राष्ट्रीय

08-Apr-2021 10:28 PM 16

रायपुर/जम्मू, 8 अप्रैल | छत्तीसगढ़ में हुए नक्सली हमले के बाद अगवा किए गए कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह मन्हास को रिहा कर दिया गया है। उन्हें 3 अप्रैल को मुठभेड़ के बाद छत्तीसगढ़ में नक्सलवादियों द्वारा बंदी बना लिया गया था। सीआरपीएफ ने कहा कि उन्हें गुरुवार शाम को रिहा कर दिया गया। 

210वीं कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट ऐक्शन (कोबरा) के कांस्टेबल राकेश्वर सिंह मन्हास की मुक्ति के लिए राज्य सरकार द्वारा कुछ प्रमुख लोगों को नक्सलियों से बातचीत के लिए नामित किए जाने के बाद गुरुवार शाम उन्हें मुक्त कर दिया गया। 

उन्हें राज्य पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को सौंप दिया गया।

सीआरपीएफ के आईजी (ऑपरेशंस) सी.जी. अरोड़ा ने आईएएनएस को बताया कि मन्हास फिलहाल शारीरिक रूप से ठीक है।

जम्मू में मन्हास के परिवार में उनकी रिहाई की खबर सुनते ही जश्न का माहौल बन गया।

पड़ोसी और परिवार के सदस्य उसके घर पहुंचे, लोगों ने देशभक्ति के नारे लगाए और मिठाई बांटकर उनकी रिहाई की खबर पर जश्न मनाया। उनकी पत्नी ने कहा कि जब से वह नक्सलवादियों द्वारा बंदी बनाए गए थे, तब से वह सोई नहीं थी।

मीनू ने कहा, मैं प्रधानमंत्री को धन्यवाद देना चाहती हूं। मैं पिछले छह दिनों से सो नहीं पा रही थी।

मन्हास के भाई साहिल ने कहा, मैं बहुत खुश हूं कि वह रिहा हो गया है। हमें सिर्फ खबर मिली है।

तीन अप्रैल को छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में 300 से अधिक पीएलजीए नक्सलियों के साथ भीषण गोलीबारी के बाद मन्हास लापता हो गए थे। इस गोलीबारी में 22 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे और 31 घायल हुए थे। सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ के जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के 1,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों ने ऑपरेशन में हिस्सा लिया था।

मंगलवार को भाकपा-माओवादी की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी ने मन्हास को अपनी हिरासत में सुरक्षित घोषित किया था और उनकी रिहाई के लिए एक वातार्कार नियुक्त करने की मांग की थी।

गृह मंत्रालय छत्तीसगढ़ सरकार के साथ संभावित वातार्कार के नाम की तलाश में व्यस्त था, इसी बीच मन्हास को रिहा कर दिया गया। (आईएएनएस)


08-Apr-2021 7:55 PM 34

पालतू कुत्ते छोटे बच्चों की तरह होते हैं. जब वे बीमार महसूस करते हैं, तो उसे बयान नहीं कर पाते. कुत्ते अकसर ऐसे में चुपचाप कोने में पड़े रहते हैं. ऐसे में उन्हें डिप्रेशन या दिल की कोई बड़ी बीमारी भी हो सकती है.

(dw.com)

तनाव की चपेट में ना केवल मनुष्य बल्कि जानवर भी आते हैं. हालांकि पालतू जानवरों में तनाव उम्र बढ़ने, उनकी प्रतिरक्षा क्षमता, मौसम के परिवर्तन, विभिन्न अन्य कारकों के साथ जुड़ा हुआ है. पशुचिकित्सा करने वाली प्राची क्षत्रिय का कहना है कि सबसे अधिक तनाव संवेदनशील अंग हृदय होता है, जो न केवल प्रत्येक शरीर के ऊतकों की आवश्यकता को पूरा करता है, बल्कि दबाव चरण के दौरान एक समर्थन प्रणाली के रूप में भी कार्य करता है.

आमतौर पर बड़ी नस्लों की तरह डोबर्मन पिंसर्स, लैब्राडोर र्रिटीवर्स, बॉक्सर और जर्मन शेफर्ड कुत्तों को हृदय संबंधी बीमारियों की संभावना अधिक होती है, जैसे कंजेस्टिव कार्डियक फेलियर, हार्ट वाल्व अपर्याप्तता, पेरिकार्डियल इफ्यूजन और दूसरी बीमारियां इनमें प्रमुख हैं. उनका कहना है कि अपने पालतू कुत्ते के बर्ताव में निम्नलिखित बातों को नजरअंदाज ना करें:

- नियमित खांसी आना
- कम चलने या चंचल गतिविधि के बाद थकावट
- ज्यादा देर तक लेटे रहना
- भूख कम होना
- सीढ़ियों पर चढ़ने के लिए अनिच्छुक
- सुस्त उपस्थिति और अकेले बैठे रहना

प्राची क्षत्रिय का कहना है कि लगभग 10 प्रतिशत युवा और 65 प्रतिशत पुराने कुत्ते विभिन्न हृदय संबंधी समस्याओं से पीड़ित होते हैं. मालिकों की लापरवाही के कारण उनकी मौत तक हो जाती है. हालांकि विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि आप अपने पालतू जानवरों के व्यवहार या दिनचर्या की गतिविधियों में कोई बदलाव पाते हैं, तो पशु चिकित्सकों से तत्काल संपर्क करें. इमेजिंग परीक्षण जैसे एक्स-रे, इकोकार्डियोग्राफी, इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी आदि ही पुष्टि करेगा कि आपका पालतू किसी बीमारी से पीड़ित है, उसे हृदय रोग है या नहीं.

पूजा गुप्ता (आईएएनएस)

 


08-Apr-2021 7:45 PM 31

यह तेजी से उछलता है, आपका हुक्म मानता है और आपके घर को गंदा नहीं करता, मिलिए अल्फा डॉग से. यह चीन में पालतू जीवों और तकनीक के प्रति बढ़ते प्यार का नतीजा है.

 (dw.com)

यह रोबोटिक कुत्ता सेंसरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से देखता और सुनता है. इसे साथ लेकर आप टहलने भी जा सकते हैं. इसे बनाने वाली कंपनी वाइलान के मुख्य तकनीकी अधिकारी मा जी का कहना है, "यह असली कुत्ते से काफी मिलता जुलता है." अल्फा डॉग को "स्पॉट" के पदचिन्हों पर ही बनाया गया है. चार पैरों वाले "स्पॉट" को बोस्टन डायनेमिक्स ने औद्योगिक इस्तेमाल के लिए बनाया था जिसका वीडियो यूट्यूब में आने के बाद इंटरनेट पर सनसनी फैल गई थी.

चीन के नानजिंग में अल्फाडॉग को बनाने वाले लोगों ने इसके जरिए आम लोगों तक पहुंचने की योजना बनाई है. उनका दावा है कि 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भागने और किसी पप्पी की तरह उछल कूद करने वाला कुत्ता बाजार में सबसे तेज है. धातु से बने इसके चारों पांव इसे असली कुत्ते से ज्यादा स्थिरता देते हैं.

रोबोट में 5 जी का इस्तेमाल

मा जी ने बताया, "यह घर्षण को पहले से जान लेता है और जमीन की ऊंचाई को भी ताकि उसके हिसाब से अपनी ऊंचाई कम या ज्यादा कर सके, यह अपनी उछाल को व्यवस्थित कर सकता है और वातावरण के हिसाब से खुद को ढालने में भी सक्षम है." रोबोट खुद से ऑपरेट कर सके इसलिए इसमें 5जी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसके जरिये इसके रिएक्शन टाइम को बेहद कम रखने में सफलता मिली है.

चीन में साम्यवादी नेता माओ त्से तुंग के शासन में कुत्ता पालने पर पाबंदी थी. हालांकि उसके बाद से यह देश में बड़ी तेजी से बढ़ी. रोबोटिक कुत्ता भी बड़ी तेजी से चीनी घरों में अपनी जगह बना रहा है. बाजार में उतरने के पहले महीने में ही 2400 डॉलर की भारी कीमत के बावजूद 1800 से ज्यादा अल्फा डॉग बेचे जा चुके हैं.

रोबोटिक्स में भारी निवेश

चीन अपने कामगारों को ज्यादा कुशल बनाना चाहता है. इस कोशिश में रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भारी निवेश किया जा रहा है. रोबोटों का इस्तेमाल पार्सल डिलीवर करने, रेस्तरां में खाना परोसने, स्टेशनों पर सूचना देने और यहां तक कि कोविड-19 के लिए टेस्ट करने में पहले से ही हो रहा है. अल्फा डॉग बनाने वाले मानते हैं कि यह कुत्ता उन लोगों की मदद कर सकता है जिन्हें दिखाई नहीं देता. वह लोगों को सड़क पार करने और सुपरमार्केट से सामान लाने जैसे कामों में बड़ी मदद कर सकता है.

इस कुत्ते के सॉफ्टवेयर में बदलाव कर इसे आने वाले दिनों में भौंकने में भी सक्षम बनाया जाएगा. इसके बाद इसमें इंसानी आवाज भी डालने की योजना है ताकि यह अपने मालिक से बात भी कर सके.

 


08-Apr-2021 4:41 PM 22

मुम्बई, 8 अप्रैल | जी5 को मूल कंटेंट बनाने के लिए जाना जाता है जो वास्तविक, प्रेरणादायक कहानियों से प्रेरित होती हैं। ऐसा ही एक उदाहरण 'सीज ऑफ स्टेट: 26/11' था और इस सीरीज की सफलता व लोकप्रियता के बाद, जी5 ने अब 'स्टेट ऑफ सीज: टेम्पल अटैक' की घोषणा कर दी है। निर्माताओं ने एक विशेष टास्क फोर्स अधिकारी के रूप में कलाकारों की टोली में अक्षय खन्ना को शामिल कर लिया है। फिल्म पर काम करने के बारे में बात करते हुए, अक्षय ने कहा, परम बलिदान की शपथ लिए बिना वर्दी पहनने में सक्षम होना। यह एक ऐसा प्रिविलेज है जो केवल एक अभिनेता को ही दिया जाता है। मेकिंग के दौरान मेरा एकमात्र ध्यान, उस प्रिविलेज का अनादर नहीं करना था।

कॉन्टिलो पिक्च र्स के सीईओ अभिमन्यु सिंह ने साझा किया, बहुत कम ही हमने अपने दुश्मनों द्वारा हमलों को बेअसर करने में भारतीय कमांडो की भूमिका पर प्रकाश डाला है। स्टेट ऑफ सीज श्रृंखला को उनके परिप्रेक्ष्य और योगदान देने के लिए डिजाइन किया गया था। स्टेट ऑफ सीज: 26/11 की सफलता ने हमें इन कहानियों को आगे बताने के लिए प्रोत्साहित किया है और हमारे लिए स्पष्ट विस्तार राष्ट्र को हिला देने वाले मंदिर हमले की घटनाओं को क्रॉनिकल करना था। अक्षय के व्यवहार और क्रा़फ्ट ने उन्हें इस कहानी का नेतृत्व करने के लिए एकदम उपयुक्त बना दिया है और हम इस एक बार फिर से जी5 के साथ साझेदारी करने के लिए उत्साहित हैं।

ड्रीम टीम कॉन्टिलो पिक्च र्स (अभिमन्यु सिंह) जिन्होंने 'स्टेट ऑफ सीज: 26/11' की रचना की थी, वह फिल्म का निर्माण करने के लिए वापस आ गए है, जिसे केन घोष द्वारा निर्देशित किया जाएगा जिन्होंने हाल ही में लोकप्रिय और सफल अभय 2 के साथ-साथ लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) का निर्देशन किया था। सुदीप सेन जो 'स्टेट ऑफ सीज: 26/11' प्रॉजेक्ट पर एक सलाहकार थे और 26/11 के मुंबई हमलों के दौरान एनएसजी में दूसरी कमान थे, वह इस फिल्म के लिए भी अपनी विशेषज्ञता प्रदान करेंगे।

24 सितंबर 2002 में गुजरात के गांधीनगर में बने अक्षरधाम मंदिर में आतंकवादी हमला हुआ था। इस भीषण हमले के परिणामस्वरूप 30 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और 80 से अधिक घायल हो गए थे। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) घटनास्थल पर पहुंची, स्थिति को संभाला और आतंकवादियों को सफलतापूर्वक मार गिराया और घेराबंदी को समाप्त करने में सफल रहे थे। (आईएएनएस)

 


08-Apr-2021 4:30 PM 33

मुंबई, 8 अप्रैल | शिवसेना सांसद और पार्टी के प्रवक्ता संजय राउत ने अब सरकार गिराने के लिए गंदी राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, 'महाराष्ट्र में जेलों में बंद कैदियों द्वारा पत्र लिखवाकर सरकार की बदनामी का नया चलन शुरू हुआ है। ये महागठबंधन सरकार को बदनाम करने और अस्थिर करने के लिए एक राजनीतिक साजिश है।' गिरफ्तार और निलंबित सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वाजे द्वारा लेटर-बम' की पैरवी के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में महाविकास अघाड़ी के मंत्रियों के खिलाफ कई आरोप लगाए थे।

राउत ने आगे कहा, "राज्य सरकार को गिराने की कोशिश करने वालों के असली चेहरे सामने आ रहे हैं। जेल में लोगों का पत्र लिखने का एक नया चलन शुरू हुआ है। देश ने पहले कभी इस तरीके से गंदी राजनीतिक खेल खेलते हुए नहीं देखा।"

वाजे के पत्र में पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख, परिवहन मंत्री अनिल परब और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के नाम सामने आए हैं।

राउत ने तीखे तेवर के साथ कहा, "लेकिन ये नाम कौन ले रहा है। यह (पत्र) जेल में बंद एक व्यक्ति द्वारा लिखा गया है, जिसे अपराध के लिए जेल में डाल दिया गया है और अब इसे सबूत के रूप में दिखाया जा रहा है।"

शिवसेना नेता परब ने बुधवार को वाजे के दावों को खारिज कर दिया और कहा कि वह आरोपों की जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने दिवंगत शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे की कसम खाई और कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है।

राउत ने आगे कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि तथाकथित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) महा विकास अघाड़ी सरकार को गिराने के लिए नये-नये हथकंड़े अपना रहीहै। लेकिन उनके इरादे सफल नहीं होंगे।

शिवसेना सांसद की प्रतिक्रियाएं 3 अप्रैल को वाजे द्वारा विशेष एनआईए जज को लिखे एक पत्र के सार्वजनिक होने के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने देशमुख, परब, अजीत पवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। दागी पुलिसकर्मी को 9 अप्रैल तक एनआईए की हिरासत में भेज दिया गया है। (आईएएनएस)
 


08-Apr-2021 4:28 PM 24

पणजी, 8 अप्रैल | गोवा सरकार द्वारा केंद्रीय मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत जुर्माना लागू करने के दो दिन बाद राज्य भाजपा अध्यक्ष सदानंद शेट तनावडे ने गुरुवार को कहा कि गोवा में आम व्यक्ति किसी भी स्थिति में नया जुर्माना अदा नहीं कर सकता। तनावडे ने यह भी कहा, "उन्होंने मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और परिवहन मंत्री मौविन गोडिन्हो से अनुरोध किया था कि वे संशोधित कानून को लागू रखें।"

उन्होंने आगे कहा, "हमने गोवा सरकार से संशोधित मोटर व्हीकल संशोधन को यथावत रखने का अनुरोध किया है। हमने सीएम और परिवहन मंत्री से बात की है। आम लोगों से फीस नहीं ले पाएंगे।"

नये जुर्माना के अनुसार, बिना वैध लाइसेंस के हल्के मोटर वाहन चलाने पर 500 रुपये का जुर्माना लगता था। लेकिन अब नए टैरिफ ढांचे के तहत जुर्माना बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दिया गया है।

ओवरस्पीडिंग के लिए जुर्माना भी 400 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दिया गया है। छोटे मोटर वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करने वालों पर 3,000 रुपये और उसके बाद पकड़े जाने पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि पहले जुर्माना 500 रुपये तक सीमित था।

नए केंद्रीय कानून के तहत बार-बार होने वाले नियमों का उल्लंघन करने वाले ड्राइवर का लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित हो जाएगा।

बुधवार को एक मीडिया बातचीत के दौरान टैरिफ का अनावरण करते हुए परिवहन मंत्री गोडिन्हो ने कहा, सरकार ने जुर्माना की सीमा न्यूनतम रखी थी और गोवा सरकार की मंशा आम आदमी की जेब को ढिली करने की नहीं थी।

विपक्ष ने बुधवार को भी जुर्माना शुल्क को तत्काल वापस लेने की मांग की थी।

नए ट्रैफिक जुर्माना को ऐसे समय में लागू किया गया है, जब राज्य में राजनीतिक दल राज्य विधानसभा चुनावों के लिए कमर कस रहे हैं, जो 2022 की शुरूआत में होने वाले हैं। इस महीने के अंत में पांच नगरपालिका परिषदों के चुनाव भी होने हैं।  (आईएएनएस)
 


08-Apr-2021 4:25 PM 16

लखनऊ, 8 अप्रैल | उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक दल वोट बैंक बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार घोषणाएं करते हुए दिख रहे हैं। इसी क्रम में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने ऐलान कर कहा कि 14 अप्रैल को संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर सपा दलित दीवाली मनाएगी। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि भाजपा की राजनीतिक अमावस्या के काल में संविधान खतरे में है, बाबासाहेब ने स्वतंत्र भारत को नयी रोशनी दी थी, इसलिए पार्टी डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती, 14 अप्रैल को उत्तर प्रदेश, देश व विदेश में 'दलित दीवाली' मनाने का आह्वान करती है।

गौरतलब है कि अम्बेडकर जयंती को सभी राजनीतिक पार्टियां धूमधाम से मनाती हैं। सपा के इस फैसले को यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। यूपी में राजनीति पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। इन दिनों बसपा से बड़ी संख्या में सपा में लोगों ने ज्वाइन किया। मायावती की चाल धीमी देखकर दलितों के लिए नया विकल्प भी बनने का सपा प्रयास कर रही है। (आईएएनएस)
 


08-Apr-2021 4:24 PM 35

बांका (बिहार), 8 अप्रैल | बिहार के बांका जिले के धोरैया प्रखंड क्षेत्र में परंपरा और कानूनी मजबूरियों के कारण एक वैवाहिक कार्यक्रम में अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई और अंत में बिना सात फेरे लिए ही एक दुल्हन को अपने पति के साथ विदा करना पड़ गया। पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक, कुशाहा गांव निवासी रसिकलाल मुर्मू की बेटी बासमती मुर्मू की शादी बौंसी थाना क्षेत्र स्थित शोभा गांव के रहने वाले अरविंद मंडल के साथ तय हुई थी। विवाह को लेकर तय तिथि 5 अप्रैल को धूमधाम के साथ बारात भी आ गई और सभी रस्म-रिवाज निभाए भी जाने लगे।

इसी क्रम में गांव में पुलिस पहुंची और ग्राम प्रधान गोपाल सोरेन को शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। उनके घर से दो से तीन लीटर शराब बरामद की गई। रीति-रिवाजों और परंपरा के मुताबिक गांव प्रधान के बिना शादी की रस्म नहीं अदा की जा सकती है। ऐसी स्थिति में शादी की रस्में टल गईं और शादी रुक गई।

इसके बाद गांव के लोगों ने प्रधान को छुड़ाने की प्रशासनिक स्तर पर काफी कोशिशें की, लेकिन बात नहीं बनी। कहा जा रहा है कि प्रधान ने शराब शादी की रस्म निभाने के लिए ही घर में रखी थी।

आदिवासी परंपरा के मुताबिक लड़की की शादी में महुआ शराब देवी देवताओं को चढ़ाई जाती है। दुल्हन बनी बासमती के भाई दिनेश मुर्मू बताते हैं कि हमारे यहां परंपरा के मुताबिक प्रधान ही शादी करवाते हैं।

ऐसी स्थिति में गांव में पंचायत बैठाई गई और बिना शादी के ही बासमती को उसके दुल्हे के साथ विदा करने का फैसला हुआ।

धोरेया के प्रखंड विकास अधिकारी अभिनव भारती बताते हैं कि मामला कानून का है। गांव प्रधान को शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, अब अदालत से ही जमानत मिल सकती है।

इधर, गांव के लोग कहते हैं कि प्रधान की रिहाई के बाद ही अब शादी की रस्म निभाई जाएगी। बहरहाल, यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। (आईएएनएस)

 


08-Apr-2021 4:23 PM 27

नई दिल्ली, 8 अप्रैल | सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि जम्मू के उपजेल में हिरासत में लिए गए रोहिंग्या अवैध प्रवासी हैं। उन्हें कानून का पालन किए बगैर डिपोर्ट नहीं किया जा सकता। (आईएएनएस)
 


07-Apr-2021 9:36 PM 35

प्रभाकर मणि तिवारी
कोलकाता से,  7 अप्रैल।
 "कोरोना क्या है? कोरोना कहीं नहीं है. कोरोना ख़त्म हो चुका है." पश्चिम बंगाल में होने वाली चुनावी रैलियों में हिस्सा लेने आए बिना मास्क पहने किसी भी व्यक्ति से अगर इसकी वजह पूछें तो उसका जवाब कमोबेश इन शब्दों में ही मिलता है. राज्य के एक वरिष्ठ राजनेता तो नाम नहीं बताने की शर्त पर कहते हैं, "अभी हमारे सामने दूसरी लड़ाई है. कोरोना के साथ दो मई के बाद लड़ लेंगे." इन टिप्पणियों से पता चलता है कि कोरोना के बढ़ते ख़तरों से बंगाल में लोग कितने लापरवाह हैं. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव अभियान के तेज़ी पकड़ते ही इसके साथ कंधे से कंधा मिला कर कोरोना के मामले भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं. विशेषज्ञों ने चेताया कि विधानसभा चुनाव ख़त्म होने पर बंगाल में कोरोना संक्रमण का नया रिकॉर्ड बन सकता है. उनका कहना है कि आठ चरणों तक चलने वाली चुनाव प्रक्रिया कोरोना के लिहाज़ से भारी साबित हो सकती है.


PRABHAKAR MANI TEWARI/BBC

सोशल डिस्टेंसिंग के नियम
तमाम राजनीतिक दलों की रैलियों और चुनाव अभियान के दौरान न तो कहीं किसी के चेहरे पर मास्क नज़र आता है और न ही सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना की इस दूसरी लहर को ध्यान में रखते हुए आठ अप्रैल को कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए बैठक करेंगे. उससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोरोना के बढ़ते संक्रमण पर गहरी चिंता जताई है. लेकिन साथ ही चेताया है कि अब कोरोना की आड़ में मतदान स्थगित करने के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं किया जाएगा.
ममता कहती हैं, "पूरे देश में दोबारा संक्रमण बढ़ रहा है. क्या ऐसी परिस्थिति में तीन या चार चरणों में ही मतदान कराना उचित नहीं होता? लेकिन अब जब आठ चरणों में चुनाव हो ही रहा है तो इसे किसी भी हालत में रोका नहीं जा सकता. खेल जब शुरू हो ही गया है तो इसे ख़त्म भी करना होगा."
लेकिन राज्य में सत्ता की प्रमुख दावेदार के तौर पर उभरी बीजेपी ने ममता की टिप्पणी को अहमियत देने से इनकार कर दिया है.
प्रदेश बीजेपी के महासचिव सायंतन बसु कहते हैं, "कोरोना के बीच अगर बिहार में चुनाव हो सकते हैं तो बंगाल में क्यों नहीं? राज्य में अभी हालत इतनी ख़राब नहीं हुई है कि चुनाव रोकना पड़े. ममता धांधली नहीं कर पा रही हैं. इसलिए ऐसी टिप्पणी कर रही हैं."

 


PRABHAKAR MANI TEWARI/BBC

निर्वाचन आयोग को डॉक्टरों की चिट्ठी
सीपीएम और कांग्रेस ने भी कहा है कि फ़िलहाल कोरोना की स्थिति इतनी ख़राब नहीं हुई है.
सीपीएम नेता रबीन देब कहते हैं, "अभी बंगाल में संक्रमण की स्थिति उतनी ख़राब नहीं है कि चुनाव रोकना पड़े. लेकिन हम सबको कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए."
कांग्रेस नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने ममता और बीजेपी पर कोरोना के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया है.
वहीं राज्य के डॉक्टरों के सामूहिक मंच 'द ज्वॉइंट फ़ोरम ऑफ़ डॉक्टर्स-वेस्ट बंगाल' ने निर्वाचन आयोग को पत्र भेज कर चुनाव अभियान के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल की सरेआम धज्जियां उड़ने पर गहरी चिंता जताते हुए उससे हालात पर नियंत्रण के लिए ठोस क़दम उठाने की अपील की है.
बिहार चुनाव से पहले आयोग ने कोविड-19 से बचाव के लिए जो प्रोटोकॉल बनाए थे, पश्चिम बंगाल में तमाम राजनीतिक दल उनकी अनदेखी करते रहे हैं.
डॉक्टरों के समूह ने अपने पत्र में लिखा है, "क्या आपने कभी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मास्क पहनते देखा है? अगर प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और मुख्यमंत्री ही कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन करें तो हम क्या कर सकते हैं?"


PRABHAKAR MANI TEWARI/BBC

चुनावी प्रक्रिया के दौरान
जाने-माने पर्यावरणविद् सुभाष दत्त ने मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को लिखे पत्र में कहा है, "चुनाव अभियान के दौरान कोविड प्रोटोकॉल के सरेआम उल्लंघन पर आयोग की चुप्पी पीड़ादायक है."
जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञ कुणाल सरकार कहते हैं, "चुनाव आयोग बंगाल में चुनाव अभियान के दौरान कोविड-19 प्रोटोकॉल को लागू करने में नाकाम रहा है. तमाम राजनीतिक दल बिना मास्क पहने सामाजिक दूरी के नियमों का पालन किए बिना हज़ारों लोगों के साथ रैलियां कर रहे हैं."
वैसे तो पश्चिम बंगाल के अलावा जिन बाक़ी चार राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं वहां भी चुनावी प्रक्रिया के दौरान कोरोना संक्रमण के मामलों में तेज़ी देखी गई है.
असम में तीन दौर में 126 सीटों के लिए मतदान पूरा हो चुका है और बाक़ी राज्यों में एक ही दिन छह अप्रैल को मतदान कराए गए.
लेकिन पश्चिम बंगाल में फ़िलहाल तीन चरणों में कुल 91 सीटों के लिए वोट पड़े हैं. अभी 29 अप्रैल तक पाँच चरणों में बाक़ी 201 सीटों पर मतदान होना है.
पूर्वोत्तर राज्य असम में मंगलवार यानी छह अप्रैल को कोरोना के 92 नए मामलों के साथ सक्रिय मामलों की संख्या 683 तक पहुंच गई है.


PRABHAKAR MANI TEWARI/BBC

राज्य में कोरोना संक्रमण का ग्राफ़
इससे पहले पाँच अप्रैल को 70 और चार अप्रैल को 69 नए मामले सामने आए थे. सिर्फ़ अप्रैल के आंकड़ों को देखें तो ऐसे मामलों में रोज़ाना वृद्धि हो रही है.
इस महीने पहले छह दिनों में ही 420 मामले सामने आए हैं. जबकि इसके पहले कई महीनों से ऐसे मामलों की संख्या रोज़ाना 10 से 15 के बीच थी.
आख़िरी चरण में कामरूप ज़िले के एक मतदान केंद्र पर वोट देने आए अलकेश डेका कहते हैं, "संक्रमण की परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए मतदान केंद्रों की तादाद बढ़ाई जानी चाहिए थी ताकि कोविड-19 से बचाव के नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके. लेकिन यहां तो लोग कतार में एक-दूसरे से चिपक कर खड़े हैं."
दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में तमाम सीटों पर एक ही चरण में छह अप्रैल को वोट डाले गए. बावजूद इसके मंगलवार को राज्य में 3,645 नए मामले सामने आए.
इनमें से 1,303 मामले अकेले राजधानी चेन्नई में थे. राज्य में एक दिन में 15 लोगों की मौत भी हो गई. दक्षिण के एक अन्य राज्य केरल में भी मतदान तो एक ही चरण में हुआ.
लेकिन चुनाव अभियान के ज़ोर पकड़ने के साथ ही राज्य में संक्रमण का ग्राफ़ भी तेज़ी से चढ़ा है.


PRABHAKAR MANI TEWARI/BBC

चुनावी रैलियों में भीड़
राज्य में मंगलवार को 3,502 नए मामले सामने आए. इनमें सबसे ज़्यादा 360 मामले कोझिकोड में आए और उसके बाद 316 मामलों के साथ एर्नाकुलम दूसरे नंबर पर रहा.
राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि कुल मामलों में से 3,124 लोग अपने स्थानीय तौर पर ही संक्रमित हुए हैं.
उनका कहना है कि चुनावी रैलियों में भीड़ से संक्रमण फैलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इन रैलियों में सामाजिक दूरी के नियमों का पालन नहीं किया गया.
पश्चिम बंगाल चुनाव में जहां सत्ता के दावेदारों की साख और नाक दांव पर हों, कोरोना संक्रमण उनकी प्राथमिकता सूची में काफ़ी नीचे चला गया है.
राज्य में छह अप्रैल को 2,058 नए मामले सामने आए. यह इस साल का रिकॉर्ड है. वैसे, इससे पहले बीते तीन दिनों से औसतन 19 सौ मामले सामने आ रहे थे. चुनाव अभियान से इसका संबंध समझना कोई मुश्किल नहीं है.

नए मामलों की संख्या
मार्च के पहले सप्ताह में जब चुनाव अभियान की शुरुआत हुई थी तो दो मार्च को संक्रमण के नए मामलों की संख्या महज़ 171 थी.
अब स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दो मई को चुनाव के नतीजे आने तक दैनिक संक्रमण कई गुना ज़्यादा हो सकता है.
दरअसल, 26 फ़रवरी को विधानसभा चुनाव की तारीख़ों के एलान के बाद से ही संक्रमण का ग्राफ़ लगातार ऊपर चढ़ रहा है.
26 फ़रवरी को 216 नए मामले सामने आए थे जो 31 मार्च को बढ़ कर 931 तक पहुँच गए. इस दौरान पॉज़िटिविटी रेट भी चार गुना बढ़ गई.
कोलकाता नगर निगम में स्वास्थ्य सलाहकार तपन मुखर्जी कहते हैं, "अगर संक्रमण का ग्राफ़ इसी तरह चढ़ता रहा तो मई में नए मामलों की तादाद तीन हज़ार के पार पहुँच सकती है."


PRABHAKAR MANI TEWARI/BBC

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

एक साल से भी लंबे समय तक कोरोना के मरीज़ों की देखभाल और इस बीमारी पर शोध करने वाले स्वास्थ्य विभाग के महामारी विशेषज्ञ अनिर्वाण दलुई कहते हैं, "बीते साल 24 मई को 208 मामले सामने आए थे. संक्रमितों की संख्या में दस गुनी वृद्धि में तब दो महीने से ज़्यादा का समय लगा था. लेकिन अब चार मार्च से चार अप्रैल तक यानी ठीक एक महीने में ही इसमें दस गुनी वृद्धि हुई है. अगर हमने तुरंत इस पर अंकुश लगाने के उपाय नहीं किए तो इस महीने के आख़िर तक दैनिक मामलों की संख्या छह से सात हज़ार तक पहुंचने की आशंका है."
माइक्रोबायोलॉजिस्ट भास्कर नारायण चौधरी कहते हैं, "लॉकडाउन नहीं होना, कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन और चुनावी रैलियों में बिना किसी सुरक्षा के बढ़ती भीड़ ही तेज़ी से बढ़ते संक्रमण की प्रमुख वजहें हैं."
डॉक्टर अनिर्वाण दलुई कहते हैं, "आठ चरणों में होने वाले चुनावों की वजह से रोज़ाना किसी न किसी पार्टी की रैली या सभाएं हो रही हैं. वहां जुटने वाली भीड़ में सामाजिक दूरी का पालन संभव ही नहीं है, ज़्यादातर लोग बिना मास्क के होते हैं. ऐसे में अभी दूसरी लहर का चरम आना बाक़ी है."


PRABHAKAR MANI TEWARI/BBC

कोलकाता के इंस्टीट्यूट ऑफ़ चाइल्ड हेल्थ के एसोसिएट प्रोफेसर प्रभाष प्रसून गिरी कहते हैं, "राजनीतिक दलों को अपनी रैलियों में जुटने वाली भीड़ की तादाद कम करने के साथ ही कोविड प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करना चाहिए था. तमाम नेताओं को बार-बार लोगों से कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने की भी अपील करनी चाहिए थी."
महानगर के एक निजी अस्पताल में कोविड वार्ड के प्रमुख और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉक्टर अजय सरकार बताते हैं, "मार्च के पहले सप्ताह में हमारे कोविड वार्ड में पांच मरीज़ थे जो अब 24 तक पहुँच गए हैं."
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव आयोग को रैलियों और चुनाव अभियान के दौरान लोगों की तादाद तय कर देनी चाहिए. ऐसा नहीं हुआ तो हालात बेक़ाबू होने का अंदेशा है.
हालांकि राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी आरिज आफ़ताब कहते हैं, "तमाम उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों से कोरोना से उपजी परिस्थिति को ध्यान में रख कर ही चुनाव अभियान चलाने को कहा गया है."


PRABHAKAR MANI TEWARI/BBC

कोलकाता पुलिस के संयुक्त आयुक्त शुभंकर सिन्हा कहते हैं, "हम कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने वालो के ख़िलाफ़ कार्रवाई के साथ ही लोगों में जागरूकता फैलाने का अभियान भी चला रहे हैं." कोलकाता नगर निगम का दावा है कि वह भी बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चला रहा है. इसके साथ ही तमाम इलाक़ों को सैनिटाइज़ करने का काम भी चल रहा है. लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन उपायों का ज़मीन पर कोई असर नहीं नज़र आता. तेज़ी से बढ़ते आंकड़े ही इसका सबूत हैं. राज्य के स्वास्थ्य सेवा निदेशक अजय चक्रवर्ती भी मानते हैं, "लोगों में कोरोना के प्रति जागरूकता का बेहद अभाव है." (bbc.com/hindi)


07-Apr-2021 9:06 PM 22

कोलकाता, 7 अप्रैल | केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को चौथी बार पूछताछ के लिए अवैध कोयला तस्करी के कथित किंगपिन अनूप मांझी उर्फ लाला को तलब किया है। जांच से जुड़े सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "हमने माझी को 8 अप्रैल को यहां साल्ट लेक में अपने कार्यालय में पूछताछ के लिए समन जारी किया है।"

एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि पूछताछ के दौरान माझी अधिकारियों से शुरू से ही सहयोग नहीं कर रहे हैं।

सीबीआई ने मंगलवार को मांझी से कई घंटों तक पूछताछ की। उन्हें पहले भी दो बार - 30 मार्च और 1 अप्रैल को पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

माझी के करीबी सहयोगी गणेश बावरिया से 3 अप्रैल को पूछताछ की गई, और बीरभूम के पूर्व पुलिस अधीक्षक श्याम सिंह से 1 अप्रैल को पूछताछ की।

5 अप्रैल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जो मनी लॉन्ड्रिंग भाग की जांच कर रहा है, ने 165.86 करोड़ रुपये मूल्य की मांझी की अचल संपत्तियों को कुर्क कर दिया था। (आईएएनएस)


07-Apr-2021 9:05 PM 26

नई दिल्ली, 7 अप्रैल | 126 सदस्यीय असम विधानसभा के लिए मंगलवार को मतदान समाप्त होने के एक दिन बाद, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी बैजयंत जय पांडा ने बुधवार को कहा कि भाजपा पूर्वोत्तर राज्य में लगातार दूसरी बार सरकार बनाएगी। राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 के टीकाकरण के बाद मीडिया से बात करते हुए, पांडा ने कहा कि भाजपा निश्चित रूप से असम में सत्ता बनाए रखेगी।

पांडा ने कहा, "असम में लोग केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के काम से काफी खुश हैं और राज्य सरकार या केंद्र सरकार के खिलाफ कोई सत्ताविरोधी लहर नहीं है।"

उन्होंने ध्यान दिलाया कि भाजपा सरकार के तहत पिछले पांच वर्षो में जिस तरह के विकास कार्य हुए हैं, वह पिछले 70 वर्षो में हुए विकास से कहीं अधिक है।

उन्होंने कहा, "विकास ने इतनी गति पहले कभी नहीं पकड़ी थी और प्रधानमंत्री मोदी ने इस प्रगति में व्यक्तिगत रुचि ली है, जिससे लोगों का भाजपा में विश्वास बढ़ा है।" (आईएएनएस)


07-Apr-2021 9:02 PM 43

मुंबई, 7 अप्रैल | मुंबई पुलिस के वर्तमान आयुक्त हेमंत नागराले द्वारा महाराष्ट्र गृह विभाग में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, विवादास्पद निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे, तत्कालीन मुंबई पुलिस प्रमुख परम बीर सिंह के चहेते थे। रिपोर्ट में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा के इलीट अपराध खुफिया इकाई (सीआईयू) में सहायक पुलिस निरीक्षक (एपीआई) के नौ महीने के लंबे कार्यकाल का विवरण है। शीर्ष पुलिस अधिकारियों के विरोध के बावजूद उन्हें जून 2020 में सिंह द्वारा बहाल किया गया था। पुलिस स्थापना बोर्ड ने इस संबंध में फैसला किया था।

दो पुलिस इंस्पेक्टर- सुधाकर देशमुख और विनय घोरपड़े- को यूनिट 01 और 10 में स्थानांतरित कर दिया गया। यह निर्णय वाजे के लिए रास्ता बनाने के लिए था। जो एक लोवर एपीआई रैंक के थे, लेकिन सीआईयू के प्रभारी के रूप में तैनात किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, "टेलीफोन पर दी गई जानकारी के अनुसार, तत्कालीन जेटी सीपी (अपराध) ने सचिन वाजे की पोस्टिंग का कड़ा विरोध किया था। लेकिन तत्कालीन सीओपी (सिंह), तत्कालीन जेटी सीपी (क्राइम) के आग्रह पर अनिच्छा से वाजे की सीआईयू में पोस्टिंग के बाबत कार्यालय में आदेश जारी किया।"

5 जून, 2020 को उनकी निलंबन अवधि समाप्त होने के बाद, वाजे को फिर से बहाल कर दिया गया था और 8 जून, 2020 को सशस्त्र पुलिस बल में एक गैर-कार्यकारी पद पर तैनात किया गया था, लेकिन इसके कुछ दिनों बाद, उन्हें सीआईयू में नियुक्त कर दिया गया।

मार्च में, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एसयूवी मामले और ठाणे के व्यवसायी मनसुख हिरेन की की मौत के बाद वाजे को गिरफ्तार किया था।  (आईएएनएस)

 


07-Apr-2021 9:00 PM 18

नई दिल्ली, 7 अप्रैल | फेसबुक के स्वामित्व वाले व्हाट्सएप ने बुधवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ मिलकर एक नया स्टीकर पैक 'वैक्सीन फॉर ऑल' लॉन्च किया है। कंपनी ने इसे कोविड-19 वैक्सीन के बारे में जागरूकता फैलाने की दिशा में और दुनियाभर के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना करने के रूप में पेश किया है।

कंपनी ने कहा कि ये स्टिकर लोगों को कनेक्ट करने के लिए एक मजेदार और रचनात्मक तरीका प्रदान करते हैं और हेल्थकेयर हीरोज के प्रति अपना सम्मान दिखाने के लिए भी स्टिकर्स का इस्तेमाल किया जाएगा।

कंपनी ने 150 से ज्यादा राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय सरकारों के अलावा डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ के साथ मिलकर कोविड-19 से जुड़ी सटीक जानकारी मुहैया कराने की पहल शुरू की है।

कंपनी ने एक बयान में कहा, "महामारी की शुरुआत के बाद से हमने 150 से अधिक राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय सरकारों के अलावा डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ जैसे संगठनों के साथ कोविड-19 हेल्पलाइन पर अपने 2 अरब से अधिक यूजर्स को सटीक जानकारी और संसाधनों से जोड़ने के लिए साझेदारी की है।"

व्हाट्सएप ने कहा, "पिछले एक साल में इन वैश्विक हेल्पलाइनों पर 3 अरब से अधिक संदेश भेजे गए हैं।"

जैसे कि महामारी कई देशों में एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है, सरकारें इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, अर्जेंटीना, ब्राजील और भारत जैसे देशों में नागरिकों को सटीक वैक्सीन जानकारी और पंजीकरण के लिए निजी तौर पर जोड़ने के लिए इन हेल्पलाइनों का उपयोग कर रही हैं।

कंपनी ने कहा, "हम सरकारों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को दुनियाभर में कई लोगों को वैक्सीन की जानकारी और सेवाओं से जोड़ने में मदद करना चाहते हैं, खासकर उन जगहों पर जहां पहुंच मुश्किल है और जो हाशिए पर हैं।"

व्हाट्सएप ने कहा, "हमने अपने व्हाट्सएप बिजनेस एपीआई के माध्यम से संदेश भेजने की फीस भी माफ कर दी है।"

स्टिकर पैक अब व्हाट्सएप के अंदर उपलब्ध है। (आईएएनएस)


07-Apr-2021 8:59 PM 28

मुंबई, 7 अप्रैल | देश के शेयर बाजार में बुधवार को तमाम सेक्टरों में लिवाली लौटने से तेजी का रुझान बना रहा। सेंसेक्स 460.37 अंकों यानी 0.94 फीसदी की तेजी के साथ 49,661.76 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 135.55 अंकों यानी 0.92 फीसदी की तेजी के साथ 14,819.05 पर ठहरा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रि नीति की घोषणा से गदगद शेयर बाजार ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।

बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स बीते सत्र से 75.70 अंकों की तेजी के साथ 49,277.09 पर खुला और दिनभर के कारोबार के दौरान 49,900.13 तक उछला, जबकि इस दौरान सेंसेक्स का निचला स्तर 49,093.90 रहा। सेंसेक्स के 27 शेयरों में तेजी रही जबकि तीन शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।

वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी बीते सत्र से 32.95 अंकों की बढ़त के साथ 14,716.45 पर खुला और आरबीआई के फैसले आने पर 14,879.80 तक उछला, जबकि इस दौरान निफ्टी का निचला स्तर 14,649.85 रहा। एनएसई के 43 शेयर तेजी के साथ बंद हुए जबकि सात शेयरों में गिरावट रही।

बीएसई मिडकैप सूचकांक बीते सत्र से 167.45 अंकों यानी 0.82 फीसदी की तेजी के साथ 20,653.28 पर बंद हुआ, जबकि स्मॉलकैप सूचकांक 273.30 अंकों यानी 1.30 फीसदी की तेजी के साथ 21,293.40 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स के सबसे ज्यादा तेजी वाले पांच शेयरों में एसबीआईएन (2.25 फीसदी), आईसीआईसीआई बैंक (2.05 फीसदी), नेस्ले इंडिया (2.00 फीसदी), इंडसइंड बैंक (1.98 फीसदी) और बजाज ऑटो (1.98 फीसदी) शामिल रहे। वहीं, गिरावट वाले शेयरों में टाइटन (0.78 फीसदी), एनटीपीसी (0.47 फीसदी) और हिंदुस्तुान यूनीलीवर (0.14 फीसदी) शामिल रहे।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को रेपो रेट को चार फीसदी पर स्थिर रखने के केंद्रीय बैंक के फैसले की घोषणा की।

आईबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के नतीजों की घोषणा करते हुए दास ने कहा कि रेपो रेट को चार फीसदी पर और रिवर्स रिपो रेट को 3.35 फीसदी पर स्थिर रखने का फैसला लिया गया है। (आईएएनएस)


07-Apr-2021 8:30 PM 46

नवनीत मिश्र

नई दिल्ली, 7 अप्रैल | जिस तरह पिछले साल कोरोना काल में भाजपा ने 'सेवा ही संगठन' अभियान चलाकर देश भर में जनता के बीच राहत सामग्री बांटी थी, उसी तरह अब भाजपा कोविड 19 वैक्सीनेशन पर बड़ा अभियान चला रही है। भाजपा का लक्ष्य देश में प्रतिदिन वैक्सीनेशन के टारगेट को 50 लाख पहुंचाने का है। प्रधानमंत्री मोदी और अध्यक्ष जेपी नड्डा के निर्देश पर टीकाकरण को जनांदोलन बनाया जा रहा है। बीजेपी की ओर से चलाये जा रहे इस टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए नेशनल कोऑर्डिनेटर और राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल जैन ने पूरी टीम खड़ी की है। बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और पेशे से चिकित्सक डॉ. अनिल जैन, फिलहाल उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित 31 राज्यों में वैक्सीनेशन ड्राइव का संचालन करने में जुटे हैं। पांच राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद अभियान का संचालन होगा।

भाजपा के राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल जैन ने आईएएनएस को बताया कि 20 हजारी सरकारी वैक्सीन सेंटर सहित 57 हजार स्थानों पर पार्टी हेल्प डेस्क खोलकर आम जनता को टीका लगवाने में मदद कर रही। उन्होंने कहा, "प्रत्येक मंडल में भी पांच से छह स्थानों पर इस तरह हेल्प डेस्क लगाकर आम जनता को कोविड 19 वैक्सीन लेने के तौर-तरीकों की जानकारी दी जा रही है। हर प्रदेश में टीकाकरण अभियान के लिए प्रदेश संयोजक, सह संयोजक, जिला स्तर पर भी संयोजक, सह संयोजक और मंडल स्तर पर भी टीम बनाई गई है।"

नेशनल कोआर्डिनेटर डॉ. अनिल जैन को उम्मीद है कि, "अगले तीन महीनों यानी जुलाई तक सभी को टीका लगना शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी 45 वर्ष या अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीन लग रही है। अपेक्षा है कि आगे सरकार 18 वर्ष से लेकर 45 वर्ष तक उन लोगों को वैक्सीन लगवाने का मौका देगी, जो बीमारी की कैटेगरी में आते हैं। इसके बाद 35 वर्ष से अधिक उम्र के सभी तरह के लोगों को वैक्सीन लगने की संभावना है। फिर 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी तरह के लोगों को वैक्सीन लगवाने का मौका मिलने की सरकार से अपेक्षा है। इस प्रकार जुलाई तक 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को वैक्सीन लगनी शुरू होने की अपेक्षा है।"

डॉ. अनिल जैन हर दिन सभी राज्यों में कोविड 19 की वैक्सीनेशन रिपोर्ट लेते हैं। प्रदेश संयोजक, सांसदों, विधायकों से लेकर वालंटियर्स से वह नियमित अंतराल पर वीडियो कांफ्रेंसिंग से टीकाकरण अभियान की रिपोर्ट लेते हैं। अब तक वह 22 राज्यों की टीमों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग कर चुके हैं। भाजपा फिलहाल 31 राज्यों में यह अभियान चला रही है। चुनाव खत्म होने पर पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुदुचेरी में भी भाजपा टीकाकरण अभियान चलाएगी। बीजेपी ने सभी सांसदों और विधायकों को जनता के बीच जाकर वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित करने का निर्देश दिया है। यह भी कहा है कि जनता में वैक्सीन को लेकर भ्रम को भी दूर किया जाए।  (आईएएनएस)


07-Apr-2021 8:17 PM 30

नई दिल्ली, 7 अप्रैल | कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि देश में कोविड वैक्सीन की कमी है। महाराष्ट्र सहित कई राज्यों ने इस विषय में शिकायत की है। महाराष्ट्र में कोविड मामलों की संख्या सबसे अधिक है। बुधवार को नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि सरकार ने आपूर्ति श्रृंखला और रसद की योजना नहीं बनाई है, स्वास्थ्य मंत्री गायब हैं और इस मुद्दे पर एक सर्वदलीय बैठक होनी चाहिए।

खेड़ा ने कहा कि "इसलिए यह जरूरी है कि सरकार सिविल सोसाइटी, हितधारकों के साथ संपर्क में रहे और नियमित रूप से सर्वदलीय बैठक का आयोजन करे। लेकिन, इसके ठीक उलट पिछले लगभग एक महीने से स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की ओर से कोई भी कार्रवाई नहीं दिख रही है।"

खेड़ा ने आरोप लगाया कि "वैक्सीन की मंजूरी और विनियामक प्रोटोकॉल पर ढुलमुल रवैये के कारण वश्विक स्तर पर स्वीकार्य एवं मंजूर की गई सुरक्षित वैक्सीन को भारतीय बाजार में प्रवेश करने से रोक दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप सीमित टीकों पर निर्भरता बढ़ जाती है, जिससे राष्ट्रव्यापी टीकाकरण कार्यक्रम में देरी हो रही है।"

कांग्रेस ने मांग की कि उनके विश्व स्तर पर सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर टीकों के विविधीकरण पर तुरंत विचार किया जाना चाहिए। लेकिन, सरकार नवाचार की खाई को पाटने और महामारी के समय में स्थानीय परीक्षणों पर जोर नहीं देकर विभिन्न वैक्सीन निर्माताओं के लिए भारत में प्रवेश को मुश्किल क्यों बना रही है?

उन्होंने सवाल किया, "सरकार ने पहले से यह सुनिश्चित करने के लिए वैक्सीन रसद और आपूर्ति श्रृंखला की बारीकियों की योजना क्यों नहीं बनाई ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बाद में टीकों की कोई कमी नहीं हो?"

उन्होंने कहा कि सरकार ने बार-बार टीका लगाने में संकोच करने की बात कही है जिसके परिणामस्वरूप टीका अपव्यय या कम संख्या में लोगों को टीका लगाया जा रहा है; यह सिर्फ ऐसा लगता है कि इस शासन ने भारत के आम नागरिकों को दोषी ठहराने की एक आदत बना ली है। (आईएएनएस)


07-Apr-2021 8:15 PM 33

नई दिल्ली, 7 अप्रैल | दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में डॉक्टरों ने 12 साल की एक लड़की के पेट से 5 किलो वजन वाले दो बड़े ट्यूमर को निकालकर उसे नई जिंदगी दी है। 5 किलो वजनी ये ट्यूमर दो फुटबाल के बराबर हैं, जो कि लड़की पिछले कई सालों से इस दर्द को सहन कर रही थी। लड़की का नाम उजागर नहीं किया जा सका है। उसने पेट में गड़बड़ी की शिकायतों के साथ अस्पताल का दौरा किया जो हल्के दर्द से जुड़ा था। पेट की सूजन 4-5 साल पहले शुरू हुई थी और धीरे-धीरे बढ़ती चली गई।

यह पिछले वर्ष से पेट का आकार तेजी से बढ़ने लगा और लड़की को असुविधा होने लगी और उसे सांस लेने में दर्द और कठिनाई हो रही थी।

कोविड-19 बीमारी के डर के कारण लड़की के परिवार ने किसी भी अस्पताल का रुख नहीं किया।

मार्च में परिवार ने सर गंगा राम अस्पताल का दौरा किया और सर्जरी से एक सप्ताह पहले जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी विभाग के डॉ तरुण मित्तल से मुलाकात की।

मित्तल ने कहा, "उस समय उसके पेट को काफी टेढ़ा-मेढ़ा और क्लिनिकल एग्जामिनेशन के दौरान पेट को बहुत भरा हुआ पाया गया। हम आश्चर्यचकित थे कि बहुत अधिक शिकायतों के बिना सूजन इतने बड़े आकार तक पहुंच गई है। अर्जेंट सी.टी. स्कैन से पता चला कि मरीज के पूरे पेट में काफी बड़ा ट्यूमर है।"

उन्होंने कहा, माता-पिता और लड़की से परामर्श के बाद सर्जरी की योजना बनाई गई। पूरी सावधानी के साथ 25 मार्च को ऑपेरशन किया गया। सर्जरी के दौरान यह पुष्टि हो गई कि एक बड़ा ट्यूमर पूरे पेट में फैल गया था और बड़ी रक्त की नसों और आंत सहित शरीर के महत्वपूर्ण अंगों के साथ जुड़ा हुआ था।

डॉक्टर ने कहा, तीन घंटे तक चली एक सफल सर्जरी के बाद ट्यूमर को निकाल लिया गया।

लड़की की वर्तमान स्थिति के बारे में पूछे जाने पर डॉक्टर ने आईएएनएस को बताया, यह अच्छी सर्जरी नहीं थी, लेकिन अब वह पूरी तरह से ठीक है और एक स्वस्थ व्यक्ति की तरह अपने सभी काम कर पा रही है।

सर्जरी टीम का नेतृत्व डॉ आशीष डे और डॉ अनमोल आहूजा के साथ तरुण मित्तल ने किया और एनेस्थेटिस्ट टीम में डॉ जयश्री सूद और डॉ अजय सिरोही शामिल थे। (आईएएनएस)


07-Apr-2021 8:14 PM 12

नई दिल्ली/लखनऊ, 7 अप्रैल | लखनऊ के पॉश गोमती नगर इलाके में रहने वाले एक सफल डाक्टर दंपति ने पिछले महीने कोरोना की दोनों खुराकें ली थी और अपने निजी क्लिनिक में काम शुरू कर दिया था। लेकिन दोनों एक बार फिर से कोरोना संक्रमित पाए गए। दंपति की उम्र 60 वर्ष से ऊपर है। परिवार के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर आईएएनएस को बताया कि वह और उनके बच्चे अब कोविड पॉजिटिव पाए गए हैं। कुछ दिन पहले वह अपने माता-पिता से मिलने गए थे।

वे अकेले नहीं है। लखनऊ से खबरें हैं कि वाइस चांसलर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विपिन पुरी सहित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के कम से कम 40 डॉक्टर कोरोनो पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें से अधिकतर ने वैक्सीन की दोनों खुराक ले ली है।

चिंताजनक रूप से, यह पिछले अगस्त के बाद से दूसरी बार है कि कुलपति पुरी वायरस से संक्रमित हुए हैं, यह दर्शाता है कि पुन: संक्रमण भी हो रहा है। उन्हें 25 मार्च को वैक्सीन की दूसरी खुराक दी गई थी।

सतीश कौल, एचओडी और निदेशक, आंतरिक चिकित्सा, नारायण अस्पताल, गुरुग्राम ने कहा कि टीका मूल रूप से बीमारी की गंभीरता से सुरक्षा प्रदान करता है।

कौल ने आईएएनएस को बताया, "यह हमें क्रानिकली बीमार होने से बचाता है। यह हमें आईसीयू, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट से भी बचाता है और मानव शरीर में बीमारी के तंत्र को कमजोर करने में मदद करता है।"

"इसलिए, टीका लाभार्थियों को मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग रखना जरूरी है। दूसरे डोज के बाद भी सावधानी बरतनी जरूरी है। खासकर के दो सप्ताह तक सभी एहतियाती कदम उठाने जरूरी हैं।"

मेदांता-द मेडिसिटी गुड़गांव की संक्रामक रोग विशेषज्ञ नेहा गुप्ता के अनुसार, टीकाकरण कोरोनावायरस के खिलाफ 100 प्रतिशत प्रतिरक्षा की विश्वास नहीं देता है।

"हालांकि, वैक्सीन महामारी की गंभीरता को कम कर देती है। कोविड-उचित सावधानी जारी रखना महत्वपूर्ण है।" (आईएएनएस)


07-Apr-2021 8:12 PM 41

नई दिल्ली/लखनऊ, 7 अप्रैल | लखनऊ के पॉश गोमती नगर इलाके में रहने वाले एक सफल डाक्टर दंपति ने पिछले महीने कोरोना की दोनों खुराकें ली थी और अपने निजी क्लिनिक में काम शुरू कर दिया था। लेकिन दोनों एक बार फिर से कोरोना संक्रमित पाए गए। दंपति की उम्र 60 वर्ष से ऊपर है। परिवार के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर आईएएनएस को बताया कि वह और उनके बच्चे अब कोविड पॉजिटिव पाए गए हैं। कुछ दिन पहले वह अपने माता-पिता से मिलने गए थे।

वे अकेले नहीं है। लखनऊ से खबरें हैं कि वाइस चांसलर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विपिन पुरी सहित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के कम से कम 40 डॉक्टर कोरोनो पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें से अधिकतर ने वैक्सीन की दोनों खुराक ले ली है।

चिंताजनक रूप से, यह पिछले अगस्त के बाद से दूसरी बार है कि कुलपति पुरी वायरस से संक्रमित हुए हैं, यह दर्शाता है कि पुन: संक्रमण भी हो रहा है। उन्हें 25 मार्च को वैक्सीन की दूसरी खुराक दी गई थी।

सतीश कौल, एचओडी और निदेशक, आंतरिक चिकित्सा, नारायण अस्पताल, गुरुग्राम ने कहा कि टीका मूल रूप से बीमारी की गंभीरता से सुरक्षा प्रदान करता है।

कौल ने आईएएनएस को बताया, "यह हमें क्रानिकली बीमार होने से बचाता है। यह हमें आईसीयू, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट से भी बचाता है और मानव शरीर में बीमारी के तंत्र को कमजोर करने में मदद करता है।"

"इसलिए, टीका लाभार्थियों को मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग रखना जरूरी है। दूसरे डोज के बाद भी सावधानी बरतनी जरूरी है। खासकर के दो सप्ताह तक सभी एहतियाती कदम उठाने जरूरी हैं।"

मेदांता-द मेडिसिटी गुड़गांव की संक्रामक रोग विशेषज्ञ नेहा गुप्ता के अनुसार, टीकाकरण कोरोनावायरस के खिलाफ 100 प्रतिशत प्रतिरक्षा की विश्वास नहीं देता है।  (आईएएनएस)

"हालांकि, वैक्सीन महामारी की गंभीरता को कम कर देती है। कोविड-उचित सावधानी जारी रखना महत्वपूर्ण है।"