी.
वॉल स्ट्रीट का सबसे बड़ा दांव
वॉल स्ट्रीट (अमेरिकी शेयर बाजार) इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ के लिए पूरी तरह कमर कस चुका है. दुनिया का मशहूर इन्वेस्टमेंट बैंक ‘गोल्डमैन सैक्स' इस पूरे मामले को संभालने और आगे बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहा है.
अगर स्पेसएक्स इस आईपीओ से 75 अरब डॉलर का फंड जुटाने में कामयाब हो जाता है, तो यह सऊदी अरामको के 2019 वाले 29.4 अरब डॉलर के पिछले रिकॉर्ड से करीब तीन गुना ज्यादा होगा. उससे पहले, साल 2014 में चीन की कंपनी अलीबाबा ने अमेरिकी शेयर बाजार में कदम रखकर 22 अरब डॉलर जुटाए थे, जो उस समय का सबसे बड़ा रिकॉर्ड था.
अगर स्पेसएक्स की वैल्यू 1.75 खरब डॉलर हो जाती है, तो यह दुनिया की टॉप 10 सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हो जाएगी. फिर इसका नाम भी एनवीडिया, एप्पल, गूगल (अल्फाबेट) और माइक्रोसॉफ्ट जैसे बड़े दिग्गजों के साथ लिया जाने लगेगा.
निवेशकों के लिए यह एक बहुत बड़ा जुआ होगा, क्योंकि स्पेसएक्स अभी भी भारी घाटे में चल रही है. स्टारशिप रॉकेट बनाने, अंतरिक्ष में सैटेलाइट का जाल बिछाने और एआई संसाधनों को तैयार करने में हुए भारी खर्च के कारण, कंपनी को साल 2025 में 4.94 अरब डॉलर का भारी नुकसान हुआ था.
अंतरिक्ष में काम करने के भारी खतरों और तेजी से बढ़ती एआई तकनीक को देखते हुए, आईपीओ के दस्तावेजों में उन असली खतरों को साफ-साफ बताया गया है जिनका सामना स्पेसएक्स को करना पड़ रहा है. इनमें ‘अंतरिक्ष से जुड़े कई अनोखे जोखिम' शामिल हैं, जैसे ‘सूरज और ब्रह्मांड से निकलने वाला खतरनाक रेडिएशन, अंतरिक्ष का तैरता हुआ कचरा और छोटे उल्कापिंड', और यहां तक कि ‘इंसानों को गंभीर चोट लगना या उनकी मौत होना' भी.
20 मई को जमा किए गए दस्तावेजों में यह चेतावनी भी दी गई है: "हमारा इतिहास लगातार घाटे में रहने का रहा है और हो सकता है कि हम आने वाले समय में भी मुनाफा न कमा पाएं.”
कंपनी की इस आसमान छूती वैल्यू को देखकर कुछ विश्लेषक यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि क्या स्पेसएक्स के ये सपने वाकई सच हो सकते हैं या फिर सिर्फ ख्याली पुलाव हैं. यह बहस अगले महीने नैस्डैक शेयर बाजार में इसके शेयरों की ट्रेडिंग शुरू होने के बाद और ज्यादा तेज हो जाएगी.