अंतरराष्ट्रीय
रूस के हमले ने नाटो को एकजुट करने के साथ ही उस पर यूक्रेन के साथ खड़े होने और भरोसा पैदा करने का भारी दबाव पैदा कर दिया है. टेरी शुल्त्स बता रहे हैं कि गठबंधन आगे की परिस्थितियों के लिए कैसे खुद को तैयार कर रहा है.
डॉयचे वैले पर टेरी शुल्स की रिपोर्ट-
अमेरिकी खुफिया एजेंसी के पूर्व निदेशक डेविड पेट्रियस ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए कहा है, "शीत युद्ध खत्म होने के बाद वह नाटो के लिए सबसे बड़ा तोहफा रहे हैं." डीडब्ल्यू से बातचीत में पेट्रियस ने कहा, "वह रूस को फिर से महान बनाना चाहते हैं लेकिन वास्तव में उन्होंने अपने कामों से नाटो को फिर से महान बना दिया है." पेट्रियस का कहना है, "उस खतरे ने नाटो को इस तरह से एकजुट कर दिया है जैसा (बर्लिन की) दीवार गिरने, वॉरसॉ संधि और सोवियत संघ के विघटन के बाद कभी नहीं रहा."
30 सदस्यों वाला संगठन अगर इस खतरे से लाभ का आकलन कर रहा है तो इसके साथ ही वह यह हिसाब लगाने में भी जुटा है कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद उसका जवाब क्या होगा. अमेरिका ने इसे युद्ध छेड़ना कहा है. नाटो के लिए गैरसदस्य सहयोगी की रक्षा के लिए सेना भेजना जरूरी नहीं है. हालांकि सहयोगी देश यह नैतिक जिम्मेदारी मानते हैं कि यूक्रेन की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा हो. अब तक किसी देश ने अपने सैनिक यूक्रेन की रक्षा में भेजने की बात नहीं की है तो इसका मतलब है कि यह काम दूर रह कर करने की कोशिश की जाएगी.
मदद के लिए उठाए गए कदम
जब सहयोग के क्षेत्र की बात उठी तो नाटो के महासचिव येंस स्टोल्टेनबर्ग ने जोर दे कर कहा कि मदद के लिए कई कदम उठाए गए हैं, "हम ने 100 से ज्यादा जेट को हाई अलर्ट पर रखा है और सागर में सहयोगी देशों के 120 से ज्यादा जहाज मौजूद हैं." मंगलवार को स्टोल्टेनबर्ग ने कहा, "उत्तर के ऊंचाई वाले इलाके से लेकर भूमध्यसागर तक. हम अपने सहयोगी को आक्रमण से बचाने के लिए जो भी जरूरी होगा, करना जारी रखेंगे."
यूक्रेन के अलगाववादी इलाके डोनेत्स्क और लुहांस्क को मान्यता देने के बाद अब पुतिन ने वहां अपनी फौज भी भेज दी है. पहले से ही इसकी आशंका को देखते हुए अमेरिका ने बाल्टिक सागर में अपने सैनिकों की मौजूदगी बीते हफ्तों में बढ़ा दी है.
विदेश मामलों की यूरोपीय परिषद के सीनियर फेलो कादरी लीक ने इस कदम का स्वागत किया है. यूक्रेन में फौज भेजने के पुतिन के आदेश से पहले डीडब्ल्यू से बातचीत में लीक ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि बाल्टिक देशों को फिलहाल सीधे कोई खतरा है. हालांकि हालात थोड़े अनिश्चित हैं. अगर हम आने वाले दिनों और हफ्तों में यूक्रेन में कोई बड़ी जंग देखते हैं तो निश्चित रूप से आस पास के देशों में हालात बहुत तनावपूर्ण होंगे और इसके साथ ही सभी मोर्चों पर आकस्मिक टकराव और गलतफहमी का खतरा भी बढ़ जाएगा."
"ताकत है तो दिखाओ"
नाटो की पूर्वी शाखा में कौन किस तरह से सहयोग करेगा यह मोटे तौर पर देशों को खुद ही तय करना है. सारे देश यह नहीं सोचते कि गठबंधन संयुक्त रूप से संसाधनों को बढ़ा देगा. नाटो के पूर्व अमेरिकी राजदूत डोग लुटे हैरानी से पूछते हैं, "वीजेटीएफ (वेरी हाई रेडिनेस ज्वाइंट टास्क फोर्स) कहां है?" वीजेटीएफ नाटो के रिस्पांस फोर्स का एक अंग है जिसमें नाटो के 40,000 सैनिकों की त्वरित कार्रवाई क्षमता का करीब आधा हिस्सा शामिल है. लुटे कहते हैं, "अगर यह अगुआ है तो अब अगुआ बनने का समय आ गया है." नाटो के महासचिव ने इसे अगुआ कहा था और लुटे ने उसी ओर इशारा किया.
अमेरिकी सेना के थ्री स्टार जनरल लुटे रिटायर हो चुके हैं और उन्होंने अमेरिका के इराक और अफगानिस्तान के लिए उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की जिम्मेदारी भी संभाली है. लुटे का मानना है कि नाटो को तुरंत अपनी फौजें इकट्ठा करनी चाहिए जिसमें जमीन, हवा और समुद्री सैनिक और साजो सामान के साथ ही स्पेशल ऑपरेशन के दल भी शामिल हों. लुटे ने कहा कि यह यूरोप में किसी भी जगह तैयार किया जा सकता है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत तैनात किया जा सके. लुटे का कहना है, "अगर आपके पास ऐसी ताकत है और इस तरह के मौके जो कि पीढ़ियों का संकट है...उसमें आप उसका इस्तेमाल या कम से कम प्रदर्शन नहीं करते तो वास्तव में आपके पास वह ताकत नहीं है."
साइबरस्पेस पर खतरा
यूक्रेन पर हमले का विस्तार साइबर हमलों तक जा सकता है. हाल के दिनों में यूक्रेन लगातार इसका सामना कर रहा है और इसके खिलाफ नाटो यूक्रेन के साथ मिल कर सालों से काम कर रहा है. सूफान सेंटर में रिसर्च निदेशक कोलिन क्लार्क जोर दे कर कहते हैं कि ऐसा लचीलापन विकसित करना जरूरी है. क्लार्क का कहना है, "मेरे ख्याल से इस वक्त यूक्रेन के लिए प्राथमिकता इस बात को दी जानी चाहिए कि वो ऐसे क्षेत्रों की पहचान करें जहां रूसी साइबर हमला कर सकते हैं. टीयर 1 के लक्ष्यों खासतौर से अहम बुनियादी ढांचे के लिए सक्रिय साइबर सुरक्षा पर अतिरिक्त ध्यान देना चाहिए.
क्लार्क का कहना है कि साइबर हमलों को अकसर सैन्य गतिविधियों से अलग करके देखा जाता है. क्लार्क के मुताबिक, "यूक्रेन को रूस की क्षमताओं को व्यापक रूप में समझना चाहिए, जिसमें मास्को के हाथ में मौजूद कई हथियारों में एक साइबर है." इसके साथ ही क्लार्क ने "सूचना के संग्राम" को भी रूस के लिए बेहद फायदेमंद माना. उन्होंने यूक्रेन की सरकार से आग्रह किया है कि वह अपने लोगों को याद दिलाएं कि आने वाले दिनों और हफ्तों में रूस की ओर से फैलाई जाने वाली गलत जानकारियों, अफवाहों से बिल्कुल सतर्क रहना है.
नाटो फिलहाल कर क्या सकता है?
बुधवार को यूक्रेन के करीबी यूरोपीय संघ और नाटो के पड़ोसियों लिथुआनिया और पोलैंड ने और करीब लाने के लिए अपील की है. इसके तह इन देशों ने यूक्रेन को यूरोपीय संघ के उम्मीदवार का दर्जा तुरंत देने की मांग की है. त्रिपक्षीय बयान जारी कर इन देशों ने कहा है "संघ के लिए करार और आंतरिक सुधारों को लागू करने की प्रक्रिया में हुई अहम प्रगति के साथ ही सुरक्षा की मौजुदा चुनौतियों को देखते हुए यूक्रेन यूरोपीय संघ के उम्मीदवार का दर्जा हासिल करने की योग्यता रखता है और रिपब्लिक ऑफ पोलैंड के साथ ही रिपब्लिक ऑफ लिथुआनिया इस लक्ष्य को हासिल करने में यूक्रेन का साथ देंगे."
हालांकि इसी वक्त कुछ जानकार यह भी कह रहे है यूक्रेन के लोग नाटो की सदस्यता की उम्मीदें छोड़ने की पुतिन की मांग के आगे झुकने के बारे में भी सोच रहे हैं. ब्रिटेन में यूक्रेन के राजदूत ने बीबीसी को हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में इस बारे में बात भी की थी हालांकि वो जल्दी ही इस बयान से पीछे हट गए. वाशिंगटन की अटलांटिक परिषद के सीनियर फेलो मिषाएल बोकिरोकिउ का कहना है कि यह बयान आकस्मिक नहीं था. उनका कहना है, "मेरा ख्याल में (यूक्रेनी अधिकारी) यह विचार पेश कर रहे थे" और उन्होंने यह भी कहा कि कहा कि उनकी कुछ लोगों से बात हुई है जो कहते हैं, "अगर युद्ध से बचने का यही तरीका है तो शायद हमें यही करना चाहिए." बोकिरोकिउ का कहना है कि यूक्रेन इस पर तभी गंभीरता से विचार करेगा कि जब नाटो खुद ही इसके लिए दबाव बनाए. (dw.com)
गुरुवार सवेरे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के ख़िलाफ़ विशेष सैन्य अभियान की घोषणा की थी. इसके बाद रूसी सेना कई तरफ से यूक्रेन की ओर बढ़ने लगी.
रूस और यूक्रेन के बीच इस समय हालात काफ़ी अस्पष्ट हैं और स्थितियां तेज़ी से बदल रही हैं.
अब तक जो जानकारी उपलब्ध है -
- गुरुवार सवेरे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान का आदेश देने के बीद तीन तरफ से रूसी सेनाएं यूक्रेन की ओर बढ़ने लगीं. अब तक मिली जानकारी के अनुसार सबसे अधिक संघर्ष की ख़बरें यूक्रेन के पूर्वी हिस्से से मिल रही हैं.
- यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेन्स्की ने कहा है कि रूसी सेना के हमले के पहले दिन यूक्रेन में 137 नागरिकों की मौत हुई है. इनमें सैनिक और आम नागरिक शामिल हैं.
- यूक्रेन सीमा रक्षक सेवा (डीपीएसए) ने कहा है कि 18 से 60 साल के यूक्रेन के सभी पुरुषों के देश छोड़ कर जाने पर पाबंदी लगा दी गई है. ये अस्थायी रोक मॉर्शल लॉ लागू रहने तक लागू रहेगी.
- अमेरिका और ब्रिटेन ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है. दोनों ने रूस की मदद करने के लिए बेलारूस पर भी प्रतिबंध लगाए हैं.
- अमेरिका ने कहा, डॉलर में बिज़नेस करने की रूस की क्षमता को सीमित किया जाएगा. साथ ही रूसी बैंकों पर भी पाबंदिया लगाई जाएंगी.
- दुनिया की सात बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के संगठन जी7 देशों के नेताओं में सहमति बनी है कि वो डॉलर, यूरो, पाउंड और येन में बिज़नेस करने की रूस की क्षमता को सीमित करेंगे.
- यूरोपीय संघ के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि वह रूसी संपत्तियों को फ़्रीज़ करेंगे और यूरोपीय वित्तीय बाज़ारों में उसके बैंकों की पहुंच रोकेंगे.
- जो बाइडन ने कहा कि अमेरिकी सेना यूक्रेन में नहीं लड़ेगी, लेकिन नेटो के सदस्य देशों की रक्षा करेगी. नेटो के हज़ारों सैनिकों को पूर्वी यूरोप के संगठन के सदस्य देशों- लात्विया, इस्टोनिया, लिथुआनिया, पोलैंड और रोमानिया में तैनात किया गया है.
- यूरोपीय संघ के महासचिव जेंस स्टॉल्टनबर्ग ने बताया है कि नेटो ने अपने पूर्वी छोर पर 100 लड़ाकू विमानों को अलर्ट पर रखा है. हालांकि, नेटो ने कहा है कि उसकी यूक्रेन में सैन्य टुकड़ियां भेजने की योजना नहीं है.
- चेर्नोबिल के आसपास रूस और यूक्रेन की सेना के बीच जंग की ख़बरों के बीच अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी IAEA ने कहा है कि परमाणु ठिकानों की सुरक्षा को लेकर 'अत्यधिक संयम' बरतने की ज़रूरत है. एजेंसी ने कहा कि यूक्रेन ने उन्हें बताया है कि चेर्नोबिल के परमाणु केंद्र पर रूस ने कब्ज़ा कर लिया है.
- यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खारक़ीएफ़ में स्थानीय लोगों ने बताया है कि यूक्रेन और रूसी सेना के बीच लगातार गोलाबारी से बहुमंजिला इमारतों में खिड़कियां कांप रही हैं.
- रूस ने यूक्रेन के सैन्य अड्डों से लेकर एयरपोर्ट पर हवाई हमले किए हैं. यूक्रेन की सेना ने दावा किया है कि उसने छह रूसी लड़ाकू विमानों को मार गिराया है. हालांकि, रूस ने दावा किया है कि उसने 70 सैन्य निशानों को नष्ट कर दिया है.
- यूक्रेन में कई लोग शरण लेने के लिए बड़े शहरों को छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. इसी कोशिश में हज़ारों लोग कीएफ़ छोड़ रहे हैं.
- यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने देशवासियों से कहा है कि वे देश की रक्षा करने के लिए तैयार रहें और उन्होंने हर इच्छुक व्यक्ति को हथियार देने का आश्वासन दिया है.
- रूस ने कहा है कि ये सैन्य अभियान कब तक चलेगा, ये इस पर निर्भर करता है कि ये कैसे आगे बढ़ता है, और उसे कीएफ़ की सैन्य क्षमताओं को ख़त्म कर देना चाहिए.
- पुतिन ने यूक्रेन पर हमले के फ़ैसले को सही ठहराते हुए कहा कि रूस की सुरक्षा के लिए उनके पास इसके सिवाय कोई और विकल्प नहीं था.
24 फ़रवरी का घटनाक्रम
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आदेश पर रूस ने दक्षिण के अपने पड़ोसी देश यूक्रेन पर बड़े स्तर पर सैन्य हमला शुरू कर दिया.
रिपोर्ट ये आ रही हैं कि रूस अपने हमले में यूक्रेन के समूचे सैन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बना रहा है. साथ ही रूसी सेना सभी संभव दिशाओं से यूक्रेन में घुस रही है.
अब तक हमें यूक्रेन पर रूस के इस हमले के बारे में जो कुछ भी पता है उसे हम यहां बता रहे हैं. पढ़ें-
पुतिन ने हमले का आदेश दिया
सबसे पहले गुरुवार (24 फ़रवरी 2022) को तड़के टीवी पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एक बयान प्रसारित हुआ. जिसमें उन्होंने यूक्रेन के पूर्वी डोनबास इलाक़े में 'सैन्य कार्रवाई' की घोषणा की. यहां रूसी भाषा बोलने वाले कई यूक्रेनी रहते हैं. इस इलाके कुछ हिस्सों पर 2014 से ही रूसी समर्थित विद्रोहियों का क़ब्ज़ा है.
पुतिन के इस बयान के प्रसारित होने के थोड़ी ही देर बाद यूक्रेन के सैन्य ठिकानों पर हमले की ख़बर आने लगी.
पुतिन ने इस बयान में कहा कि रूस की यूक्रेन पर क़ब्ज़ा करने की कोई योजना नहीं थी, लेकिन ये कार्रवाई आत्मरक्षा में की जा रही है.
पुतिन ने अपने संबोधन में पूर्वी यूक्रेन में तैनात यूक्रेनी सैनिकों से आग्रह किया कि वो हथियार डाल दें और अपने घरों को लौट जाएँ.
साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि रूस के हमले के दौरान किसी भी बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप को तत्काल जवाब दिया जाएगा और आक्रमण को नष्ट कर दिया जाएगा.
समूचे देश में धमाकों की आवाज़ें सुनाई दीं
बीबीसी संवाददाता ने राजधानी कीएफ़ में और पूर्वी यूक्रेन में दोनेत्स्क के क्रामातोर्स्क इलाके में ज़ोरदार धमाकों की आवाज़ें सुनी.
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने हमले की जानकारी देते हुए राष्ट्र के नाम एक वीडियो संदेश में कहा कि पुतिन ने यूक्रेन के ख़िलाफ़ पूरी तरह से चढ़ाई कर दी है. उन्होंने कहा कि रूस ने यूक्रेन के बुनियादी ढांचों पर मिसाइलें दागी है और बॉर्डर गार्ड पर भी हमले किए हैं.
हालांकि रूस के रक्षा मंत्रालय ने यूक्रेन के शहरों पर हमले से यह कहते हुए इनकार किया कि- वो सैन्य बुनियादी ढांचों, एयर डिफेंस और एयर फोर्स पर अपने उच्चस्तरीय सटीक हथियारों से हमले कर रहा है.
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में बताया कि पूरे यूक्रेन में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया है.
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा, "कोई दहशत नहीं है. हम मज़बूत हैं. हर बात के लिए तैयार हैं. हम हर किसी को हराएँगे, क्योंकि हम यूक्रेनी हैं."
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि रूस की कार्रवाई यूक्रेन की अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि हमारी सीमाएं अभी भी पहले जैसी ही हैं और बनी रहेंगी क्योंकि रूस के बयानों से कोई फ़र्क नहीं पड़ता है.
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने इससे पहले लड़ाई रोकने की कोशिश करते हुए चेतावनी दी थी कि रूस यूरोप में एक "बड़ी लड़ाई शुरू कर सकता है".
उन्होंने साथ ही रूस के नागरिकों से आग्रह किया था कि वो रूस के इस क़दम का विरोध करें.
हमले कहाँ हुए हैं
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने अपने वीडियो बयान में यह विस्तार से बताया कि रूस ने यूक्रेनी सेना के बुनियादी ढाँचे और उनकी सीमा पर तैनात यूनिटों समेत हमला कहां कहां किया है.
अधिकारियों ने कहा है कि यूक्रेन की राजधानी कीएफ़ के अलावा निप्रो और खार्कीव में सेना मुख्यालयों, हवाई पट्टियों और सैन्य वेयरहाउसों पर हमले हुए हैं.
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा है कि रूस ने उनकी सीमा पर लगभग दो लाख सैनिकों और हज़ारों बख़्तरबंद गाड़ियों को तैनात कर रखा है.
टैंक और सेना यूक्रेन में घुसी
यूक्रेन ने बताया कि उसके पूर्वी, दक्षिण और उत्तर सीमाओं से टैंक और सेना घुस रही है.
यूक्रेन के बॉर्डर गार्ड सर्विस (डीपीएसयू) ने बताया कि रूस का सैन्य दस्ता बेलारूस से यूक्रेन के उत्तरी चेर्निहाइव इलाके में और रूस से सुमी क्षेत्र घुस गया है.
बेलारूस लंबे समय से रूस का सहयोगी रहा है. विश्लेषकों इसे रूस का 'क्लाइंट देश' बताते हैं.
लुहांस्क और खार्विक के साथ ही क्राइमिया के खेरसन क्षेत्र में भी रूसी सैन्य दस्ता पहुंच गया है.
डीपीएसयू ने बताया कि रूस ने सबसे पहले अपने टैंक से हमले किए जिसमें बॉर्डर गार्ड्स जख़्मी हुए हैं.
एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि दक्षिण बंदरगाह शहर ओडेसा के पास भी ट्रूप मूवमेंट की रिपोर्ट्स आई हैं.
मौत की ख़बरें
यूक्रेनी पुलिस का कहना है कि रूसी सेना के हमले में कम से कम आठ लोग मारे गए हैं.
अधिकारियों का कहना है कि ओडेसा शहर के बाहरी इलाके पोडिल्स्क में एक सैन्य यूनिट पर हमले में छह लोगों की मौत और सात घायल हुए हैं. वहीं 19 लोग लापता हैं.
यूक्रेन में स्थिति कैसी है?
यूक्रेनी सेना ने एक बयान में "लोगों से शांत रहने और यूक्रेन की डिफेंस में भरोसा रखने" को कहा है.
यूक्रेन की सेना का कहना है कि उसने रूस के पांच विमानों और एक हेलिकॉप्टर को मार गिराया है.
हालांकि रूसी रक्षा मंत्रालय ने इस बात से इनकार किया है कि उसका कोई एयरक्राफ्ट मार गिराया गया है.
यूक्रेन ने देश में मार्शल लॉ की घोषणा की है, जिसका मतलब ये है कि कुछ समय के लिए नियंत्रण सेना ने हाथों में है. साथ ही उसने रूस के साथ सभी कूटनीतिक संबंध भी तोड़ दिए हैं.
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने रूस की जनता से इस हमले का विरोध करने का अनुरोध किया है. साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि यूक्रेन में हथियार बांटा जाएगा, जो भी उसे चाहता है ले सकता है.
इस बीच विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने पूरी दुनिया भर के देशों से रूस पर अंतरराष्ट्रीय स्विफ्ट बैंक ट्रांसफर सिस्टम पर प्रतिबंध समेत कड़े प्रतिबंधों को लगाने की मांग की है.
यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में तनाव, अनिश्चितता और डर का माहौल है. लोगों के चेहरों पर डर और घबराहट नज़र आ रही है. दोनेत्स्क क्षेत्र के कोस्तियनत्यानिवका कस्बे में पेट्रोल पंप से लेकर एटीएम मशीनों पर लोगों की भीड़ देखी जा रही है.
क्या है अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
यूक्रेन के पश्चिम के सहयोगी देशों ने पहले ही लगातार चेतावनी दी थी कि रूस हमले के लिए तैयार है.
हमले की ख़बर आने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि वह अपने सहयोगियों के साथ निर्णायक जवाब देंगे. उन्होंने कहा है कि रूस ने यूक्रेन पर बेवजह हमला किया है.
बाइडन ने कहा, ''राष्ट्रपति पुतिन ने पूर्वनियोजित युद्ध को चुना है और इससे लोगों की जान और मानवता का भारी नुकस़ान होगा. दुनिया रूस की जवाबदेही तय करेगी.''
वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि वो "यूक्रेन की भयानक घटनाओं से व्यथित" हैं और राष्ट्रपति पुतिन ने "बिना उकसावे के हमला बोलकर ख़ूनख़राबे और तबाही का रास्ता चुना है".
ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति से बात कर चर्चा की है कि इसका क्या जवाब दिया जाए और साथ ही वादा किया है
23 फ़रवरीः यूक्रेन के दो प्रांतों को मान्यता
रूस ने यूक्रेन में सैन्य अभियान पूर्वी यूरोप के दो अलगाववादी प्रांतों दोनेत्स्क और लुहान्स्क को मान्यता देने के एक दिन बाद किया. इन प्रांतों ने स्वयं को गणराज्य घोषित कर दिया है.
इससे पहले रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने 21 फ़रवरी की रात को टेलीविज़न पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि रूसी सेनाएं पूर्वी यूरोप में दाखिल होंगी और वे अलगाववादी क्षेत्रों में शांति स्थापित करने की दिशा में काम करेंगी.
राष्ट्रपति के शासनादेश के मुताबिक़ रूसी सेनाएं लुहान्स्क और दोनेत्स्क में शांति कायम करने का काम करेंगी.
दोनेत्स्क और लुहान्स्क पर रूस समर्थित अलगाववादियों का नियंत्रण है.
रूस के राष्ट्रपति ने दावा किया कि यूक्रेन का एक असल राष्ट्र होने का कोई इतिहास नहीं है और आधुनिक यूक्रेन का जो स्वरूप है वो रूस का बनाया हुआ है.
रूस-यूक्रेन संकट
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक
रूस के राष्ट्रपति पुतिन की घोषणा के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक आपातकालीन बैठक की. यह बैठक कई देशों के अनुरोध के बाद की गयी.
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफ़ील्ड ने पूर्वी यूक्रेन में विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले दो इलाक़ों को रूस के मान्यता देने की कड़ी निंदा की और चेतावनी दी कि इसके नतीजे पूरे यूक्रेन, यूरोप और दुनिया को भुगतने पड़ सकते हैं.
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि रूस के राष्ट्रपति ने मिंस्क समझौते की धज्जियां उड़ा दी हैं और अमेरिका को नहीं लगता कि रूस यहीं रुकेगा.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में चीन ने कहा कि सभी पक्षों को संयम बरतते हुए आगे का सोचना चाहिए. चीन की ओर से कहा गया है कि ऐसी किसी भी कार्रवाई से परहेज़ करना चाहिए जिससे यह संकट और उग्र रूप ले ले. चीन की ओर से सुरक्षा परिषद में मौजूद राजदूत झांग जून ने कहा कि चीन राजनयिक समाधान के लिए किए जा रहे हर प्रयास का समर्थन करता है.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि भारत यूक्रेन से संबंधित घटनाओं पर नज़र रखे हुए है. उन्होंने कहा- यूक्रेन की पूर्वी सीमा पर चल रहे घटनाक्रम और रूस की ओर से की गई घोषणा पर भारत की नज़र है.
वहीं तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने यूक्रेन को लेकर रूस के ताज़ा क़दम को अस्वीकार्य कहा है. उन्होंने कहा है कि इस मामले में सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय क़ानून का सम्मान करना चाहिए.
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन में सेना भेजने के आदेश को 'जीनियस' बताया है.
रूस पर पाबंदियां
पूर्वी यूक्रेन में सेना भेजने के रूस के एलान के बाद यूक्रेन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए रूस पर कठोर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की थी.
अमेरिका समेत कई देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं.
इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की ओर से दो वित्तीय संस्थाओं, वीईबी और रूसी मिलिट्री बैंक के ख़िलाफ़ लगाया गया प्रतिबंध सबसे ताज़ा है.
साथ ही बाइडन ने ये भी कहा कि रूसी अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्सों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था से हटाया जा रहा है. साथ ही रूस के उच्च वर्ग और उनके परिवारों पर भी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने रूस के पाँच बैंकों और तीन अरबपतियों के ख़िलाफ़ पाबंदियों की घोषणा की है.
बोरिस जॉनसन ने कहा है कि रूस के जिन तीन अरबपतियों पर पाबंदी लगाई गई है, ब्रिटेन में उनकी संपत्ति फ़्रीज की जा रही है और उन्हें ब्रिटेन आने से रोका जाएगा.
जिन बैंकों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, वे हैं रोसिया, आईएस बैंक, जनरल बैंक, प्रॉमस्व्याज़ बैंक और ब्लैक सी बैंक. वहीं जिन तीन प्रभावशाली शख़्सियतों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, वो गेनेडी टिमचेंको, बोरिस रोटेनबर्ग और आइगर रोटेनबर्ग हैं.
पीएम जॉनसन ने कहा कि अगर स्थिति और बिगड़ती है तो नए प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं.
जर्मनी ने रूस के साथ नॉर्ड स्ट्रीम2 गैस पाइपलाइन को शुरू करने की प्रक्रिया रोक दी है. इस पाइपलाइन के ज़रिए जर्मनी में रूस से गैस पहुंचने वाली थी.
यूक्रेन संकट के ख़िलाफ़ क़दम उठाते हुए जर्मनी के चांसलर ओलाफ़ शल्ट्स ने बर्लिन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि यूक्रेन में रूस ने जो क़दम उठाए हैं, उसके जवाब में उनकी सरकार ये कार्रवाई कर रही है.
यूरोपीय संघ ने एकमत से अपने पहले उपायों पर सहमति व्यक्त की है जिसमें रूस की संसद के उन सदस्यों को लक्ष्य बनाना शामिल है जिन्होंने यूक्रेन पर अपनी सहमित जताई है.
रूसी बैंकों और ईयू के वित्तीय बाज़ारों तक पहुंच को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है. लेकिन अब तक लगाए गए प्रतिबंध हमले की स्थिति वाले डर से कम हैं.
दूसरे देशों की अपने नागरिकों को लेकर चिंता
यूक्रेन में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें वापस लाने के लिए एयर इंडिया का एक विशेष विमान कल यानी 22 फ़रवरी को यूक्रेन रवाना हुआ.
एयर इंडिया भारत-यूक्रेन के बीच तीन विमानों को संचालित करेगा.
एक विमान 22 फ़रवरी को 242 यात्रियों को लेकर लौट आया है. वहीं दूसरे विमान के 24 फ़रवरी और तीसरे विमान के 26 फ़रवरी को यूक्रेन जाने की बात थी लेकिन 24 तारीख़ को यूक्रेन जा रहा एयर इंडिया का विमान रूसी हमले के बाद बीच से वापस लौट आया क्योंकि यूक्रेन स्टेट एयर ट्रैफिक सेवा ने अपने देश के हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया. उसने अगले 14 दिनों के लिए यूक्रेन जाने और यूक्रेन से आने वाली सभी उड़ानों को रद्द कर दिया है.
अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने यूक्रेन में अपने दूतावास के अधिकारियों और स्टाफ़ को पोलैंड जाने के लिए कहा है. सुरक्षा कारणों के तहत दोनों देशों की ओर से यह बयान जारी किया गया.
इसके साथ ही रूस ने भी यूक्रेन से अपने राजनयिक कर्मचारियों को निकालने का निर्णय लिया है. रूस के विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी है.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि, "रूसी राजनयिकों, दूतावासों और कान्सुलेट जनरल के कर्मचारियों की देखभाल करना हमारी पहली प्राथमिकता है."
साथ ही अपने बयान में रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा का वो बहुत जल्दी ही इसकी शुरुआत करेगा.
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
यूक्रेन और रूस में बढ़ते तनाव के बीच एशियाई शेयर बाज़ार में भारी गिरावट देखी गयी. इससे एक बार फिर से मंदी से उबरती अर्थव्यवस्थाओं को झटका लग सकता है. मंगलवार को जापान के निक्केई 225 सूचकांक में दो फ़ीसदी की गिरावट आई. वहीं दक्षिण कोरिया के कोस्पी में भी बाज़ार खुलते ही 1.4% की गिरावट देखी गयी.
पूर्वी यूरोप में बढ़ते तनाव के कारण तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी होगी और सप्लाई चेन भी बुरी तरह से प्रभावित होगा.
22 फ़रवरी को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत सात साल से सबसे ऊँचे स्तर प्रति बैरल 97.44 डॉलर पर पहुँच गई.
इसके बाद ऐसी आशंका जताई जा रही है कि दुनिया भर में तेल का सप्लाई चेन प्रभावित हो सकता है. रूस सऊदी अरब के बाद तेल निर्यात करने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है. रूस प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा उत्पादक भी है.
नेटो की तैनाती
यूक्रेन पर पैदा हुई नई स्थिति को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में अमेरिकी सेना की तैनाती नेटो देशों में करने की बात कही थी.
उनके संबोधन के बाद पेंटागन ने यह पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना बाल्टिक क्षेत्र में जाएगी.
अमेरिकी रक्षा विभाग ने बताया कि क़रीब 800 पैदल सैनिकों को इटली से बाल्टिक क्षेत्र में तैनात किया जाएगा.
इसके साथ ही वह नेटो के पूर्वी हिस्से में आठ F-35 लड़ाकू जेट की तैनाती भी करेगा.
रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो भारत पर क्या असर होगा?
रूस-यूक्रेन संकट: नेटो ने पूर्वी यूरोप में भेजे और युद्धक पोत, लड़ाकू विमान
हंगरी ने घोषणा की है कि वो यूक्रेन से लगी अपनी सीमा पर सैनिकों को तैनात करेगा.
नेटो प्रमुख जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने रूस को सलाह दी थी कि वो यूक्रेन पर हमले का इरादा छोड़ दे.
रूस-यूक्रेन के बीच बयानबाज़ी
यूक्रेन के रक्षा मंत्री ओलेक्सी रेज़नीकोव ने 22 फ़रवरी को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर सोवियत संघ को पुराने स्वरूप में लाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है.
यूक्रेन की सशस्त्र सेनाओं को संबोधित पत्र में ओलेक्सी रेज़नीकोव ने लिखा है कि पूर्वी यूक्रेन में दो अलग हुए सूबों को स्वीकार करने का फैसला बताता है कि रूस ने 1991 में ढहे सोवियत संघ को पुनर्जीवित करने की ओर एक कदम और बढ़ा दिया है.
उन्होंने लिखा, "रूस ने सोवियत संघ को पुनर्जीवित करने की ओर एक कदम और बढ़ा दिया है. नए वारसॉ पैक्ट और नई बर्लिन वॉल के साथ सिर्फ यूक्रेन और यूक्रेन की सीमा इस दिशा में आख़िरी रोड़ा है."
"अपने देश, अपने घर, और रिश्तेदारों की रक्षा करने की दिशा में हमारे सामने बहुत आसान विकल्प है. हमारे लिए कुछ नहीं बदला है. हमारे सामने कुछ कड़ी चुनौतियां हैं. (bbc.com)
-सुशीला सिंह
''सुबह जब मैंने अपनी हॉस्टल की खिड़की से बाहर देखा तो आग लगी हुई थी शायद कोई ब्लॉस्ट हुआ होगा. मुझे नहीं पता. जब धुआं निकालना शुरू हुआ तो हम सब बच्चे डर गए थे."
"बहुत हलचल मच गई थी. बच्चे कैश निकालने के लिए भागने लगे. घर वापस जाना है बस किसी भी तरह मम्मी पापा के पास जाना है.''
ये शब्द 18 साल के माज़ हसन के हैं जो दो महीने पहले बीते वर्ष दिसंबर के महीने में इवानो शहर में फ्रैंकिविस्क नैशनल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन पहुंचे हैं.
भारत में उत्तर प्रदेश के नजीबाबाद के रहने वाले माज़ हसन ने स्टोर में सामान खरीदते वक्त बीबीसी से वीडियो बातचीत में कहा, ''ये देखिए इस स्टोर में कितनी भीड़ लगी हुई है. यहां रैक में खाने के सामान नहीं है सिर्फ मैगी है. घर में कल ही बात हुई थी. घरवाले भी बहुत परेशान हैं. पता नहीं फ्लाइट इंडिया जाने के लिए कब मिलेगी. यहां लोग डरे हुए है तो हमें भी डर लग रहा है.''
'बच्चे पैनिक कर रहे हैं'
इसी वीडियो में माज़ हसन को तसल्ली देते हुए अनुराग सैनी कहते हैं, ''हालात गंभीर हो चुके हैं और बच्चे रो रहे हैं. मैंने उन्हें समझाया भी कि पैनिक ना करें. इनमें से ज्यादातर बच्चे वो है जो फस्ट या सेकंड ईयर में पढ़ाई कर रहे हैं.अभी कुछ समय पहले मेरे हॉस्टल के ऊपर से जेट फाइटर भी उड़े हैं और मेरे हॉस्टल में नीचे बंकर है और हमें स्थिति बिगड़ने पर वहां जाने की हिदायत दी गई है.''
अनुराग देश की राजधानी कीएफ़ में नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी ओ.ओ.बोगोमोलेट्स से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं और अभी चौथे साल में हैं.
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से आने वाले अनुराग सैनी बताते हैं कि यहां एमबीबीएस की छह साल की पढ़ाई होती है और उनके हॉस्टल में करीब 500 भारतीय छात्र होंगे.
रूस के यूक्रेन पर विशेष सैन्य अभियान की घोषणा के बाद वहां और दुनियाभर में घटनाक्रम तेज़ी से बदल ले रहे हैं जिससे भारत भी अछूता नहीं रहा है. इसका असर जहां भारत से यूक्रेन पढ़ाई करने गए छात्रों पर पड़ रहा है वहीं तेल के दामों में वृद्धि की भी आशंका जताई जा रही है.
अनुराग कहते हैं कि डर इसी बात का है कि स्थिति जिस तरह से बढ़ती जा रही है तो इतनी ना बढ़ जाए क्योंकि दो साल पहले भी ऐसी चीज़ें हो रही थीं और कहा जा रहा था कि युद्ध होने वाला है. तो हम एक तरह से ये सुनते आए हैं लेकिन अभी अचानक से स्थिति ऐसी हो गई है.
वो बताते हैं, ''मैं सुबह खाना लेने गया था और काफ़ी भीड़ थी. इन लोगों में भारतीय और यूक्रेन के लोग भी थे. लगता है खाने की कमी हो जाए लेकिन सप्लाई आनी चाहिए.''
भारत की तरफ से नई एडवाइजरी
इधर यूक्रेन की स्थिति को देखते हुए भारतीय दूतावास ने दूसरी बार 20 फरवरी को एडवाइजरी जारी की थी. इसमें यूक्रेन में पढ़ रहे छात्रों और भारतीयों से दूतावास से संपर्क साधाने की बात कही गई है. ज़रूरी ना होने पर भारत लौटने की सलाह भी दी गई थी.
अब नई एडवाइजरी भी जारी की गई है जिसमें कहा गया है कि यूक्रेन ने हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है इसलिए विमानों की विशेष सेवा स्थगित हो गई है लेकिन भारतीय नागरिकों को बाहर निकालने के लिए वैकल्पिक समाधान निकाले जा रहे हैं.
इस विषय पर जब मैंने इन दोनों छात्रों से पूछा तो अनुराग सैनी का कहना था, ''भारतीय दूतावास से हमारा संपर्क हुआ है और उनका कहना था कि चिंता ना करें साथ ही हमारे साथ नंबर भी शेयर किए गए हैं और कहा कि कोई भी इस नबंर पर कुछ भी पूछ सकता है जो चौबीस घंटे चलने वाले नंबर है साथ ही दूतावास ने लिंक शेयर किए जिसमें बंकर की भी जानकारी दी गई है.''
माज़ बताते हैं, ''भारतीय दूतावास को हॉस्टल में मौजूद बच्चों ने फ़ोन लगाया था. वहां से हमें अपने दस्तावेज़ पास में रखने को कहा गया है. बच्चों ने काफ़ी ट्वीट भी किए हैं कि हमें यहां से बाहर निकालिए क्योंकि बहुत बुरे हालात हैं. सुबह जब इतना धुंआ था तो सब उठ गए थे. शोर हो रहा था सब यहीं सोच रहे थे कि ये क्या हो रहा है. अभी बस कैसे भी करके इंडिया जाना है. हम भी परेशान हैं और घरवाले भी परेशान हो रहे हैं.''
फ्लाइट महंगी
अनुराग सैनी कहते हैं, ''मैं इसी महीने की शुरुआत में भारत से कीएफ़ आया हूं. अब फिर फ्लाइट पकड़ के लौटना. इतने पैसे किसी के पास नहीं है. मेरा रूममेट बस इसलिए नहीं जाना चाहता है क्योंकि वो टिकट के लिए 80-90 हज़ार रुपये नहीं दे सकता है और यही दिक्कत मेरे साथ भी है कि मैं भी इतने पैसे नहीं दे सकता. इसलिए मैंने ऐसी फ्लाइट चुनी जिसमें बहुत समय लग रहा है. और शायद वो भी कैंसिल हो जाए. तो सरकार को देखना चाहिए इतने दाम न बढ़ें.''
इसी बात को आगे बढ़ाते हुए माज़ हसन कहते हैं, ''अभी दूसरे समेस्टर की फ़ीस, अभी मैं यहां आया था और अब वापस लौटने के लिए टिकट का पैसा तो करीब एक लाख रुपये लग जाएंगे. सोचा था मार्च महीने के आख़िरी में चला जाऊंगा लेकिन स्थिति बहुत ख़राब हो गई है .कोई भी फ़्लाइट हो वापस जाने के लिए फ़्लाइट मिलनी चाहिए बस.''
अनुराग बताते हैं कि यहां यूनिर्सिटी के हर फ्लोर पर ब्लॉक बंटे होते हैं जहां कमरे होते हैं और किचन होता है. जहां आपको अपना खाना खुद बनाना होता है. यहां बच्चों को इंडिपेंडंट बनाने की कोशिश होती है. जैसे बच्चे खुद खाना बनाए, खुद से साफ़-सफ़ाई करें. इसी वजह से कैंटीन नहीं होती लेकिन प्राइवेट हॉस्टल में ऐसा नहीं होता.
इन छात्रों का कहना है कि एटीएम पर लंबी लाइनें लग रही हैं और कैश की भी कमी हो रही है. इन बच्चों को कहा गया है कि वो दो कि संख्या में बाहर जाएं और झुंड में ना जाए. ऐसे में इन छात्रों में सामान ख़त्म होने के साथ साथ बाहर निकलने का खौफ़ है. (bbc.com)
नई दिल्ली, 25 फरवरी| यूक्रेन की सेनाएं राजधानी कीव से 60 मील उत्तर में चेरनोबिल अपवर्जन क्षेत्र पर नियंत्रण के लिए रूसी सेना से लड़ रही हैं, इस आशंका के बीच कि लड़ाई परमाणु कचरा रखने वाली भंडारण सुविधाओं को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे समूचे यूरोप में विकिरण के बादल छा सकते हैं। यह जानकारी डेली मेल ने दी। यूक्रेन के आंतरिक मामलों के मंत्रालय के एक सलाहकार एंटोन गेराशचेंको ने कहा कि रूसी सेना क्षेत्र में प्रवेश कर गई और सीमा रक्षक इकाइयों के साथ 'जोरदार' लड़ रही थी।
रिपोर्ट में कहा गया है, "अगर भंडारण सुविधाएं नष्ट हो जाती हैं, तो रेडियोधर्मी बादल यूक्रेन, बेलारूस और यूरोपीय संघ को कवर कर सकता है।"
इस बीच, तुर्की ने बताया कि उसका एक जहाज ओडेसा के तट पर एक 'बम' की चपेट में आ गया है, जहां लड़ाई जारी है। तुर्की नाटो का सदस्य है, इस आशंका को रेखांकित करता है कि यूक्रेन में युद्ध जल्दी से अन्य देशों में चूस सकता है और यूरोप में एक चौतरफा संघर्ष को जन्म दे सकता है।
डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, कीव के सैनिकों ने लगभग 15 मील दूर एक प्रमुख हवाई क्षेत्र पर नियंत्रण खो दिया।
रूसी सेना ने इससे पहले दिन में लगभग दो दर्जन हमलावर हेलीकॉप्टरों से उस पर हमला किया था। माना जाता है कि उनमें से चार को मार गिराया गया। (आईएएनएस)
नई दिल्ली, 25 फरवरी | पेंटागन का मानना है कि रूस के आक्रमण को यूक्रेनी सरकार को 'खत्म' करने और नए नेतृत्व को स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है। एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी एक्सियोस ने गुरुवार को संवाददाताओं से यह बात कही। अधिकारी ने कहा कि रूस का आक्रमण - वायु, भूमि और समुद्र - तीन स्तरों पर आगे बढ़ रहा है, जिनमें से एक का लक्ष्य राजधानी कीव है।
वाशिंगटन में यूक्रेन के राजदूत ने संवाददाताओं से कहा कि कीव के पास लड़ाई जारी है लेकिन शहर फिलहाल सुरक्षित है।
रूसी और यूक्रेनी सैनिकों ने शुक्रवार को कीव के पास एक हवाईअड्डे पर नियंत्रण के लिए लड़ाई लड़ी, रूसी सेना ने सीएनएन को बताया कि वे अब इसे नियंत्रित करते हैं। रूस उत्तर से बेलारूसी सीमा पर भी आक्रमण कर रहा है, जो अपने निकटतम बिंदु पर कीव से 100 मील से भी कम दूरी पर है।
एक्सियोस ने बताया कि रक्षा अधिकारी ने कहा कि अब तक की सबसे भारी लड़ाई खार्किव में हुई है, जो पूर्व में रूस की सीमा के करीब 14 लाख की आबादी वाला शहर है।
रूसी सेना भी दक्षिण से हमला कर रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा कि सबसे अधिक समस्याग्रस्त स्थिति क्रीमिया की है।(आईएएनएस)
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आखिरकार यूक्रेन के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है. हालांकि, पुतिन से सिर्फ स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन बता रहे हैं. यूक्रेन पर कब्जा करने का उनका कोई इरादा नहीं है. रूस की तरफ से यूक्रेन के कई शहरों में धमाके किए हैं. क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई हैं. रूसी राष्ट्रपति का कहना है कि यूक्रेनी सेना हथियार डाले और वापस जाए. यूक्रेन की सेना ने रूस को डराया है और यह सब कुछ नियो नाजी लोगों के इशारे पर हो रहा है. पुतिन ने ये ऐलान UNSC की बैठक की बीच किया है. यह बैठक रूस-यूक्रेन तनाव पर ही चल रही है, अब रूस पर कड़ी कार्रवाई का फैसला लिया जा सकता है.
नई दिल्ली/कीव, 24 फरवरी | रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पूर्वी यूक्रेन में एक सैन्य अभियान की घोषणा के घंटों के बाद भारतीय सुरक्षा विशेषज्ञों ने गुरुवार को कहा कि रूसी सैन्य अभियान पूर्वी यूक्रेन में दोनेस्क और लुहांस्क तक सीमित नहीं होगा ।
भारतीय विशेषज्ञों ने हालांकि यह भी कहा कि यह निष्कर्ष निकालना या अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी कि रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू कर दिया है। पुतिन के कदम पर विशेषज्ञों ने कहा कि उनका बयान डोनबास क्षेत्र तक सीमित था जहां विद्रोहियों ने यूक्रेन की सेना के खिलाफ रूसी सैन्य मदद मांगी थी।
मेजर जनरल अशोक कुमार (सेवानिवृत्त)ने मौजूदा संकट के बारे में बात करते हुए कहा "एक बार जब रूसी सैनिकों ने यूक्रेन को तीन तरफ से घेर लिया था तो ऐसा लग रहा था कि युद्ध अपरिहार्य है। हालांकि राजनयिक प्रयासों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं के कारण शुरूआती दौर में उम्मीद जगी थी कि शायद इसे टाला जा सकता है।"
हालाँकि, रूस ने जो दो पूर्व-शर्तें निर्धारित की थीं, उनमें से एक यूक्रेन को नाटो बलों में शामिल करने वाली शर्त पर कोई बातचीत संभव नहीं थी।
"चूंकि नाटो या अमेरिका की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही थी तो ऐसे में पुतिन के लिए अपनी योजनाओं के साथ आगे बढ़ना अनिवार्य हो गया था। "
उन्होंने पहला काम पूर्वी डोनबास क्षेत्र के दोनेस्क और लुहांस्क को स्वतंत्र देशों के रूप में मान्यता देकर किया जिनकी 90 प्रतिशत से अधिक रूसी आबादी है और ये मुख्य रूप से रूसी समर्थक हैं।
कुमार ने कहा"क्योंकि दोनेस्क और लुहांस्क की सरकारों के मुताबिक यूक्रेन ने उनके क्षेत्रों में बमबारी और घुसपैठ करनी शुरू कर दी थी जो 2015 मिन्स्क समझौते में तय की गई थी। उसके बाद रूसी सेना डोनबास क्षेत्र में चली गई।"
उन्होंने आगे कहा कि ऐसी रिपोर्टे हैं कि यूक्रेन के अन्य हिस्सों में भी भारी गोलाबारी हुई है और मिसाइल हमलों से कई सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया गया है।
उन्होंने कहा, "अब युद्ध किस चरण में जाएगा यह निर्णय का विषय है। क्योंकि इस मामले को देखते हुए अमेरिका और नाटो ने कड़ा रुख अपनाया है।"
मनोहर पर्रिकर-इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (एमपी-आईडीएसए) में एसोसिएट फेलो स्वस्ति राव ने कहा "रूस लंबे समय से अपनी सैन्य शक्ति में सुधार कर रहा था और इसे पिछले दो महीनों के विकास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह इसकी साम्राज्यवादी योजना का हिस्सा है।"
जहां तक भारत और रूस के सैन्य संबंधों का सवाल है तो भारत 50 से 70 फीसदी सैन्य आपूर्ति के लिए रूस पर निर्भर है। राव ने कहा "हालांकि भारत ने सैन्य खरीद के क्षेत्र में स्वदेशीकरण को अपनाते हुए भारतीयकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है, फिर भी हम काफी हद तक रूस पर निर्भर हैं।"
राव ने रूस पर लगाए जाने वाले आर्थिक प्रतिबंधों के बारे में कहा "अभी हमें इंतजार करने और देखने की जरूरत है कि आने वाले दिनों में रूस पर किस तरह के प्रतिबंध लगाए जाते हैं। अमेरिका,अगर त्वरित बैंकिंग प्रतिबंध लगाता है तो यह रूस के लिए एक झटका होगा और यदि अमेरिका ने सीएटीएसए प्रतिबंध लगाया, तो सैन्य उपकरणों का आयात मुश्किल होगा।"
"अब तक पुतिन ने यह कहा है कि वह केवल दोनेस्क और लुहांस्क तक खुद को सीमित करना चाहते हैं लेकिन अपने बार-बार के संबोधन में पुतिन ने कीव को रूसी सभ्यता का पालना बताया है। मुझे इस बात को लेकर संदेह है कि रूस लंबे समय में केवल पूर्वी क्षेत्र तक ही सीमित रहेगा लेकिन वह अब नीपर नदी से पहले अपने आपको सीमित कर सकता है।"
गुरुवार को रूस ने यूक्रेन में एक सैन्य अभियान शुरू किया था और पुतिन ने अन्य देशों को पूर्वी यूक्रेन में उनके मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने की चेतावनी भी दी थी।
पुतिन ने कहा था "जो कोई भी देश बाहर से हस्तक्षेप करने पर विचार करेगा,यदि आप ऐसा करते हैं, तो आपको इतिहास में सबसे अधिक गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। सभी तरह के निर्णय ले लिए गए हैं और मुझे आशा है कि आप इस पर ध्यान देंगे।"
इस बीच, वैश्विक समुदाय, विशेष रूप से पश्चिम देशों और अमेरिका ने रूसी राष्ट्रपति पर यूक्रेनी क्षेत्र पर अकारण हमला करने का आरोप लगाया है। (आईएएनएस)
लंदन/कीव, 24 फरवरी | जैसे ही रूस ने गुरुवार को यूक्रेन के खिलाफ एक सैन्य हमला शुरू किया, रिपोर्टें सामने आईं कि ट्विटर ने रूसी आक्रमण के बारे में फुटेज और अन्य जानकारी साझा करने वाले शोधकर्ताओं के कई खातों को ब्लॉक कर दिया। रूस-यूक्रेन जानकारी साझा करने वाले कई शोधकर्ताओं ने अपने ट्विटर खातों को अप्रत्याशित रूप से निलंबित कर दिया।
ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (ओएसआईएनटी) के विश्लेषकों के साथ, ओलिवर अलेक्जेंडर ने कहा, "मैं 24 घंटों में दो बार लॉक आउट होने के बाद फिर से वापस आ गया हूं। पहली बार असफल तोड़फोड़/गैस हमले को खारिज करने वाली पोस्ट के लिए और दूसरी बार रूस में यूक्रेनी हमले को खारिज करने वाली पोस्ट के लिए ब्लॉक किया गया था।"
उन्होंने ट्विटर पर पोस्ट किया, एटदरेट ट्विटर को अब इन लॉक्स के खिलाफ कुछ करने की जरूरत है।
ग्लेन के ट्वीट और एक अन्य ओएसआईएनटी संगठन द्वारा साझा किए गए एक पोस्ट के अनुसार, ओएसआईएनटी के शोधकर्ता काइल ग्लेन को भी 12 घंटे के लिए उनके खाते से बाहर कर दिया गया था।
द वर्ज की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा विश्लेषक ओलिवर अलेक्जेंडर ने भी 24 घंटों में दो बार अपने खाते से बाहर होने का दावा किया है।
एक बयान में, एक ट्विटर प्रवक्ता ने कहा कि इन खातों के खिलाफ गलती से कार्रवाई की गई थी और यह एक समन्वित अभियान का हिस्सा नहीं था।
कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, "हम इन कार्यों की तेजी से समीक्षा कर रहे हैं और पहले से ही कई प्रभावित खातों तक पहुंच बहाल कर चुके हैं। दावा गलत है कि त्रुटियां एक समन्वित बॉट अभियान थीं या बड़े पैमाने पर रिपोटिर्ंग का परिणाम गलत है।"
शोधकर्ताओं ने चिंता जताई कि खाता निलंबन रूसी आक्रमण के दौरान ओएसआईएनटी खातों को अक्षम करने के उद्देश्य से एक बड़े पैमाने पर रिपोटिर्ंग अभियान का हिस्सा हो सकता है।
ओएसआईएनटी टेकि्न कल ने कहा, "जो बात मुझे सबसे ज्यादा परेशान करती है (और आज आईएमओ का प्रदर्शन किया गया) वह यह है कि किसी भी रूसी आक्रमण में निश्चित रूप से छोटे ओएसआईएनटी खातों को निष्क्रिय करने के लिए बड़े पैमाने पर रिपोटिर्ंग के कुछ रूप शामिल होंगे।" (आईएएनएस)
सैन फ्रांसिस्को, 24 फरवरी | गूगल ने कोविड-19 प्रोटोकॉल के एक बड़े अपडेट में अमेरिकी श्रमिकों के लिए रोजगार की शर्त के रूप में टीकों को अनिवार्य नहीं किया है। गूगल के प्रवक्ता ने सीएनईटी को दिए एक बयान में कहा, "खाड़ी क्षेत्र में मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर, हमें खुशी है कि हमारे कर्मचारी जो अब आने का विकल्प चुनते हैं, उनके पास काम करने और सहकर्मियों के साथ जुड़ने के लिए अधिक ऑनसाइट स्पेस और सेवाओं तक पहुंचने की क्षमता है।"
"हम उन कर्मचारियों को दे रहे हैं जो कार्यालय में आने के अवसर का स्वागत करते हैं, जहां भी हम सुरक्षित रूप से ऐसा कर सकते हैं, जबकि उन लोगों को अनुमति दे रहे हैं जो घर से काम करने के लिए तैयार नहीं हैं।"
गूगल कर्मचारियों को फिटनेस सेंटर तक पहुंच प्रदान करेगा, शटल सेवा बहाल करेगा और यह अपने अनौपचारिक स्थान भी खोलेगा।
इसके अलावा, अमेरिका स्थित सर्च इंजन दिग्गज एक ऐसी नीति को उठा रहा है जिसके लिए गूगल सुविधा में प्रवेश करने वाले किसी भी व्यक्ति की आवश्यकता होती है, यहां तक कि टीकाकरण करने वाले कर्मचारी भी, एक नकारात्मक कोविड-19 आणविक परीक्षण कर सकते हैं।
गूगल ने सबसे पहले डेल्टा वेरिएंट के प्रसार के बीच इन-ऑफिस कर्मचारियों के लिए अमेरिकी वैक्सीन जनादेश की घोषणा की।
दिसंबर में वापस, कंपनी ने कहा कि वह 2022 तक रिटर्न-टू-ऑफिस योजनाओं पर निर्णय लेने के लिए इंतजार करेगी। गूगल ने कहा कि कार्यालय से काम करना स्वैच्छिक है और उसके खाड़ी क्षेत्र के 30 प्रतिशत 'गूगलर्स' ऑनसाइट काम पर लौट आए हैं।
(आईएएनएस)
म्यांमार के लिए संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र पर्यवेक्षक ने कहा है कि सैन्य जुंटा अभी भी लड़ाकू जेट और बख्तरबंद वाहन हासिल कर रही है, जिनका इस्तेमाल पिछले साल के तख्तापलट के बाद से नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र पर्यवेक्षक और अमेरिकी कांग्रेस के पूर्व सदस्य थॉमस एंड्रयूज ने मंगलवार को कहा कि चीन और रूस अभी भी सैन्य जुंटा को युद्धक विमानों और बख्तरबंद वाहनों की आपूर्ति करा रहे हैं. एक बयान में एंड्रयूज ने कहा, "पिछले साल के सैन्य तख्तापलट के बाद से नागरिकों के खिलाफ अथक अपराधों और दुर्व्यवहार के सबूत के बावजूद रूस और चीन ने सैन्य विमान और बख्तरबंद वाहन दिए."
एंड्रयूज ने म्यांमार की सैन्य जुंटा को हथियारों की आपूर्ति करने वाले देशों में सर्बिया का भी नाम लिया. बयान के मुताबिक, "इसी अवधि के दौरान सर्बिया ने म्यांमार सेना को रॉकेट और बख्तरबंद वाहनों के निर्यात को मंजूरी दी." एंड्रयूज ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से म्यांमार को हथियारों की आपूर्ति को निलंबित करने का आह्वान किया.
उन्होंने जोर देकर कहा, "यह निर्विवाद होना चाहिए कि नागरिकों को मारने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले हथियारों को अब म्यांमार को नहीं देना चाहिए."
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से तेल और गैस और विदेशी मुद्रा भंडार तक सैन्य पहुंच को निलंबित करने का भी आह्वान किया. उन्होंने अन्य देशों और निजी क्षेत्र की संस्थाओं से भी अपील की कि वे म्यांमार से बांस और कीमती पत्थर न खरीदें क्योंकि इससे होने वाली आय सैन्य जुंटा को जाती है.
इससे पहले यूरोपीय संघ ने देश के कई प्रमुख अधिकारियों और शासन से जुड़ी चार संस्थाओं पर अपने प्रतिबंध का विस्तार किया था. पिछले साल भी 27 सदस्यीय ब्लॉक ने सैन्य अधिकारियों पर यात्रा प्रतिबंध लगाया था और म्यांमार की सेना से जुड़ी चार "आर्थिक संस्थाओं" पर कार्रवाई की थी.
सोमवार को जिन 22 अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनमें उद्योग और सूचना मंत्री, चुनाव आयोग के अधिकारी और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी शामिल हैं. उनकी संपत्ति फ्रीज कर दी गई है और यात्रा प्रतिबंध लगाए गए. म्यांमार और दुनिया भर में मानवाधिकार समूहों ने तर्क दिया था कि एमओजीई पर प्रतिबंध लगाने से सेना के धन का एक महत्वपूर्ण स्रोत ठप हो जाएगा.
म्यांमार पिछले साल 1 फरवरी को सैन्य तख्तापलट के बाद से उथल-पुथल में है. तख्तापलट के बाद से ही राष्ट्रव्यापी विरोध का एक सिलसिला शुरू हुआ और सेना ने विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ बल का इस्तेमाल भी किया. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में सैन्य अभियानों में कम से कम 1,500 लोग मारे गए हैं. सेना और सशस्त्र विद्रोहियों के बीच जारी संघर्ष में तीन लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं.
एए/सीके (एएफपी, रॉयटर्स)
जो इलाके जंगलों की आग से पूरी तरह सुरक्षित समझे जाते थे, वे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. भारत, ऑस्ट्रेलिया और साइबेरिया जैसे इलाकों में वाइल्डफायर की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं. आगे ऐसी घटनाएं बेतहाशा बढ़ने की आशंका है.
इंडोनेशिया के पीटलैंड, कैलिफॉर्निया के जंगल और अब अर्जेंटीना के वेटलैंड का बड़ा इलाका, ये सभी बड़े स्तर पर लगी जंगल की आग का शिकार हुए. ऐसी घटनाएं रुकती नहीं दिख रही हैं. ग्लोबल वॉर्मिंग के चलते आने वाले दशकों में वाइल्डफायर या दावानल की घटनाओं में और वृद्धि होगी.
पश्चिमी अमेरिका, उत्तरी साइबेरिया, मध्य भारत और पूर्वी ऑस्ट्रेलिया के इलाकों में पहले ही वाइल्डफायर की घटनाएं बढ़ गई हैं. वाइल्डफायर आर्कटिक के टुंड्रा और अमेजन वर्षा वन जैसे उन इलाकों को भी चपेट में ले रहा है, जो इससे सुरक्षित समझे जाते थे. अगले 28 सालों के भीतर एक्सट्रीम वाइल्डफायर की घटनाओं में 30 प्रतिशत तक वृद्धि का अनुमान है. यह चेतावनी संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एक रिपोर्ट में दी गई है.
भविष्य को लेकर क्या है अनुमान?
यूनाइटेड नेशन्स एनवॉयरमेंट प्रोग्राम (यूएनईपी) ने 23 फरवरी को जारी अपनी एक रिपोर्ट में चेताया, "2019-2020 में ऑस्ट्रेलिया में लगी भीषण जंगल की आग हो या 2020 का आर्कटिक वाइल्डफायर, इस सदी के आखिर तक ऐसी घटनाओं की आशंका 31 से 57 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी." ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने की सबसे महत्वाकांक्षी कोशिशें भी आने वाले समय में वाइल्डफायर के व्यापक स्तर और नियमितता में आने वाली नाटकीय वृद्धि को नहीं रोक सकेंगी.
तेजी से गरम हो रही धरती के चलते जंगलों में आग लगने की आशंका बढ़ गई है. मौसम की अतिरेकता का मतलब है ज्यादा तेज, गर्म और शुष्क हवा, जो आग की तीव्रता और विस्तार को बढ़ा देती है. ऐसे इलाके जहां दावानल पहले भी होता आया था, वे तो सुलग ही रहे हैं. साथ ही, कई अप्रत्याशित इलाकों में भी आग लग रही है.
यूएन रिपोर्ट को तैयार करने वालों में शामिल पीटर बताते हैं, "आग लगने की घटनाएं अच्छी बात नहीं हैं. इसका लोगों पर पड़ने वाला असर, फिर चाहे वह सेहत पर हो या सामाजिक और मनोवैज्ञानिक, यह बहुत गंभीर है. इसके नतीजे दूरगामी हैं." जंगलों में बड़े स्तर पर लगी आग पर काबू पाने में कई दिन और यहां तक कि हफ्ते भी लग सकते हैं. इतने लंबे समय तक आग दहकते रहने के चलते लोगों को सांस और दिल की परेशानियां हो सकती हैं. खासतौर पर छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर इसका ज्यादा असर दिखेगा.
कितना और कैसा नुकसान?
साइंस जर्नल 'लैंसेट' में छपे एक हालिया शोध में पाया गया कि वाइल्डफायर से निकले धुएं के संपर्क में आने से सालाना औसतन 30 हजार मौतें होती हैं. यह अनुमान उन 43 देशों के संदर्भ में है, जिनका डाटा मौजूद है. अमेरिका में उन चुनिंदा देशों में है, जहां वाइल्डफायर से हुए नुकसान की गणना की जाती है. हालिया सालों में वहां वाइल्डफायर के चलते हुआ नुकसान 71 से 348 अरब डॉलर तक आंका गया है.
वाइल्डफायर की बड़ी घटनाएं वन्यजीवन के लिए विनाशक हो सकती हैं. इसके चलते कुछ संरक्षित प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर पहुंच सकती हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, 2019-20 के ऑस्ट्रेलियाई वाइल्डफायर जैसी घटनाओं में लगभग तीन अरब जीवों के मारे जाने या उन्हें नुकसान पहुंचने का अनुमान है. इनमें स्तनधारी जीव, रेंगने वाले जीव, पक्षी और मेढ़क शामिल हैं.
रातें भी हो रही हैं गरम
जलवायु परिवर्तन के चलते वाइल्डफायर और भीषण हो गया है. ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण गरम हवा, सूखा और मिट्टी में नमी की कमी बढ़ गई है. पिछले हफ्ते 'नेचर' जर्नल में प्रकाशित एक शोध में पाया गया कि पहले रातें ठंडी और नम होती थीं. ये आग को बुझाने में मदद करती थीं. रात के तापमान में तेजी से हो रही वृद्धि भी वाइल्डफायर के ज्यादा व्यापक और तीव्र होने का एक कारण है.
यूएन शोधकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कई देश वाइल्डफायर बुझाने में काफी समय और पैसा खर्च कर रहे हैं. लेकिन वाइल्डफायर रोकने के लिए उनकी कोशिशें पर्याप्त नहीं हैं. रिपोर्ट में सरकारों से वाइल्डफायर पर किए जा रहे खर्च में बदलाव लाने की भी अपील की गई. कहा गया कि वे इस बजट का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा ऐसी घटनाओं को रोकने और तैयारी मजबूत करने पर लगाएं.
एसएम/आरपी (एएफपी, एपी, रॉयटर्स)
पश्चिमी देशों का कहना है कि समय खत्म हो रहा है और ईरान का परमाणु कार्यक्रम इतनी तेजी से आगे बढ़ रहा है कि कुछ दिनों में वह समझौता बेकार हो जाएगा जिसकी कोशिश चल रही है. आखिर ईरान परमाणु बम बनाने से कितना दूर है?
ईरान और अमेरिका के बीच 2015 के परमाणु करार को दोबारा लागू कराने के लिएमध्यस्थों के जरिए बातचीततो हो रही है लेकिन कई अहम मसलों पर अभी सहमति नहीं बन सकी है. फिलहाल तो यह भी कहना मुश्किल है कि करार दोबारा लागू हो सकेगा या नहीं.
2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के समझौते से बाहर निकल कर ईरान पर प्रतिबंध लगाने के बाद ईरान ने करार में तय कई सीमाओं को तोड़ा है.दुनिया के ताकतवर देशों ने ईरान को परमाणु बम बनाने से दूर करने के लिए ये सीमाएं तय की थीं. कोशिश यह की गई कि थी कि अगर ईरान पर्याप्त संवर्धित यूरेनियम तैयार करके अगर 2-3 महीने में बम बनाने के काबिल हो तो कम से कम उसे इससे एक साल दूर कर दिया जाए. तब इस समय को "ब्रेकआउट टाइम" नाम दिया गया था.
राजनयिकों का कहना है कि अब अगर ये करार हो भी जाता है तो इस "ब्रेकआउट टाइम" को एक साल करना संभव नहीं हो सकेगा. ईरान ने करार टूटने के बाद यूरेनियम संवर्धन करने में जो प्रगति की है उसी के आधार पर राजनयिक यह बात कह रहे हैं. हालांकि इतना जरूर है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच करार हो जाता है तो फिलहाल जो "ब्रेकआउट टाइम" है उसे लंबा करने में जरूर मदद मिलेगी.
ईरान का कहना है कि वह केवल शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए यूरेनियम का संवर्धन कर रहा है. जानकारों को उसके दावे पर संदेह है. वो मानते हैं कि ईरान ने विकल्प खुले रखे हैं या फिर वह समझौते में फायदा उठाने के लिए परमाणु हथियार बनाने के करीब पहुंच जाना चाहता है.
ब्रेकआउट टाइम
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी, आईएईए ने ईरान की परमाणु गतिविधियों पर पिछले तिमाही की रिपोर्ट नवंबर में जारी की थी. इसके मुताबिक विशेषज्ञों ने मोटे तौर पर ब्रेकआउट टाइम तीन से छह महीने बताया है. हालांकि उनका कहना है कि हथियार बनाने में कुछ समय और लगेगा यानी कुल मिला कर लगभग दो साल.
इस्राएल के वित्त मंत्री ने नवंबर में कहा कि ईरान अगले पांच सालों के भीतर परमाणु हथियार बना लेगा. ब्रेकआउट टाइम का आकलन करने का आधार पूरी तरह से वैज्ञानिक नहीं है और यह कहना तो और भी मुश्किल है कि समझौते के अंदर यह किस हाल में होगा क्योंकि समझौते की शर्तें तो अभी तय ही नही हुई हैं. हालांकि राजनयिकों और विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल यह ब्रेकआउट टाइम तकरीबन छह महीने है.
यूरेनियम का संवर्धन
परमाणु करार में ईरान के लिए यूरेनियम 3.67 प्रतिशत शुद्धता तक संवर्धित करने की सीमा तय की गई थी. यह परमाणु हथियार बनाने के लिए जरूरी 90 प्रतिशत की शुद्धता से बहुत कम है. करार से पहले ईरान 20 प्रतिशत की शुद्धता तक संवर्धन करने में सफल हो चुका था. अब ईरान कई स्तरों तक यूरेनियम का संवर्धन कर रहा है जिसमें सबसे ऊंचा स्तर 60 प्रतिशत का है.
करार में यह भी तय किया गया था कि ईरान एक परमाणु रिएक्टर में 5000 से कुछ ज्यादा पहली पीढ़ी के सेंट्रीफ्यूजों में ही संवर्धित यूरेनियम जमा या फिर पैदा कर सकता है. इसके लिए नतांज की भूमिगत फ्यूल इनरिचमेंट प्लांट का नाम तय हुआ था.
करार में ईरान को रिसर्च के लिए यूरेनियम के संवर्धन की मंजूरी मिली थी लेकिन संवर्धित ईरान को जमा करके रखने की नहीं. उसे छोटी संख्या में ही उन्नत सेंट्रीफ्यूजों का इस्तेमाल करने की अनुमति थी. ये सेंट्रीफ्यूज पहली पीढ़ी के सेंट्रीफ्यूजों की तुलना में दोगुने सक्षम होते हैं.
ईरान फिलहाल सैकड़ों उन्नत सेंट्रीफ्यूजों में नतांज के भूमिगत प्लांट और जमीन के ऊपर बने पायलट फ्यूल इनरिचमेंट प्लांट में यूरेनियम का सवर्धन कर रहा है. इसके अलवा वह 1000 से ज्यादा पहली पीढ़ी के सेंट्रीफ्यूज के साथ फोर्दो में भी यूरेनियम का संवर्धन कर रहा है. यह प्लांट पहाड़ों के नीचे बने है और यहां पहले से ही 100 से ज्यादा उन्नत सेंट्रीफ्यूज मौजूद हैं.
यूरेनियम का भंडार
आईएईए ने नवंबर में जारी अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि ईरान का संवर्धित यूरेनियम भंडार 2.5 टन से नीचे है. परमाणु करार में तय सीमा यानी 202.8 किलोग्राम से यह तकरीबन 10 गुना ज्यादा है. करार से पहले के भंडार से भी यह करीब पांच गुना ज्यादा है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान करार से पहले 20 प्रतिशत से ज्यादा के स्तर पर संवर्धन कर रहा था लेकिन अब उससे बहुत ज्यादा स्तर पर संवर्धन कर रहा है और उसने करीब 17.7 किलोग्राम यूरेनियम को 60 फीसदी से ज्यादा संवर्धित कर लिया है. जाहिर है कि यह हिस्सा परमाणु हथियार बनाने के लिए जरूरी 90 फीसदी की शुद्धता के करीब है. परमाणु बम बनाने के लिए करीब 25 किलो, 90 फीसदी संवर्धित यूरेनियम की जरूरत होती है. करार हुआ तो अतिरिक्त संवर्धित यूरेनियम को या तो हल्का किया जाएगा या फिर उसे रूस भेजा जाएगा. ईरान को करार के 3.67 संवर्धन की सीमा पर ही वापस आना होगा.
निरीक्षण और निगरानी
करार के तहात ईरान को आईएईए के तथाकथित एडिशनल प्रोटोकॉल को लागू करना होता है. इसके तहत अघोषित ठिकानों के तत्काल निरीक्षण की मंजूरी देनी होती है. इसके साथ ही आईएईए की कैमरे और दूसरे उपकरणों की मदद से निगरानी का दायरा भी बढ़ जाता है और मूल गतिविधियों को छोड़ बाकी सारी चीजें इसमें शामिल हो जाती हैं. ईरान ने आईएईए के साथ जो कंप्रिहेंसिव सेफगार्ड एग्रीमेंट किया है उसके तहत होने वाले निरीक्षण भी इसमें जारी रहेंगे.
ईरान ने एडिशनल प्रोटोकॉल को लागू करना बंद कर दिया था और वह अतिरिक्त निगरानी को भी सिर्फ ब्लैक बॉक्स जैसी व्यवस्था के जरिए होने दे रहा है. इसके तहत कैमरे और दूसरे उपकरणों का डाटा जमा करके सुरक्षित तो रखा जा रहा है लेकिन आईएईए उस तक नहीं पहुंच सकता. कम से कम फिलहाल तो वह इसे नहीं देख सकता. यह व्यवस्था एक साल के लिए बनाई गई है.
हथियार बनाने की क्षमता
करार के तहत प्रतिबंध लगे होने के बावजूद ईरान ने 20 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम तैयार कर लिया है. इसने पश्चिमी देशों को चिंता में डाल दिया है क्योंकि यूरेनियम धातु परमाणु बम बनाने की दिशा में एक अहम कदम है. अब तक किसी देश ने यह नहीं किया है कि वह यूरेनियम का इतना अधिक संवर्धन कर ले और फिर आखिर में परमाणु बम ना बनाए.
ईरान की दलील है कि वह परमाणु ईंधन पर काम कर रहा है. उसके मुताबिक उसे ऊर्जा की जरूरत है और हथियार बनाना उसका मकसद नहीं है.
एनआर/आरपी (रॉयटर्स)
-मर्लिन थॉमस और विबेके वेनेमा
रोशनी से चमचमाते समुद्री तट, विशाल रेगिस्तान में लगाए गए अरबों पेड़, बहुत तेज़ गति से चलने वाली ट्रेनें, नकली चांद और बिना कारों के 170 किलोमीटर लंबी सीधी रेखा में बसा एक शहर. ये सारी योजनाएं निओम प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं.
इस प्रोजेक्ट के तहत सऊदी अरब में भविष्य की एक इको-सिटी बसाए जाने की योजना है. इस शहर में सब कुछ पर्यावरण के अनुकूल होगा. लेकिन असल सवाल यही है कि क्या यह योजना वाक़ई सच हो जाएगी?
निओम प्रोजेक्ट आने वाले वक़्त का ख़ाका होने का दावा करता है और कहता है कि बिना पृथ्वी की सेहत बिगाड़े मानव सभ्यता भी फल फूल सकती है. इस परियोजना की लागत 500 अरब डॉलर (क़रीब 37 लाख करोड़ रुपए) है. और यह कच्चा तेल मुक्त सऊदी अरब के 'विज़न 2030' का एक हिस्सा है.
यह इको-सिटी विकसित करने वाले डेवलपर्स के मुताबिक़ यह शहर 26,500 वर्ग किमी (क़रीब इसराइल और फ़लीस्तीन जितना बड़ा इलाक़ा) में फैला होगा. वहीं यहां पर सऊदी अरब की न्यायिक प्रणाली काम नहीं करेगी, बल्कि इस प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले इसके लिए ख़ुद स्वायत्त क़ानूनी व्यवस्था तैयार करेंगे.
निओम प्रोजेक्ट के सलाहकार बोर्ड में शामिल पूर्व बैंकर अली शिहाबी के अनुसार, यह शहर 170 किमी लंबी सीधी रेखा में बसेगा, जिसका नाम 'द लाइन' होगा.
सुनने में यह प्रोजेक्ट भले असंभव लगे, लेकिन अली शिहाबी कहते हैं कि द लाइन को कई चरणों में बसाया जाएगा. वे बताते हैं, "लोग कहते हैं कि यह प्रोजेक्ट पागलपन है. इसकी लागत बहुत ज़्यादा है, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीक़े से बनाया जा रहा है."
वो बताते हैं कि यह शहर स्पेन में बार्सिलोना के ट्रैफ़िक-मुक्त "सुपरब्लॉक्स" की तरह का होगा. उनके अनुसार, ''हर खंड अपने पर ही निर्भर होगा. इसमें दुकानें और स्कूल जैसी सुविधाएं भी होंगी ताकि लोगों को जो भी चाहिए वो सब 5 मिनट पैदल या साइकिल से चलने पर मिल जाए.''
इस प्रोजेक्ट को विकसित करने वालों का दावा है कि जब यह शहर पूरा बस जाएगा तब यहां के छोर से दूसरे छोर की यात्रा हाइपर स्पीड ट्रेनों के ज़रिए पूरी की जाएगी, जिसमें सबसे लंबी यात्रा करने पर भी 20 मिनट से अधिक नहीं लगेगा.
निओम प्रोजेक्ट में इसके अलावा 'ऑक्सागन' नाम का पानी पर तैरता एक शहर होगा. आठ भुजाओं की आकृति वाला यह शहर दुनिया का सबसे बड़ा तैरता हुआ स्ट्रक्चर होगा, जो किलोमीटर में फैला होगा.
निओम के सीईओ नदमी अल-नस्र के अनुसार, इस बंदरगाह शहर में 2022 से ही लोग आकर रहने लगेंगे.
निओम ने एलान किया है कि इस "औद्योगिक केंद्र" के आगे लाल सागर के तट पर, दुनिया की सबसे बड़ी कोरल रीफ़ (प्रवाल भित्ति) रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट चलाई जाएगी.
निओम प्रोजेक्ट की वेबसाइट पर दावा किया गया है कि इस विशाल परियोजना का पहला चरण 2025 तक पूरा हो जाएगा. हालांकि इसकी वेबसाइट कभी कभी विज्ञान की फंतासी कहानियों वाले किसी उपन्यास जैसी लगती है.
सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें जब देखते हैं तो रेगिस्तान में फ़िलहाल एक वर्गाकार आकृति बनी हुई है. इसमें क़तारों में सैकड़ों घर बने हुए हैं. इसमें दो स्वीमिंग पूल और एक फ़ुटबॉल ग्राउंड भी बना हुआ है.
अली शिहाबी बताते हैं कि यह निओम के कर्मचारियों के लिए बना शिविर है. हालांकि बीबीसी ने वहां जाकर इसका सत्यापन नहीं किया.
हालांकि रेगिस्तान के बीचोबीच पर्यावरण अनुकूल मानदंडों पर खरा उतरने वाला ऐसा अत्याधुनिक शहर बना पाना कितना संभव है?
इसका जवाब ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के एक इनर्जी एक्सपर्ट डॉ. मनल शेहाबी से मांगा. तो उन्होंने कहा कि निओम की कामयाबी का मूल्यांकन करते समय कई बातों पर विचार करना चाहिए. वे पूछते हैं कि खाने पीने की चीज़ें क्या वहीं पर बिना बहुत अधिक संसाधनों का उपयोग किए तैयार की जा सकेंगी या खाद्य पदार्थों को विदेश से मंगाया जाएगा?
हालांकि वेबसाइट का दावा है कि निओम "दुनिया का सबसे अधिक खाद्य आत्मनिर्भर शहर" होगा. यहां 'वर्टिकल फार्मिंग' करके खाद्य पदार्थों का उत्पादन किया जाएगा. यह एक ऐसे देश के लिए बड़ी बात होगी, जो कि फ़िलहाल अपने भोजन का लगभग 80 फ़ीसदी हिस्सा आयात करता है.
लेकिन क्या खाद्य उत्पादों का स्थानीय उत्पादन हमेशा होता रह पाना संभव है?
वहीं आलोचकों का आरोप है कि इस परियोजना की मुख्य प्रेरक शक्ति और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, देश के वास्तविक हालात से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए पर्यावरण से जुड़े बड़े-बड़े वादे कर रहे हैं.
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान चाहते हैं कि सऊदी अरब को हरित देश बनाया जाए और "गीगा-प्रोजेक्ट" उनके इसी विज़न का एक हिस्सा है.
जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए क़रीब तीन महीने ग्लासगो में हुए COP26 सम्मेलन के एक सप्ताह पहले उन्होंने 'सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव' को लॉन्च किया. इसमें 2060 तक कार्बन का उत्सर्जन ज़ीरो करने का लक्ष्य तय किया गया है.
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन वार्ता की जानकार डॉ. जोआना डेप्लेज कहती हैं कि शुरू में इसे एक बड़ा क़दम माना गया, लेकिन बाद में जब अच्छे से देखा गया तो उसके एलान हक़ीक़त पर खरे नहीं उतर सके.
वो बताती हैं कि तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री तक रोकने के लिए अभी से 2030 के बीच दुनिया के तेल उत्पादन में हर साल लगभग 5 फ़ीसदी की कमी करने की ज़रूरत है.
लेकिन COP26 जलवायु सम्मेलन में वादा करने के केवल कुछ ही हफ्तों बाद उसने तेल उत्पादन को बढ़ाने की बात कही. ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान ने कहीं कहा कि उनका देश कच्चे तेल का उत्पादन करना बंद नहीं करेगा. उन्होंने कहा, "हम अभी भी इस पांत के अंतिम व्यक्ति होंगे और हाइड्रोकार्बन का हर अणु बाहर आएगा."
डॉ. डेप्लेज कहती हैं, "मुझे लगता है कि यह वाक़ई काफ़ी चौंकाने वाली बात है कि सऊदी अरब अभी भी सोचता है कि आज के माहौल में भी वह कच्चे तेल का दोहन करना और उसे निकालना जारी रख सकता है."
किसी देश का कार्बन उत्सर्जन किसी ईंधन को जलाने से होता है, न कि उसे पैदा करने से. इसलिए सऊदी अरब जैसे देश हर साल लाखों बैरल कच्चे तेल निकाल कर उसे दूसरे देशों को बेचते हैं, तो कार्बन का उत्सर्जन उनके खाते में नहीं गिना जाएगा.
वैसे दूसरे देशों की बात तो छोड़ ही दीजिए घरेलू स्तर पर भी सऊदी अरब को अभी काफ़ी लंबा रास्ता तय करना है. उसने कहा है कि उनका देश 2030 तक 50 फ़ीसदी बिजली अक्षय ऊर्जा से पैदा करेगा, लेकिन 2019 में यह उत्पादन देश के कुल बिजली उत्पादन का महज़ 0.1 फ़ीसदी ही था.
'रचनात्मक सोच'
निओम प्रोजेक्ट के समर्थकों का कहना है कि नए सिरे से शुरुआत करके पवन और सौर ऊर्जा पर निर्भर एक स्मार्ट और टिकाऊ शहर बनाना बहुत आवश्यक है. इस शहर में पानी की ज़रूरत समुद्री जल साफ़ करके पूरी की जाएगी, लेकिन इसमें भी कार्बन का उत्सर्जन ज़ीरो होना चाहिए.
निओम के सलाहकार बोर्ड के सदस्य अली शिहाबी कहते हैं, "सऊदी अरब को कुछ रचनात्मक सोचने की ज़रूरत है, क्योंकि मध्य पूर्व में पानी अब ख़त्म हो रहा है."
मालूम हो कि सऊदी अरब रेगिस्तानी देश है, जहां का आधा पानी समुद्री जल को साफ़ करके हासिल किया जाता है. लेकिन इसके लिए काम करने वाली मशीनें परंपरागत ईंधन से चलती हैं.
यह प्रक्रिया न केवल महंगी है, बल्कि पानी साफ़ करने के बाद नमकीन और ज़हरीले केमिकल का मिश्रण भी हासिल होता है, जिसे वापस समुद्र में ही फेंक दिया जाता है. हालांकि यह मिश्रण समुद्र में रहने वाले जीवों के लिए ख़तरनाक होता है.
निओम प्रोजेक्ट के तहत पानी साफ़ करने की पूरी प्रक्रिया को बदलने का दावा किया जा रहा है. इसके लिए न केवल अक्षय ऊर्जा का उपयोग होगा, बल्कि इस दौरान हासिल नमक और केमिकल के मिश्रण का उपयोग उद्योगों के लिए कच्चे माल के तौर पर किया जाएगा.
हालांकि इस राह की एक बड़ी अड़चन है, जो ये कि अभी तक पानी साफ़ करने वाले संयंत्रों को अक्षय ऊर्जा के सहारे चलाने की कोशिश कामयाब नहीं हो सकी है.
अली शिहाबी कहते हैं कि यदि इस प्रोजेक्ट का यह प्रयोग सफल रहा तो मध्य पूर्व में पानी की समस्या हल हो सकती है, जो निओम प्रोजेक्ट के लिए काफ़ी सार्थक होगा.
हालांकि जलवायु विशेषज्ञ बिना भरोसे वाली टेक्नोलॉजी पर विश्वास करने को एक ख़तरा मानते हैं. इनका मानना है कि यदि इससे संबंधित टेक्नोलॉजी कामयाब न हुई, तो जलवायु परिवर्तन से लड़ने के मिशन पर फ़र्क पड़ेगा और लक्ष्य पाने में देरी हो सकती है.
वैसे नियोम प्रोजेक्ट है किसके लिए, इससे जुड़े कई बड़े सवालों के जवाब दिए जाने बाक़ी हैं. (bbc.com)
यूक्रेन पर रूस का दबाव लगातार बढ़ रहा है. यूक्रेन के दो इलाकों दोनेत्स्क और लुहान्स्क को मान्यता देकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपन रुख साफ़ कर दिया.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस मामले को लेकर किस कदर सख़्त हैं, इसकी एक झलक सोमवार को हुई एक बैठक के दौरान मिली.
इस बैठक में रूस के कई बड़े अधिकारी मौजूद थे.
सुरक्षा से जुड़ी इस बैठक में दोनेत्स्क और लुहान्स्क पर जब रूस के विदेशी खुफिया विभाग के चीफ़ सलाह देने लगे तो पुतिन ने उन्हें चुप करा दिया. पुतिन का रवैया ऐसा था कि जवाब देते वक्त खुफिया एजेंसी के चीफ़ की ज़ुबान लड़खड़ाने लगी.
ये पूरी घटना टीवी पर प्रसारित हो रही थी और अब इसका वीडियो पूरी दुनिया में वायरल है.
जब पुतिन बोले, साफ़ कहिये क्या कहना चाहते हैं?
टीवी पर जो तस्वीरें दिखीं, उनके मुताबिक इस बैठक के दौरान पुतिन रूस की विदेशी खुफिया एजेंसी के चीफ़ सर्गेई नेरिश्किन को बगैर 'लाग-लपेट के सीधा जवाब देने' के लिए कहते दिख रहे हैं.
इस वीडियो में सर्गेई ये कहते दिखते हैं,'' हमने आज जिस मुद्दे पर बातचीत की थी उस लागू करना करना चाहिए."
इस पर उन्हें बीच में ही टोकते हुए पुतिन कहते हैं, "इसका मतलब क्या है? सबसे खराब स्थित में क्या? क्या आपका मतलब ये कि हम बातचीत शुरू कर दें.''
इस पर सर्गेई कहते हैं, "नहीं."
उनके ना कहने से पहले पुतिन एक बार फिर उन्हें टोकते हैं.
पुतिन कहते हैं, "हम बातचीत शुरू करें या फिर उनकी संप्रभुता को मान्यता दे दें?"
"साफ-साफ बोलिए, आप क्या कहना चाहते हैं?"
"Speak plainly, Sergei"
— BBC News (World) (@BBCWorld) February 22, 2022
Vladimir Putin presses Russia's spy chief during meeting with officialshttps://t.co/n7C78XPK3P pic.twitter.com/SEHTQRiaK4
दोनेत्स्क और लुहान्स्क को मान्यता से जुड़े सवाल पर की खिंचाई
वीडियो फुटेज के आधार पर कई विश्लेषकों की राय है कि ख़ुफिया चीफ़ सर्गेई पुतिन को बातचीत की सलाह देना चाह रहे थे लेकिन उनके कड़े रुख को देख कर सहम से गए.
सर्गेई ने आगे कहा कि वह दोनेत्स्क और लुहान्स्क को मान्यता देने के फैसले का समर्थन करेंगे.
पुतिन का रुख अब भी सख़्त था. उन्होंने पूछा, "करेंगे या करता हूं. साफ-साफ बोलिए."
पुतिन के इस तरह सवाल पूछने से सहमे सर्गेई की जुबान लड़खड़ा गई. उन्होंने जवाब दिया, '' मैं दोनेत्स्क और लुहान्स्क को रूसी फेडरेशन को शामिल करने के फैसले के समर्थन करता हूं''
इस पर पुतिन ने कहा, "मैं उस पर बात नहीं कर रहा हूं. हम यहां उस पर विचार नहीं कर रहे हैं. हम यह बात कर रहे हैं कि उनकी आजादी को मान्यता दें या नहीं."
इस पर हिचकते हुए सर्गेई कहते हैं, '' हां, मैं उनकी आजादी को मान्यता देने के प्रस्ताव का समर्थन करता हूं. ''
बैठक में पुतिन को दोनेत्स्क और लुहान्स्क को औपचारिक मान्यता देने का अधिकार दिया गया. पुतिन की ओर से इस अधिकार के इस्तेमाल के बाद दोनेत्स्क और लुहान्स्क 'गणराज्य' में रूसी सैनिक शांतिरक्षक सेना के तौर पर दाखिल हुए.
पश्चिमी देशों ने रूस के इस कदम की कड़ी आलोचना की है. इसके साथ ही अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के कुछ देशों ने बड़ी रूसी कंपनियों और बैंकों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं.
यूक्रेन की सीमा पर फिलहाल एक लाख रूसी सैनिक जमा हैं.
विश्लेषकों की राय में दोनेत्स्क और लुहान्स्क को मान्यता देने के बाद यूक्रेन पर रूस के 'हमले का खतरा और बढ़ गया है.'
पश्चिमी देशों ने कहा है कि अगर रूस ने यूक्रेन पर पूरी तरह हमला किया तो उस पर व्यापक प्रतिबंध लगाए जाएंगे. हालांकि यूक्रेन को लेकर रूस के मौजूदा रुख में फिलहाल कोई नरमी नहीं दिख रही है. (bbc.com)
अरुल लुइस
संयुक्त राष्ट्र, 24 फरवरी | संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि दुनिया हाल के दिनों में अभूतपूर्व संकट का सामना कर रही है और रूस को कड़ी फटकार लगाई है कि वह यूक्रेन के अलग-अलग क्षेत्रों डोनेट्स्क और लुहांस्क को मान्यता देकर संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों का उल्लंघन कर रहा है।
यूक्रेन पर महासभा की बैठक में उन्होंने बुधवार को कहा, यूक्रेन के संबंध में ताजा घटनाक्रम गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा, हमारी दुनिया संकट के क्षण का सामना कर रही है। मुझे वास्तव में उम्मीद थी कि यह नहीं आएगा।
मॉस्को को फटकार लगाते हुए, गुटेरेस ने कहा, रूसी संघ का डोनेट्स्क और लुहान्स्क क्षेत्रों की तथाकथित 'स्वतंत्रता' को मान्यता देने का निर्णय और अनुवर्ती यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन है और असंगत है संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के सिद्धांत।
महासचिव ने कहा, रूस महासभा की 'मैत्रीपूर्ण संबंध घोषणा' का भी उल्लंघन कर रहा था, जो राज्य की क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता की पुष्टि करता है।
गुटेरेस ने संपर्क लाइन के पार संघर्ष विराम उल्लंघन में वृद्धि और जमीन पर आगे बढ़ने के वास्तविक जोखिम की रिपोर्ट का हवाला देते हुए युद्धविराम और कूटनीति की वापसी का आह्वान किया।
हालांकि, एक उच्च-स्तरीय वैश्विक कूटनीति को अब बंद कर दिया गया है, क्योंकि अमेरिका ने अपने राज्य सचिव, एंटनी ब्लिंकन और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच एक बैठक को बंद कर दिया है और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के रूसी से बात करने के प्रस्ताव को वापस ले लिया है। रूस के दो अलग-अलग क्षेत्रों को मान्यता देने के बाद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उनके साथ एक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए और घोषणा की कि रूसी शांतिरक्षकों को वहां भेजा जाएगा।
शांति व्यवस्था के मास्को के दावों पर, संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा, हमें शांति स्थापना की अखंडता को बनाए रखने के बारे में भी चिंतित होना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र के पास शांति अभियानों को तैनात करने का एक लंबा और मान्यता प्राप्त अनुभव है, जो केवल मेजबान देश की सहमति से होता है।
रूस के स्थायी प्रतिनिधि, वसीली नेबेंजा ने गुटेरेस की तीखी आलोचना की।(आईएएनएस)
एंटानानारिवो, 23 फरवरी | मेडागास्कर में ट्रॉपिकल तूफान एमनती ने दक्षिण-पूर्वी तट को तबाह कर दिया है। ये एक महीने में द्वीप राष्ट्र में आने वाला चौथा तूफान है। मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने बुधवार को कहा, "एमनती इस साल की पांचवीं मौसम घटना है और एक महीने में मेडागास्कर में आने वाला चौथा तूफान है।"
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए तूफान का केंद्र मंगलवार देर रात तट से सिर्फ 40 किमी दूर था और हिंद महासागर द्वीप के दक्षिणी सिरे के दक्षिण-पूर्वी की तरफ बढ़ने का अनुमान है।
ओसीएचए ने कहा कि यह 22 जनवरी को ट्रॉपिकल तूफान एना, 5 फरवरी को ट्रॉपिकल तूफान बत्सिराई और 15 फरवरी को ट्रॉपिकल तूफान डुमाको के बाद आया है।
मेडागास्कर एक अंतर-ट्रॉपिकल अभिसरण क्षेत्र (घटना) है जिसने 17 जनवरी को मेडागास्कर को प्रभावित किया।
ओसीएचए ने कहा कि सबसे खराब मौसम ट्रॉपिकल तूफान बत्सिराई था जिसमें 120 से अधिक लोग मारे गए थे। और उस तूफान से बचे लोगों के एमनती द्वारा फिर से प्रभावित होने की संभावना है।
कार्यालय ने कहा कि सरकार ने मानवीय सहयोगियों के समर्थन से ताजा तूफान के लिए तैयारियों और प्रतिक्रिया का नेतृत्व किया है।
(आईएएनएस)
काबुल, 23 फरवरी | अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी और पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद हनीफ अतमर का नाम संयुक्त राष्ट्र प्रमुखों की सूची से हटा दिया गया है। टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इस बीच नसीर अहमद फैक को संयुक्त राष्ट्र में राज्यों के स्थायी प्रतिनिधियों की सूची में अफगानिस्तान के प्रभारी मामलों के रूप में नामित किया गया है।
अगस्त 2021 में काबुल के पतन के बाद पूर्व राजदूत और अफगानिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि गुलाम मोहम्मद इशाकजई के इस्तीफे के बाद संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान की सीट एक विवादित मुद्दा बन गई है।
इशाकजई के इस्तीफे के बाद, फैक को चार्ज डी अफेयर के रूप में नियुक्त किया गया। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान के स्थायी मिशन ने बाद में एक बयान जारी कर कहा कि उप प्रतिनिधि मोहम्मद वली नईमी, फैक के बजाय चार्ज डी अफेयर बन गए हैं।
अतमर ने खुद को गणतंत्र सरकार का विदेश मंत्री घोषित किया। उन्होंने कथित तौर पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को एक पत्र लिखा, जिसमें कहा गया कि नईमी स्थायी मिशन का नेतृत्व चार्ज डी'एफेयर के रूप में ग्रहण करेंगे।
पत्र के अनुसार, जब इशाकजई ने इस्तीफा दिया, तो सिद्धांत के आधार पर नईमी ने जिम्मेदारी संभाली होगी, लेकिन चूंकि वह बीमार थे, इसलिए फैक को इसके बजाय नियुक्त किया गया।
बयान के अनुसार, जैसे ही नईमी ठीक हुए, वह चार्ज डी'एफेयर बन गए और फैक ने अपनी पिछली भूमिका में काम करना जारी रखा।
टोलो न्यूज से मंगलवार को फैक ने कहा कि अतमर का संयुक्त राष्ट्र को पत्र स्वीकार नहीं किया गया था और गनी और अतमर का नाम संयुक्त राष्ट्र प्रणाली से हटा दिया गया है।
"अतमर के पत्र और मिशन के एक नए कार्यवाहक प्रमुख को पेश करने के उनके प्रयास ने कानूनी और राजनीतिक वर्गो सहित संयुक्त राष्ट्र के विभागों को पत्र का आकलन करने के लिए प्रेरित किया। फिर, यह निर्णय लिया गया कि 15 अगस्त को इसके पतन के बाद पूर्व सरकार आधिकारिक नहीं थी और उस पत्र पर विचार नहीं किया गया। इसके कारण संयुक्त राष्ट्र प्रणाली से उनके नाम भी हटा दिए गए।" (आईएएनएस)
लैटिन अमेरिकी देश कोलंबिया में अब गर्भपात कराया जाना अपराध नहीं होगा. देश के संवैधानिक न्यायालय ने इसे अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है. लैटिन अमेरिका के अलग अलग देशों में गर्भपात को लेकर बहुत अलग कानून हैं.
कोलंबिया के संवैधानिक न्यायालय ने सोमवार को फैसला सुनाया कि गर्भपात केवल तभी दंडनीय होना चाहिए जब गर्भावस्था के 24वें सप्ताह के बाद किया जाता है. यह फैसला देश में गर्भपात प्रथा को प्रभावी ढंग से अपराध से मुक्त करता है. 2006 में कोलंबिया ने आंशिक रूप से गर्भपात को वैध कर दिया था, जब एक कोर्ट ने फैसला सुनाया था महिलाओं को तीन स्थितियों में से एक में गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी जाएगी. ये थे- बलात्कार या यौन शोषण के मामले में, घातक भ्रूण के मामले में असामान्यता और गर्भावस्था में मां के शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य को खतरा हो तब.
संवैधानिक न्यायालय ने सोमवार को पुष्टि की कि इन तीन स्थितियों में कोई समय सीमा नहीं होगी. इसी के साथ अदालत ने कोलंबियाई सरकार से भी तत्काल गर्भवती महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए "एक व्यापक सार्वजनिक नीति तैयार करने और लागू करने" के लिए कहा, जैसे परिवार नियोजन का समर्थन करना और यौन शिक्षा, गोद लेने में सहायता और बाधाओं को दूर करना और गर्भपात के बाद देखभाल आदि.
गर्भपात में प्रतिबंध पर ढील देने वाला कोलंबिया नवीनतम लैटिन अमेरिकी देश बन गया है. मेक्सिको के सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल फैसला सुनाया था कि पूर्ण गर्भपात प्रतिबंध असंवैधानिक है, हालांकि गर्भपात के अधिकार अभी भी देश भर में समान नहीं हैं, जबकि पिछले हफ्ते इक्वाडोर की संसद ने एक कानून पारित किया जो बलात्कार के मामले में गर्भपात की अनुमति देगा. अर्जेंटीना में गर्भावस्था के 14वें सप्ताह तक गर्भपात की अनुमति देने वाला एक कानून पिछले साल के अंत में पास किया गया था.
एए/सीके (रॉयटर्स, डीपीए)
एम्स्टर्डम में एक दुकान में बंदूक लिए एक व्यक्ति ने कई लोगों को कई घंटों तक बंधक बनाए रखा. कई घंटों के पुलिस अभियान के बाद बंधकों को छुड़ाया जा सका और व्यक्ति पर काबू पाया जा सका.
घटना एम्स्टर्डम के केंद्रीय इलाके में स्थित एप्पल स्टोर की है. मंगलवार शाम स्थानीय समय के अनुसार पांच बज कर चालीस मिनट पर पुलिस को खबर मिली कि बंदूक लिए एक व्यक्ति दुकान में चोरी करने की कोशिश कर रहा था.
दुकान में गोलियों के चलने की खबर के बीच पुलिसकर्मी बड़ी संख्या में वहां इकट्ठा हो गए और दुकान को घेर लिया. जल्द ही उस व्यक्ति ने दुकान के अंदर मौजूद कई लोगों को बंधक बना लिया. पुलिस ने "स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए" वहां कई विशेष दस्ते भी तैनात कर दिए.
बंधक सुरक्षित
सोशल मीडिया पर डाले गए कुछ वीडियो में बंदूकधारी व्यक्ति नजर आ रहा था और ऐसा लग रहा था कि उसने किसी को बंधक भी बनाया हुआ है. दुकान में कुल कितने लोग मौजूद थे यह स्पष्ट नहीं हो पाया था.
कई घंटों बाद पूरे घटनाक्रम का अंत तब हुआ जब बंदूकधारी व्यक्ति ने दुकान से बाहर भागने की कोशिश की. तभी पुलिस की एक गाड़ी ने उसे टक्कर मार कर गिरा दिया और उस पर काबू पा लिया. पुलिस ने बताया कि बंधक सुरक्षित हैं.
पुलिस ने एक ट्वीट में कहा, "हम इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि बंधक बनाने वाला व्यक्ति एप्पल स्टोर से निकल चुका है. वो सड़क पर पड़ा है और एक रोबोट उसकी जांच कर यह पता लगा रहा है कि उसके बाद विस्फोटक तो नहीं हैं. सशस्त्र पुलिसकर्मियों ने दूर से उस पर नियंत्रण बनाया हुआ है."
आतंकवाद या चोरी?
बाद में पुलिस ने बताया कि व्यक्ति के पास विस्फोटक नहीं मिले और अब स्वास्थ्यकर्मी उसकी जांच कर रहे हैं. उसकी हालत के बार में कोई जानकारी नहीं दी गई. घटना के पीछे उसका क्या मकसद था यह स्पष्ट नहीं हो पाया.
स्थानीय समाचार चैनल एटी5 ने कहा कि शायद वह चोरी के ही इरादे से दुकान में घुसा था. चैनल ने बताया कि चश्मदीद गवाहों ने गोलियों के चलने की आवाज भी सुनी थी. यह दुकान एम्स्टर्डम के लेड्सप्लेन इलाके में है जहां कई बार और कैफे हैं. यह जगह पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है.
सीके/एए (एएफपी, एपी)
बेकार टायरों और प्लास्टिक के कचरे से हर दिन 70 लाख लीटर पेट्रोल और डीजल बनाना, अफ्रीकी देश जाम्बिया इस राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है.
जाम्बिया अफ्रीकी महाद्वीप के दक्षिण में स्थित एक देश है, जो चारों तरफ से जमीन से घिरा है. पौने दो करोड़ की आबादी वाला ये देश पेट्रोल, डीजल और गैस के लिए पूरी तरह विदेशी सप्लाई पर निर्भर रहता है. लेकिन जाम्बिया की कंपनी सेंट्रल अफ्रीकन रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन आयात पर निर्भरता कम करना चाहती है.
कंपनी फिलहाल हर दिन डेढ़ टन कचरे से 600-700 लीटर पेट्रोल और डीजल बना रही है. फिलहाल यह एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चल रहा है. जाम्बिया हर साल ईंधन के आयात पर 1.4 अरब डॉलर खर्च करता है. देश हर दिन 14 करोड़ लीटर तेल फूंकता है.
सेंट्रल अफ्रीकन रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन के चीफ एक्जीक्यूटिव मुलेंगा मुलेंगा के मुताबिक, "पूरी क्षमता पर आने पर हमें उम्मीद है कि हम देश की 20-30 फीसदी ईंधन की जरूरत पूरी कर पाएंगे." इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए 6 करोड़ डॉलर के निवेश की जरूरत है. मुलेंगा के मुताबिक ऐसा होते ही कंपनी हर दिन 400 टन डीजल, 125 टन पेट्रोल और 30 टन लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का उत्पादन करने लगेगी. क्षेत्रफल के लिहाज से दुनिया का 39वां बड़ा देश जाम्बिया इस योजना के जरिए घर के तेल से 50 फीसदी पेट्रोलियम डिमांड पूरी करना चाहता है.
ऐसे प्रोडक्ट्स कितने इको फ्रेंडली
प्लांट में 24 घंटे काम होता है. ट्रक प्लास्टिक के डिब्बे, सिथेंटिक रबर वाले टायर लेकर आते हैं. इस कचरे को एक भट्ठी में डाला जाता है और फिर बेहद उच्च तापमान पर रबर और प्लास्टिक के कचरे को एक रिएक्टर में जलाया जाता है. अगले चरण में कुछ उत्प्रेरक मिलाए जाते हैं. तब जाकर पेट्रोलियम ईंधन मिलता है.
दुनिया भर में कई कंपनियां इस तकनीक में निवेश कर रही हैं. कुछ एक्सपर्ट्स इसे एक तीर से दो शिकार जैसा बताते हैं. एक तरफ कचरे का निपटारा और दूसरी तरफ ईंधन का उत्पादन. लेकिन कचरे को पेट्रोलियम में बदलने की इस प्रक्रिया के लिए बहुत सारी ऊर्जा की जरूरत होती है. बाद में ये पेट्रोलियम्स इस्तेमाल के दौरान फिर पर्यावरण में कार्बन डाय ऑक्साइड घोलेंगे. पर यह बात तो दूसरे देशों से आए पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर भी लागू होती है.
कम घातक रास्ता
पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, कोयला या फिर बायोमास जलाने से निश्चित रूप से ग्लोबल वॉर्मिंग को बढ़ाने वाली गैस सीओटू का उत्सर्जन होता है. बीते डेढ़ दशक से पूरी दुनिया हर दिन 9 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल इस्तेमाल कर रही है. 2026 तक इस मांग के लगातार बढ़ने का अनुमान है. ये सारा कच्चा तेल जमीन या समुद्र के भीतर से निकाला जाता है. फिर विशाल ऑयल या गैस टैकरों की मदद से इसे हजारों किलोमीटर दूर ट्रांसपोर्ट किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में भी अथाह सीओटू उत्सर्जित होती है.
इसी गाढ़े काले और लसलसे कच्चे तेल से ही प्लास्टिक भी बनाया जाता है. इस वक्त पूरी दुनिया प्लास्टिक प्रदूषण की महामारी से जूझ रही है. अलग अलग शोधों के मुताबिक इस वक्त दुनिया में 8.3 अरब टन प्लास्टिक मौजूद है, जिसमें से 6.3 अरब टन कचरे के रूप बिखरा पड़ा है. इस्तेमाल के बाद फेंक दिया जाने वाला प्लास्टिक पृथ्वी पर जमीन, हवा और पानी के ईकोसिस्टम का दम घोंट रहा है.
ऐसे में कुछ लोग कहते हैं कि अगर पेट्रोलियम इस्तेमाल हो ही रहा है तो बेहतर है कि ये रिसाक्लिंग से आए. मुलेंगा कहते हैं, "ये सारा कचरा हटाकर और उसे ऊर्जा में बदलकर हम पर्यावरण की सफाई कर रहे हैं."
ओएसजे/आरपी (रॉयटर्स)
सोशल मीडिया पर लोग वर्डल के स्कोर शेयर करने में लगे हैं. कोई वीनिंग स्ट्रीक बनाए रखने में जुटा है, कोई हारते रहने से पीछा छुड़ाने के तरीके खोज रहा है. क्या है यह गेम? क्या है वर्डल खेलने का तरीका और इसे जीतने के टिप्स?
डॉयचे वैले पर स्वाति मिश्रा की रिपोर्ट-
अगर आप किसी निर्जन टापू पर नहीं रहते और सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हैं, तो बहुत मुमकिन है कि आपने पिछले कुछ दिनों से वहां लोगों को एक आयताकार डब्बा शेयर करते देखा होगा. छोटे-छोटे बॉक्स वाला डब्बा, जिसमें बराबर की तरफ पांच खाने और नीचे की तरफ छह पंक्तियां होती हैं. एक बड़े डब्बे के भीतर कुल मिलाकर तीस डब्बे. इसका नाम है, वर्डल. यह एक पहेली है. एक गेम है. इसमें आपको ना तो कार दौड़ानी है, ना एलियन्स को शूट करना है और ना टीम बनाकर मशीनगन चलानी है. वर्डल शब्दों का खेल है. इसमें आपको अक्षर-अक्षर जोड़कर शब्द पिरोने हैं. नए शब्द नहीं गढ़ने, ऐसे शब्द भरने हैं जो पहले से ही डिक्शनरी का हिस्सा हैं.
वर्डल के पैदाइश की कहानी सारांश में यह है कि ब्रूकलिन के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जॉश वार्डल. उन्होंने अपने पार्टनर के लिए तोहफे में यह गेम बनाया. अक्टूबर 2020 में यह पब्लिक के बीच आया. देखते-ही-देखते यह दुनियाभर में फैलने लगा. 1 नवंबर, 2021 को इसे 90 लोग खेल रहे थे. दो महीने में खेलने वालों की संख्या 30 लाख चली गई. जनवरी 2022 के आखिर तक यह इतना लोकप्रिय हो गया था कि इसे न्यू यॉर्क टाइम्स ने खरीद लिया.
वर्डल की लोकप्रियता की एक बड़ी वजह है इसकी सादगी. इसमें कोई तामझाम नहीं है. कोई ऐप, कोई विज्ञापन नहीं है. सिंपल सा यूजर इंटरफेस है. लॉग इन और रजिस्ट्रेशन का भी झंझट नहीं है. दिलचस्पी की एक वजह यह भी है कि एक दिन में एक ही बार खेल सकते हैं. नया गेम खेलने के लिए आपको अगले दिन का इंतजार करना पड़ेगा. ऐसा नहीं होता, तो शायद लोग एक-दो दिन में खूब खेल-खेलकर बोर हो जाते. इस गेम की लोकप्रियता माउथ पब्लिसिटी से भी बढ़ रही है. लोग खेलकर सोशल मीडिया पर अपना स्कोर डालते हैं. उनको देखकर और भी लोगों में उत्सुकता जगती है.
इसे कैसे खेलना है?
आपको छह कोशिशों में अंग्रेजी का एक शब्द गेस करना होता है. हर दिन एक. और हर दिन वो शब्द 5 अक्षरों का ही होगा. जैसे: VODKA. SINUS. किसी भी दिन ये शब्द चार और उससे कम या छह और उससे ज्यादा अक्षरों का नहीं होगा. मसलन, Goat या Phenomenon ये सब शब्द नहीं होगे. इसलिए कि ये पांच अक्षरों से कम या ज्यादा के शब्द हैं.
कोई हिंट भी दिया जाएगा?
पांच अक्षरों के तो जाने कितने ही शब्द हैं डिक्शनरी में. बस छह कोशिशों में वह सही शब्द गेस कर लेना, तो तकरीबन असंभव है. फिर बिना हिंट के कैसे खेलेंगे? बस इसी सवाल से मजा शुरू होता है. दरअसल आपको गेस करने के लिए जो अधिकतम छह मौके मिलते हैं, उसमें से पहले अवसर में आपको पांच शब्दों का कोई भी शब्द रैंडम गेस करना होता है. मतलब पहले मौके में आपको कोई हिंट नहीं दिया जाता. आपको पहली कोशिश में बस तुक्का ही मारना होता है.
तुक्का सुनकर लगेगा कि ये शायद लॉटरी जैसी कोई चीज है कि दांव लगने पर बात टिकी हो. नहीं, ये खेल किस्मत का नहीं है. और यह बात साबित होगी आपको मिले दूसरे मौके से. जब आप पहले प्रयास में कोई शब्द गेस करते हैं और वह गलत होता है, तो भी अगर उसके एकाध अक्षर सही हुए तो वे सही अक्षरों वाले बॉक्स पीले में दिखने लगेंगे. इसका मतलब होगा कि आपने शब्द तो गलत बूझा, लेकिन वे पीले अक्षर ऐसे हैं, जो सही शब्द में भी आते हैं. अगर आपके शब्द में किसी अक्षर का सही स्थान (यानी सही शब्द में उस अक्षर की सही प्लेसमेंट) भी आपने सही गेस कर लिया, तो वह हरे रंग का दिखने लगेगा.
इन दोनों नियमों को उदाहरण से समझते हैं. माना आपने पहला वर्ड गेस किया: BETHS. इसमें से B हरा हो गया और E पीला, तो इसका मतलब है कि बेशक आपने शब्द तो गलत गेस किया है, लेकिन जो भी सही उत्तर है उसमें B और E दोनों हैं. साथ ही, उस सही जवाब में B की प्लेसमेंट उसी जगह पर है, जिस जगह पर B आपके गेस किए गए शब्द में है. यह भी साफ है कि उस सही जवाब में T, H और S नहीं हैं.
इस जानकारी का इस्तेमाल आप अपने अगले चार मौकों में कर सकते हैं. इन मौकों में भी आपके चुने शब्दों और अक्षरों के सही या गलत होने की जानकारी आपको दी जाती रहेगी. बहुत हद तक संभव है कि आप छठे अवसर तक या उससे पहले ही सही शब्द गेस कर ले जाएं. तुक्का लगाते वक्त भी अगर आप कोई ऐसा शब्द गेस कर लें, जिसका कोई अर्थ नहीं, जो डिक्शनरी का हिस्सा नहीं, तो गेम आपको आगे नहीं बढ़ने देता. आपका एक अवसर बर्बाद होने से बच जाता है. इस खेल में किस्मत और अंग्रेजी के ज्ञान की जरूरत तो बेशक है, लेकिन सबसे ज्यादा जरूरत लॉजिक की है.
खेल से जुड़े कुछ टिप्स:
#अगर आपका कोई शब्द हरा हो जाए, तो जरूरी नहीं कि उसे वहीं टिकाए रखकर उसके इर्द-गिर्द कोई शब्द खोजने लगें. खासकर तब, जब आप केवल एक या दो शब्द ही सही गेस कर पाए हों.
#अगर एक शब्द पीला हो जाए, तो उसे ही सही जगह बिठाने में अपने बाकी के मौके खत्म मत कीजिए. अधिक-से-अधिक अक्षर गेस करिए. फिर जब पांच या छह अक्षर सही मिल जाएं, तब उन्हें रीअरेंज करने की कोशिश करें. इस तरीके से आप ज्यादा सटीक होंगे.
#ऐसे शब्दों की सूची बना लें जिनके अक्षर आपसे में न मिलते हों. उदाहरण से समझिए. अगर आपने पहले गेस किया PIZZA और फिर गेस किया INDIA, तो आपने दो गलतियां एक साथ की. एक तो आपने पहले गेस में दो Z का और दूसरे गेस में दो I का इस्तेमाल किया. इससे आपके पास उपलब्ध हिंट्स की संख्या कम हो गई. दूसरा, आपने अगली बार जो शब्द गेस किया, उसमें दो अक्षर ऐसे थे, जो आप पहले भी ट्राई कर चुके थे. A और I. इससे बचने के लिए हमने चार ऐसे शब्दों की लिस्ट बनाई है, जिनसे आपको 4 मौकों में 20 अक्षर मिल जाते हैं:
VODKA
BETHS
PLUMY
WRING
ऐसी ही कोई लिस्ट आप भी बना सकते हैं. फिर जरूरी नहीं कि आपको चारों शब्द इस्तेमाल करने की जरूरत पड़े ही. हो सकता है कि पहले दो में ही आपको पांचों या कम से कम चार अक्षर मिल जाएं. फिर बचे हुए मौकों में आप उन्हें रीअरैंज करने का काम करें. लेकिन अभी अगर एक-दो ही लैटर गेस कर पाए हैं, तो उन्हें रीअरैंज करने में न लग जाएं. इसके बजाय नए अक्षर लाएं.
अगर आपने नया-नया खेलना शुरू किया है या करने की सोच रहे हैं, तो थोड़ी मदद ले सकते हैं. जैसे अगर आपने पहले के कुछ अक्षर गेस कर लिए हैं या आखिर के, तो गूगल पर सर्च करके देखिए- 5 लेटर वर्ड स्टार्टिंग विद. या, 5 लेटर वर्ड ऐंडिंग विद. कई वेबसाइट आपकी मदद कर देंगी.
क्या इस गेम में भी बेईमानी हो सकती है? जी, बिल्कुल हो सकती है. जैसे, मान लीजिए आपने अपने मोबाइल पर खेला और हार गए. तो लैपटॉप पर खेल लीजिए. क्रोम ब्राउजर में हार गए, तो सफारी ब्राउजर पर फिर से खेल लीजिए. या फिर एक जगह छह मौकों में गेस करने के बाद, दूसरी जगह दो मौकों में ही गेस कर लें और सोशल मीडिया पर दूसरे वाले रिजल्ट को साझा करें. बेईमानी का एक तरीका यह भी है कि गूगल पर सर्च कीजिए कि आज का शब्द क्या है. कुछ वेबसाइट रोज का रिजल्ट डाल भी रही हैं.
लेकिन सोचिए. बेईमानी करने से क्या फायदा है? कोई किसी सीरीज या फिल्म की कहानी बता दे, तो स्पॉइलर लगता है ना? स्पॉइलर से भागते हैं ना! फिर असली मजा तो बिना चीटिंग किए खेलने में है. (dw.com)
ब्रिटेन में एक सरकारी रिपोर्ट ने दावा किया है कि देश में कंपनियों के बोर्ड में महिलाओं के अनुपात को लेकर एक बड़ा बदलाव आया है. इस मामले में फ्रांस पहले स्थान पर है लेकिन ब्रिटेन पांचवें पायदान से सीधे दूसरे पर आ गया है.
सरकार से समर्थन प्राप्त एफटीएसी वीमेन लीडर्स रिव्यु नाम की इस रिपोर्ट के मुताबिक लंदन के स्टॉक एक्सचेंज के एफटीएसी 100 सूचकांक में शामिल कंपनियों के बोर्ड में सभी पदों में से करीब 40 प्रतिशत पदों पर महिलाएं हैं.
इस उपलब्धि के साथ ही ब्रिटेन वीमेन लीडर्स रिव्यु में पांचवें स्थान से उछल कर दूसरे स्थान पर आ गया है. पहले स्थान पर फ्रांस के पेरिस सीएसी 40 सूचकांक ने अपनी जगह बनाई हुई है. वहां यह आंकड़ा करीब 44 प्रतिशत है.
ब्रिटेन में तरक्की
रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन के आंकड़े देश में "उद्योगों में शीर्ष पर महिलाओं के पहुंचने को लेकर एक बड़े बदलाव" को दिखा रहे हैं. आज से 10 साल पहले एफटीएसी 100 कंपनियों के बोर्ड में सिर्फ 12.5 महिलाएं थीं. हालांकि अभी भी देश को इस मामले में और तरक्की करनी बाकी है. 2021 में एफटीएसी 100 की कंपनियों में सिर्फ आठ महिला सीईओ थीं.
ब्रिटेन के व्यापार मंत्री क्वासि क्वारटेंग ने कहा, "ब्रिटेन के उद्योगों ने हाल के सालों में यह सुनिश्चित करने में बहुत तरक्की हासिल की है कि किसी की पृष्ठभूमि जो भी हो योग्यता के आधार पर सभी सफल हो सकें. आज के ये नतीजे इसी बात को रेखांकित करते हैं."
रिपोर्ट में प्रस्ताव दिया गया है कि इस मामले में 2025 के अंत तक एफटीसी 350 कंपनियों के बोर्ड और नेतृत्व टीमों के स्वैच्छिक लक्ष्य को बढ़ाकर न्यूनतम 40 प्रतिशत कर दिया जाना चाहिए.
महिलाओं और बराबरी मामलों की मंत्री लीज ट्रस ने कहा, "जो तरक्की हो रही है उसे देख कर बहुत अच्छा लग रहा है, लेकिन हमें मालूम है कि अभी बहुत काम किए जाने की जरूरत है. यह सरकार गैर बराबरी का मुकाबला करने और वरिष्ठ स्तर के पदों तक हासिल करने के अवसरों में बराबरी को प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध है."
बेहतर प्रदर्शन की गुंजाइश
एफटीएसी वीमेन लीडर्स रिव्यु ब्रिटेन की सबसे बड़ी कंपनियों के बोर्ड और नेतृत्व टीमों के 24,000 पदों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए कदम सुझाती है और स्थिति की निगरानी भी करती है.
यह समिति सूचकांक में शामिल चोटी की 350 कंपनियों के लिए भी दूसरे लक्ष्य निर्धारित करने के लिए भी कहती है. समिति यह भी चाहती है कि इन कंपनियों के अलावा ब्रिटेन की 50 सबसे बड़ी कंपनियों को भी समीक्षा में शामिल किया जाना चाहिए.
समिति के मुख्य कार्यकारी डेनीस विल्सन ने कहा, "हम जानते हैं कि अभी बहुत सा काम बाकी है और आज उद्योग जगत में तजुर्बेकार, योग्य, महत्वाकांक्षी महिलाओं की कोई कमी नहीं है. इसलिए हमें बोर्ड में महिलाओं की मौजूदगी बढ़ाने के साथ साथ अगले चरण में कंपनियों में चोटी के पदों पर महिलाओं की मौजूदगी बढ़ाने की तरफ अपना ध्यान मजबूती से केंद्रित करने की जरूरत है."
ब्रिटेन में सूचकांक में शामिल कंपनियों में अभी भी महिलाओं सीईओ बहुत कम हैं. मार्च तक लंदन स्टॉक एक्सचेंज की चोटी की 350 कंपनियों में सिर्फ 16 की सीईओ महिलाएं थीं.
सीके/एए (एएफपी)
रूस ने यूक्रेन में विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले इलाकों दोनेत्स्क और लुहान्स्क को मान्यता दे दी है. इसके बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने उस पर सीमित प्रतिबंध लगाने का एलान कर दिया है. अभी रूस पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाए गए हैं. हालांकि इसकी भी तैयारी पिछले कुछ समय से चल रही है.
प्रतिबंध क्या हैं?
कूटनीतिक शब्दावली के मुताबिक़ प्रतिबंध शब्द का इस्तेमाल तब होता है जब कोई देश किसी दूसरे देश के हमलावर तेवरों को रोकने या अंतरराष्ट्रीय क़ानून तोड़ने के आरोप में उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई करता है.
प्रतिबंधों का मक़सद किसी देश की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाना होता है. ये प्रतिबंध इसी मकसद से लगाए जाते हैं. इसके तहत किसी देश के वित्तीय कारोबार, नागरिक, शीर्ष नेताओं को बाधा पहुंचाने जैसे क़दम उठाए जाते हैं. इन देशों पर यात्रा संबधी रोक लगाई जा सकती है. हथियारों की सप्लाई या ख़रीद-फ़रोख्त रोकी जा सकती है.
अमेरिका अपने नागरिकों को विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले इलाके लुहान्स्क और दोनेत्स्क में कारोबार करने से रोक सकता है. हालांकि कुछ अमेरिकी कंपनियां यहां कारोबार कर रही हैं.
व्हाइट हाउस ने कहा है कि ये क़दम व्यापक प्रतिबंध से अलग हैं. अगर रूस यूक्रेन में और आगे बढ़ा तो पूरे प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.
वित्तीय प्रतिबंध
रूस पर अभी और जो वित्तीय प्रतिबंध लगाए जाने हैं, उनमें एक है उसे स्विफ़्ट सिस्टम से अलग करना. स्विफ़्ट ( SWIFT) एक ग्लोबल मैसेजिंग सर्विस है. 200 देशों में हज़ारों वित्तीय संस्थाएं इसका इस्तेमाल करती हैं. इससे रूसी बैंकों के लिए विदेश में कारोबार करना काफ़ी मुश्किल हो जाएगा.
इस प्रतिबंध का इस्तेमाल 2012 में ईरान के ख़िलाफ़ किया गया था. इसकी वजह से उसने तेल की बिक्री से होने वाली अपनी अच्छी-ख़ासी कमाई खो दी थी. उसके विदेशी कारोबार को भी बड़ा झटका लगा था.
लेकिन इस वित्तीय प्रतिबंध का नुक़सान अमेरिका और जर्मनी को भी होगा क्योंकि यहां के बैंक भी रूसी वित्तीय संस्थाओं से मज़बूती से जुड़े हैं.
हालांकि रूस को तुरंत स्विफ़्ट सिस्टम से अलग नहीं किया जाएगा. अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा के उप-सलाहकार दलीप सिंह ने कहा कि शुरुआती प्रतिबंधों में स्विफ़्ट से रूसी फ़ाइनेंशियल सिस्टम को हटाने की आशंका नहीं है.
डॉलर क्लीयरिंग
अमेरिका रूस को डॉलर में कारोबार करने से रोक सकता है. इसका मतलब ये कि पश्चिमी देशों की जो भी कंपनी रूसी संस्थाओं से डॉलर में कारोबार करेगी उसे जुर्माना देना पड़ेगा. यानी रूस की दुनिया से ख़रीद-फ़रोख्त की क्षमता सीमित हो जाएगी.
रूस पर इस प्रतिबंध का गहरा असर होगा क्योंकि उसके तेल और गैस का ज़्यादातर कारोबार डॉलर में ही होता है.
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से रूस को क़र्ज़ नहीं मिलेगा
पश्चिमी देश अंतरराष्ट्रीय ऋण बाज़ार तक रूस की पहुंच रोक सकते हैं. पश्चिमी वित्तीय संस्थाओं और बैंकों की ओर से रूसी बॉन्ड ख़रीदने की क्षमता पहले ही कम कर दी गई है. ये प्रतिबंध और कड़े किए जा सकते हैं.
इससे रूस को वित्तीय संसाधन जुटाने में काफ़ी मुश्किल होगी. रूसी अर्थव्यवस्था के लिए अंतरराष्ट्रीय क़र्ज़ बेहद ज़रूरी है. रूस को महंगा क़र्ज़ लेना होगा. रूसी मुद्रा रूबल भी कमज़ोर हो सकती है.
हालांकि रूस ने विदेशी निवेशकों से क़र्ज़ लेना कम कर दिया है.
बैंकों पर रोक
अमेरिका सीधे तौर पर कुछ रूसी बैंकों पर प्रतिबंध लगा सकता है. इससे दुनिया में किसी के लिए भी इन बैंकों से कारोबार असंभव हो जाएगा. लिहाज़ा रूस को अपने इन बैंको को बेलआउट करना होगा. उसे देश में बढ़ती महंगाई और आय में कमी की समस्या से भी जूझना पड़ सकता है.
निर्यात पर नियंत्रण
पश्चिमी देश रूस को किए जाने कुछ कमोडिटी का निर्यात रोक सकते हैं. मिसाल के तौर पर अमेरिका उन कंपनियों को रूस को कोई भी ऐसा सामान बेचने से रोक सकता है जिनमें अमेरिकी टेक्नोलॉजी सॉफ़्टवेयर या उपकरण का इस्तेमाल हुआ है.
इनमें सेमी कंडक्टर माइक्रो चिप शामिल हैं. आजकल कार से लेकर स्मार्ट फ़ोन बनाने तक में इनका इस्तेमाल होता है. मशीन टूल्स और कंज़्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने में भी इनका इस्तेमाल हो रहा है.
इससे न सिर्फ़ रूस के डिफ़ेंस और एयरोस्पेस सेक्टर को नुक़सान पहुंचेगा बल्कि उसकी पूरी अर्थव्यवस्था पर संकट गहराएगा.
ऊर्जा प्रतिबंध
रूस की अर्थव्यवस्था का सबसे ज़्यादा दारोमदार विदेश में उसकी तेल और गैस की बिक्री पर है. रूस को इससे भारी कमाई होती है. पश्चिमी देश गैजप्रॉम और रोज़नेफ़्ट जैसी विशालकाय रूसी कंपनियों से तेल और गैस ख़रीदना ग़ैरक़ानूनी कर सकते हैं.
अमेरिका नॉर्ड स्ट्रीम 2 को रोकने के लिए अपनी कूटनीतिक ताक़त का भी इस्तेमाल कर सकता है. इस प्रोजेक्ट के तहत रूस और जर्मनी के बीच गैस ले जाने के लिए बिछाई जाने वाली पाइपलाइन का काम रोका जा सकता है. यह पाइपलाइन बिछ चुकी है लेकिन इसे रेगुलेटरी मंज़ूरी की ज़रूरत है.
लेकिन रूसी गैस पर कोई प्रतिबंध लगा तो यूरोप में गैस के दाम बढ़ जाएंगे.
रूस के सहयोगियों पर प्रतिबंध
प्रतिबंध के दायरे में लोग यानी नागरिक भी आ सकते हैं. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ ही उनके सहयोगियों पर भी प्रतिबंध लग सकते हैं.
यूक्रेन पर हमला हुआ तो ये क़दम भी उठाए जा सकते हैं. संपत्ति ज़ब्त कर लेना या यात्रा पर प्रतिबंध लगाना भी विकल्प के तौर पर आज़माया जा सकता है. ऐसे कुछ प्रतिबंध पहले से लागू हैं. हालांकि जो लोग इन प्रतिबंधों के दायरे में हैं उनके व्यवहार में ख़ास बदलाव नहीं आया है.
अमेरिका और यूरोपीय देशों को उम्मीद है कि रूस के संभ्रांत लोग पुतिन से यह कहेंगे कि प्रतिबंध लगे तो वे विदेश में अपनी संपत्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे. इनमें बड़ी तादाद उन लोगों की है जो अपने बच्चों को पश्चिमी देशों के स्कूलों और विश्वविद्यालयों को पढ़ा रहे हैं. उनकी पढ़ाई-लिखाई बाधित हो सकती है.
ब्रिटेन की कार्रवाई
ब्रिटेन कुछ रूसी उद्योगपतियों को अपने यहां निवेश करने से रोक सकता है. उनके लंदन में रहने पर भी रोक लग सकती है.
लंदन के बैंकों में रूसियों की भारी रक़म जमा है. ब्रिटेन में रूसियों ने इतनी प्रॉपर्टी ख़रीद रखी है कि लंदन को 'लंदनग्राद' तक कहा जाने लगा है.
ब्रितानी सरकार ने कहा है वह लंदन में इस संपत्ति के स्रोत का पता लगाएगी कि आख़िर यह नक़दी कहां से आ रही है?
हालांकि इनमें से कुछ ही आदेश अब तक लागू हुए हैं. कुछ अमेरिकी संगठन चाहते हैं कि ब्रिटेन इस मामले में और सख़्त रुख़ अपनाए.
यूक्रेन पर रूस की ओर से पूरी तरह हमला कर देने की स्थिति में पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया क्या होगी, इस पर सभी पश्चिमी देश एकमत नहीं दिखते.
हंगरी, इटली और ऑस्ट्रिया जैसे देशों के रूस से काफ़ी नज़दीकी रिश्ते हैं. यूक्रेन पर पूरी तरह हमला होने तक वे रूस पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहेंगे.
रूस, चीन और दूसरे मित्र देशों की मदद से पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का असर घटा सकता है.
सबसे अहम बात बात तो ये है कि पूरी तरह से आर्थिक प्रतिबंध लगाने वाले देशों को भी इसकी बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ सकती है. इसके विकल्प भी हो सकते हैं. लेकिन हर पश्चिमी देश इस विकल्प को अपनाने में दिलचस्पी लेता नहीं दिखता. (bbc.com)
नई दिल्ली, 22 फरवरी| रूस और यूक्रेन के बीच बढ़े तनाव के कारण मंगलवार को सोने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने ब्रेंट-इंडेक्स्ड कच्चे तेल की कीमतों को 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया, जो कई वर्षो में सबसे अधिक है। इसी तरह, कॉमेक्स पर हाजिर सोने की कीमतों के साथ सोने की कीमतें बढ़कर 1,900 डॉलर प्रति औंस हो गईं।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा यूक्रेन के भीतर दो अलगाववादी क्षेत्रों में सैनिकों की तैनाती का आदेश किए जाने के बाद कीमतों में वृद्धि शुरू हो गई। सोमवार को रूस ने दो अलगाववादी क्षेत्रों की स्वतंत्रता को मान्यता दी। इस कदम ने यूक्रेन और रूस को सैन्य संघर्ष के करीब ला दिया है।
दुनिया में रूस कच्चे तेल और सोने के शीर्ष उत्पादकों में से एक है और इसके खिलाफ कोई भी पश्चिमी प्रतिबंध वैश्विक आपूर्ति को प्रभावित करेगा। इससे भारत भी प्रभावित होगा, जो कच्चे तेल और सोने की जरूरतें पूरी करने के लिए आयात पर निर्भर है।
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से घरेलू कीमतों में तेजी आ सकती है, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ सकती है।
एआईआईएफएल सिक्योरिटीज (रिसर्च) के वाइस प्रेसीडेंट अनुज गुप्ता ने कहा, "भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने और कच्चे तेल की कीमतें सकारात्मक नोट पर कारोबार कर रही हैं।"
उन्होंने कहा, "हम उम्मीद कर रहे हैं कि सोने और कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं .. सोने की कीमतें 1,950 से 2,000 डॉलर तक और कच्चे तेल की कीमतें जल्द ही 100 से 105 डॉलर के स्तर आ सकती हैं।" (आईएएनएस)
Shivani Tripathi
UK में एक ऐसा ही खतरनाक जीव देखा गया जो वैसे तो इंसानों के लिए जानलेवा नहीं होता , मगर उसकी कई प्रजातियां ऐसी हैं जो बेहद खतरनाक और मुश्किलें पैदा करने वाली होती है. इन्हीं में से एक है विशालकाय मकड़ी ब्रिटेन में एक ऐसी मकड़ी देखी गई है जैसी अबतक वहां किसी ने नहीं देखी थी. वो मकड़ी इतनी विशाल थी कि उसे दुनिया की सबसे बड़ी मकड़ी कहा जाने लगा.
Spider ने की 5 हज़ार मील की यात्रा!
दुनिया की सबसे बड़ी मकड़ी ब्रिटेन की नहीं थी बल्कि वो तो दूर देश से यात्रा कर यहा आ पहुंची थी. तकरीबन 5 हज़ार मील की यात्रा के लिए उसने एक शिपिंग कंटेनर का सहारा लिया और चीन से पहुंच गई ब्रिटेन जिसके बाद UK में दुनिया की सबसे बड़ी मकड़ी देखी गई. मकड़ी का आकार चौड़ाई में करीब एक फुट तक था. जिसे ब्रिटेन में भयभीत Dock workers ने कंटेनर खोलने के बाद देखा. पहली नज़र में ही समझ में आ गया कि ये एक मकड़ी थी जो बेहद विशाल थी. बाद में उसके बारें में जो जानकारी मिली और भी खतरनाक थी. मकड़ी की उस प्रजाति के एक बार काटने पर इंसान कई शारीरिक समस्याओं से पीड़ित हो सकता है.
खतरनाक है मकड़ी की कई प्रजाति
मकड़ी के काटने से इंसानों की मौत हो जाए ऐसा बहुत कम देखा गया है. मगर इनका ज़हर बीमार बना सकता है. इस मकड़ी के काटने पर दिल की धड़कन में परेशानी और बेतहाशा उल्टी हो सकती है. जिससे स्वास्थ्य संबधी परेशानी बढ़ सकती है. हालांकि मैक्सिको में पिछले महीने एक ऐसा मामला सामने आया था जहां लंदन के लैविशम की रहने वाली इओना मैकनिला को मैक्सिको मे के दौरान उंचाई पर पाई जाने वाली दुर्लभ ब्राउन रेक्लूस स्पाइडर ने काट लिया था. जिसके बाद उनके पंजे लाल हो गए और तेज़ी से सूजन बढने लगी. जिसके बाद पैर काटने की नौबत आ गई डॉक्टर ने बताया कि अगर इलाज में देर हो जाती इओना की जान बचाना नामुकिन था.


